चीन में बच्चा पैदा करने से क्यों डरते हैं लोग? 43 सालों बाद 2020 में बुरी तरह गिरी देश की जन्म दर
चीन में 1970 के दशक में 'वन चाइल्ड पॉलिसी' लागू किया गया था और अब देश की सरकार ने तीन बच्चों को जन्म देने की नीति बनाई है, बावजूद अब लोग बच्चों को जन्म देना नहीं चाहते हैं।
बीजिंग, नवंबर 21: आखिर चीन में बच्चों का जन्मदर बुरी तरह से क्यों गिर गया है? इस सवाल ने चीन के निरंकुश सरकार को टेंशन में डाल दिया है। चीन की कम्युनिस्ट सरकार के तानाशाही फैसलों की वजह से देश में बच्चों का जन्मदर बुरी तरह से गिर गया है। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के सरकारी आंकड़ों से पता चला है कि, चीन में बच्चों का जन्म दर 2020 में एक प्रतिशत से नीचे गिर गई है, जो 43 वर्षों में सबसे कम बच्चे के जन्म की दर को दर्शाता है।

बुरी तरह गिर गया जन्मदर
चीन की सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने चीन के सरकारी विभाग नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि, 2020 में जन्म दर प्रति हजार लोगों पर 8.52 दर्ज की गई है, जो पिछले 43 सालों में सबसे कम है। सबसे आश्चर्यजनक बात ये है कि, चीन में बच्चों का जन्म दर उस वक्त बुरी तरह से गिरा है, जब चीन की सरकार बच्चों के जन्मदर को बढ़ाने की कोशिश कर रही है और अब चीन में तीन बच्चे पैदा करने की इजाजत दी जा चुकी है, वहीं चीन की कम्युनिस्ट सरकार की तरफ से बच्चों का जन्मदर बढ़ाने के लिए कई तरह की स्कीम भी निकाले गये हैं। चीन के लिए सबसे ज्यादा टेंशन की बात ये है कि, तमाम सरकारी स्कीम के बाद भी 2020 में देश में प्राकृतिक ग्रोथरेट घटकर 1.45 प्रति हजार तक पहुंच चुकी है, जो पिछले 43 सालों में सबसे नीचला स्तर है।

घटते जन्मदर से टेंशन में सरकार
आपको बता दें कि, जन्म दर देश की कुल जनसंख्या में नये जन्मे बच्चों की संख्या होती है, जबकि, ग्रोथ रेट में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या और जन्म लेने के बाद बच्चों की मौतों को लेकर तैयार किया जाता है। पिछले साल जारी चीन की सरकार के एनबीएस विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2019 में चीन में जन्म दर 10.48 प्रति 1,000 थी। एनबीएस का नवीनतम जनसंख्या डेटा चीन की जनसांख्यिकीय समस्याओं की सीमा को इंगित करता है, जो कम जन्म और देश की बढ़ती उम्र को बताता है। आंकड़ों से पता चला है कि, चीन में जन्म दर पिछले कई सालों से लगातार गिरती जा रही है और 'एक बच्चे की नीति' में ढील देने के बाद भी चीन के लोग अब बच्चों को जन्म देने के लिए तैयार नहीं हो रहे है।

रिपोर्ट में जताई गई चिंता
इस रिपोर्ट में चिंता जताते हुए कहा गया है कि, "चीन जनसंख्या और विकास अनुसंधान केंद्र से संबद्ध एक प्रोफेशनल जर्नल पॉपुलेशन रिसर्च द्वारा मई में प्रकाशित एक लेख में कहा है कि, 2015 की समान अवधि की तुलना में 2020 में जन्म दर में मासिक गिरावट कम हो गई है, और नवंबर और दिसंबर में तक अनुपात में करीब 45 प्रतिशत तक गिरावट आई है।'' चीन के जनसांख्यिकी विभाग का कहना है कि प्रसव उम्र की महिलाओं की गिरती संख्या और कोविड -19 का असर भी जन्मदर कम होने के पीछे के कारण हैं।

जन्मदर कम होने की वजहें
बीजिंग स्थित थिंक-टैंक सेंटर फॉर चाइना एंड ग्लोबलाइजेशन के जनसांख्यिकी विशेषज्ञ हुआंग वेनझेंग ने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा कि, "जन्मदर कम होने के पीछे तीन मुख्य कारण हैं। पहला कारण बच्चे पैदा करने वाली महिलाओं की संख्या में कमी, दूसरा कारण तेजी से शहरीकरण और उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले लोगों की संख्या और तीसरा कारण टीकाकरण सहित कोविड-19 प्रतिबंध।" आपको बता दें कि, चीन, दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है और 2016 में दशकों पुरानी एक बच्चे की नीति को खत्म करने के बावजूद चीन में युवा आबादी तेजी से कम हो रही है और जन्मदर घट रहा है।

लगातार घट रही है युवा आबादी
आपको बता दें कि, चीन में पिछले कई सालों से जनसंख्या लगातार कम होती जा रही है और अब स्थिति ये है कि, देश की सेना में शामिल होने के लिए भी युवाओं की संख्या कम होती जा रही है। पिछले 10 सालों में चीन में सिर्फ 7 करोड़ 20 लाख बच्चों का जन्म हुआ है, जो काफी ज्यादा कम है। मई महीने में चीन में विवाहित जोड़ों को तीन बच्चे पैदा करने की अनुमति दी गई है, लेकिन दिक्कत ये है कि, चीन की युवा आबादी बच्चे पैदा ही नहीं करना चाहती है। और इसके पीछे चीन का तानाशाही शासन है, जिसने लोगों पर इतने नियम लगाए हैं, कि लोगों के लिए अपनी जिंदगी का फैसला करना भी मुश्किल हो गया है।












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