ऊर्जा, इन्फ्रास्ट्रक्चर, कम्युनिकेशन... मोदी सरकार ने श्रीलंका की मदद के लिए बड़े-बड़े प्लान बनाए

पिछले हफ्ते श्रीलंका में प्रदर्शन एक बार फिर से भड़क गया और शनिवार को गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने आलीशान राष्ट्रपति भवन पर धावा बोल दिया, जिससे राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को कथित तौर पर देश छोड़कर भागना पड़ा।

नई दिल्ली, जुलाई 12: इससे पहले कि एक और हफ्ते में श्रीलंका की स्थिति बद से बदतर हो जाएं, नई दिल्ली ने कोलंबो तक अपनी सहायता पहुंचाने के लिए व्यापक प्लान तैयार किए हैं। भारत सरकार ने जो श्रीलंका के लिए प्लान तैयार किए हैं, उसके कई उद्येश्य हैं। सबसे पहला मकसद तो भारत का यही है, कि संकटग्रस्त पड़ोसी देश को विपरीत हालात से बचाया जाए और श्रीलंका के लोगों के साथ भारत के संबंधों को दिल से दिल तक जोड़ा जाए, वहीं भारत का दूसरा मकसद श्रीलंका से चीन को हमेशा के लिए खदेड़ देना है और कई एक्सपर्ट ने इसे श्रीलंका संकट को भारत के लिए चीन को हमेशा के लिए बाहर करने के लिए एक परफेक्ट मौका बताया है और भारत सरकार ने जो प्लान तैयार किए हैं, उससे यही लगता है, कि मोदी सरकार हिंद महासागर में एक भी मौका नहीं खोना चाह रही है।

श्रीलंका में स्थिति काफी ज्यादा बिगड़ी

श्रीलंका में स्थिति काफी ज्यादा बिगड़ी

पिछले हफ्ते श्रीलंका में प्रदर्शन एक बार फिर से भड़क गया और शनिवार को गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने आलीशान राष्ट्रपति भवन पर धावा बोल दिया, जिससे राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को कथित तौर पर देश छोड़कर भागना पड़ा। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने कोलंबो में प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के निजी आवास में आग लगा दी। विक्रमसिंघे, जिन्होंने इस साल मई में ही महिंदा राजपक्षे के इस्तीफा देने के बाद प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी, उन्होंने शनिवार को एक ट्वीट में कहा कि, उन्होंने पार्टी नेताओं के पद छोड़ने और सर्वदलीय सरकार के गठन के लिए रास्ता बनाने की सिफारिश को स्वीकार कर लिया है। कुछ घंटे बाद, श्रीलंका की संसद के अध्यक्ष ने घोषणा की कि गोटाबाया भी 13 जुलाई को इस्तीफा दे देंगे। वहीं, श्रीलंका के ताजा घटनाक्रम के बारे में एक सवाल के जवाब में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को तिरुवनंतपुरम हवाईअड्डे के बाहर संवाददाताओं से कहा कि, भारत 'श्रीलंका का बहुत समर्थक' रहा है और 'मदद करने की कोशिश कर रहा है।

मोदी सरकार के बड़े-बड़े प्लान

मोदी सरकार के बड़े-बड़े प्लान

इसी महीने 1 जुलाई को भारत के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (डिप्टी-एनएसए) विक्रम मिश्री की अध्यक्षता में एक अंतर-मंत्रालयी बैठक के दौरान कोलंबो के साथ भारत के "आर्थिक संबंधों" को बढ़ाने के लिए "अवसरों" पर विचार करने की योजना पर चर्चा की गई है। इससे परिचित शीर्ष सरकारी अधिकारियों ने दिप्रिंट को इस बाबत जानकारी दी है। भारतीय अधिकारियों ने कहा कि, श्रीलंका में भारत की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं, व्यापार और कनेक्टिविटी के कार्यान्वयन पर चर्चा के अलावा, श्रीलंका में लेनदेन के लिए भारतीय रुपये के उपयोग के प्रस्ताव को तेजी से ट्रैक करने की आवश्यकता पर भी विचार-विमर्श किया गया है। अधिकारियों में से एक ने कहा कि, भारत एक बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण पर काम कर रहा है, जो "अधिक दीर्घकालिक" है और इसका उद्देश्य "व्यापार और निवेश संबंधों को गहरा करना" है।

श्रीलंका में भारत की बड़ी परियोजनाएं

श्रीलंका में भारत की बड़ी परियोजनाएं

भारत सरकार श्रीलंका में कई परियोजनाओं पर काम कर रही है और पिछले कुछ महीनों में भारत ने चीन के हाथ में गई कुछ परियोजनाओं को वापस 'छीन' लिया है। श्रीलंका में जिन परियोजनाओं पर भारत काम कर रहा है, उनमें, श्रीलंका के पूर्वोत्तर तट पर त्रिंकोमाली बंदरगाह का विकास, बिजली परियोजनाएं, भारत और श्रीलंका को जोड़ने वाली उड़ानों की संख्या बढ़ाने, मत्स्य पालन बंदरगाह का विकास और नौका सेवाओं को फिर से शुरू करना शामिल है। श्रीलंका अपने सबसे खराब आर्थिक संकटों में से एक का सामना कर रहा है, और विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने के बाद श्रीलंका अत्यंत जरूरी सामान, जैसे पेट्रोल-डीजल, गैस और दवाओं की भी खरीददारी नहीं कर पा रहा है, लिहाजा देश में हाहाकार मचा हुआ है और पड़ोसी देश को राहत पहुंचाने के लिए नई दिल्ली ने इस साल जनवरी से पहले ही ऋण, क्रेडिट लाइन और क्रेडिट स्वैप में 3 अरब डॉलर की मदद दे चुका है। इसके अलावा, भारत ने संकट के समय में द्वीप राष्ट्र को आवश्यक चिकित्सा आपूर्ति, खाद्य पदार्थ, खाद्यान्न और पेट्रोलियम उत्पाद भी वितरित किए हैं।

