सबसे ताकतवर देश अमेरिका को चंद हैकर्स ने झुकाया, 200 बड़ी कंपनियां बर्बादी के कगार पर
वाशिंगटन, 5 जुलाई: कोरोना वायरस ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था को पहले से ही पटरी से उतार रखा है। ऐसे में अब उसके सामने नई मुसीबत आ गई, जहां 2 जुलाई को अमेरिका के ऊपर अब तक का सबसे बड़ा साइबर अटैक हुआ है। जिसमें 200 से ज्यादा कंपनियों के डेटा को नुकसान पहुंचा। अब हैकर्स ने 520 करोड़ की फिरौती मांगी है। अगर ये रकम नहीं दी गई, तो वो इन कंपनियों के सारे सिस्टम बर्बाद कर देंगे। खास बात तो ये है कि फ्लोरिडा से 5000 किलोमीटर दूर रूस से इन सैकर्स ने सैकड़ों कंपनियों के सर्वर को अपने कब्जे में ले रखा है।
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कॉरपोरेट नेटवर्क के जरिए हमला
दरअसर फ्लोरिडा स्थित आईटी कंपनी कासिया कई कंपनियों को अपने सॉफ्टवेयर प्रोवाइड करवाती है। हैकर्स ने सबसे पहले कासिया को टारगेट किया। इसके बाद वो कॉरपोरेट नेटवर्क के जरिए अन्य कंपनियों तक पहुंच गए। बाद में पता चला कि इस साइबर अटैक के पीछे रूस से संबंधित REvil रेनसमवेयर गैंग का हाथ है। हमले के तुरंत बाद ही कासिया ने सभी कंपनियों के लिए एक एडवाइजरी जारी कर दी। जिसमें उसने कहा कि उनके कॉरपोरेट सर्वर, डेस्कटॉप और नेटवर्क डिवाइस चलाने वाले एक एप्लिकेशन के साथ छेड़छाड़ की गई है। ऐसे में जो भी ग्राहक उनका वीएसए टूल इस्तेमाल करते हैं, वो तुरंत अपना सर्वर बंद कर दें। वैसे शुरू में इससे प्रभावित कंपनियों की संख्या 200 ही थी, लेकिन उसके 10 देशों में 10 हजार ग्राहक हैं। ऐसे में ये संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है।

डार्कवेब पर डाला पोस्ट
वहीं दूसरी ओर REvil रेनसमवेयर गैंग ने डार्कवेब पर एक पोस्ट किया है। जिसमें उसने लिखा कि इस हमले में हमारा हाथ है, जो भी हमसे बात करना चाहता है वो 520 करोड़ रुपये लेकर आए। ये पूरी पेमेंट बिटकॉइन में होगी। इसके बाद वो हैकिंग से जुड़ी सारी जानकारी कंपनियों को दे देंगे। साथ ही पेमेंट के एक घंटे बाद उनका कामकाज सामान्य हो जाएगा। वहीं अगर फिरौती की रकम देने में देरी की गई तो ये रोजाना बढ़ती जाएगी।

दुनिया का सबसे खतरनाक गैंग
REvil दुनिया का सबसे खतरनाक हैकिंग ग्रुप है, जिसे सोडिनोकिबी के नाम से भी जाना जाता है। ये ग्रुप हैकिंग में रैन्समवेयर का इस्तेमाल करता है, जो एक तरह का मालवेयर है। जब ये ग्रुप हमला करता है तो इसके वायरस सिस्टम के सारे डेटा को लॉक कर देते हैं। साथ ही उसकी जानकारी ग्रुप को भेज देते हैं। ऐसे में जब फिरौती की रकम नहीं मिलती तो REvil कंपनियों के सिस्टम को तबाह कर देते हैं या फिर उसका डेटा सार्वजनिक नेटवर्क पर डाल देते हैं।

राष्ट्रपति ने कही ये बात
वहीं दूसरी ओर अमेरिकी सरकार भी इस हमले को लेकर काफी गंभीर है। मामले में राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि उनका खुफिया विभाग इस मामले की गहराई से जांच कर रहा है, जो भी हैकिंग ग्रुप इसमें शामिल हैं उनको छोड़ा नहीं जाएगा। एक महीने पहले भी अमेरिकी सरकार ने रूस पर REvil गिरोह को पनाह ना देने का दबाव बनाया था। वैसे से REvil का अमेरिका पर पहला हमला नहीं है। इससे पहले भी वो कई सरकारी और प्राइवेट संस्थानों को निशाना बना चुका है।
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