श्रीलंका में उपस्थिति स्थापित करने की कोशिश

श्रीलंका में उपस्थिति स्थापित करने की कोशिश

पिछले कुछ सालों में चीन ने श्रीलंका में अपना पैर जमाने की कोशिश की और श्रीलंका की राजपक्षे सरकार ने चीन को श्रीलंका में काफी अनुकूल माहौल उपलब्ध करवाए। इस दौरान श्रीलंका ने चीन से बेतहाशा कर्ज लिया और उसी का अंजाम आज श्रीलंका भुगत रहा है। लिहाजा, श्रीलंका में अपनी उपस्थिति को फिर से स्थापित करने के लिए भारत काफी तेज रफ्तार से काम करा चाहता है और भारत इस बार चीन को एक भी मौका नहीं देना चाहता है, कि वो श्रीलंका में हावी हो सके। बीजिंग, जो कोलंबो को कर्ज देने में तीसरे स्थान पर है, श्रीलंका के कुल कर्ज में उसका कर्ज करीब 10 प्रतिशत है और चीन ने श्रीलंका में रणनीतिक बंदरगाहों के विकास सहित बुनियादी ढांचे में भारी निवेश किया है। वहीं, बीजिंग की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत श्रीलंका ने अपने बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए चीन से बड़े पैमाने पर कर्ज लिया है। लिहाजा, इस द्वीपीय राष्ट्र में चीन की बढ़ती उपस्थिति ने भारतीय प्रतिष्ठानों की चिंता बढ़ा रखी है।

किन प्रोजेक्ट्स पर है भारत का फोकस?

किन प्रोजेक्ट्स पर है भारत का फोकस?

दप्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया है कि, इस महीने की शुरुआत में डिप्टी एनएसए की अध्यक्षता में हुई अंतर-मंत्रालयी बैठक के दौरान "प्राथमिकता वाली परियोजनाओं" पर पूरा फोकस देने और श्रीलंका के साथ भारत के व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ाने के प्रस्तावों पर चर्चा की गई है। इसमें सबसे बड़ा फैसला पेट्रोलियम पदार्थों को लेकर किया गया है और फैसला लिया गया है, कि श्रीलंका के खुदरा क्षेत्र में पेट्रोलियम उत्पादों की उपस्थिति बढ़ाई जाए, जिससे लोगों को राहत मिल सके। वहीं, त्रिंकोमाली बंदरगाह के विकास के लिए एक एकीकृत प्रस्ताव को भी तैयार किया गया है। वहीं, एक ऊर्जा केंद्र की योजना, कोच्चि के लिए उप-समुद्री संपर्क की स्थापना और एक ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह का विकास भी फोकस वाले प्रोजेक्ट्स में शामिल हैं। दप्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, एक हवाई अड्डे का विकास, एक रिफाइनरी की स्थापना, एक भारी उद्योग क्षेत्र के रूप में 2,400 एकड़ भूमि का विकास और तेल टैंकों का नवीनीकरण भी भारतीय प्रस्ताव का हिस्सा हैं।

प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं भारतीय मंत्रालय

प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं भारतीय मंत्रालय

रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और विदेश मंत्रालय सहित संबंधित मंत्रालयों को इस संबंध में एक प्रस्ताव तैयार करने और इसे जल्द ही श्रीलंका के साथ साझा करने का निर्देश दिया गया है। डिप्टी एनएसए मिश्री की अध्यक्षता में 1 जुलाई को हुई बैठक में कैबिनेट सचिवालय और वित्त, वाणिज्य, विदेश, मत्स्य पालन, बिजली, नागरिक उड्डयन, पेट्रोलियम और नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया था। ये कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जो रणनीतिक तौर पर काफी ज्यादा महत्वपूर्ण माने जाते हैं और इन क्षेत्रों में भारत काफी तेजी के साथ अपनी उपस्थिति बढ़ाना चाहता है। बैठक में इंडियन ऑयल की अनुषंगी लंका इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (एलआईओसी) को अतिरिक्त शेड-फ्यूल स्टेशन/आउटलेट उपलब्ध करवाने के लिए फास्ट-ट्रैकिंग मंजूरी पर भी चर्चा की गई है।

बिजली क्षेत्र पर भारत का सबसे ज्यादा फोकस

बिजली क्षेत्र पर भारत का सबसे ज्यादा फोकस

भारत सरकार की प्लानिंग से वाकिफ भारत के सरकारी अधिकारियों ने कहा कि, भारत अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए श्रीलंका के बिजली क्षेत्र में निवेश करने पर भी विचार कर रहा है। इसमें पावर ग्रिड कनेक्टिविटी परियोजना के लिए एक संयुक्त उद्यम के गठन को अंतिम रूप देना और पूर्वी त्रिंकोमाली के समपुर में सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना को फास्ट-ट्रैक करना शामिल है। भारत के नेशनल थर्मल पॉवर कॉरपोरेशन यानि एनटीपीसी ने मार्च 2022 में सीलोन बिजली बोर्ड (सीईबी) के साथ संयुक्त रूप से समपुर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जो एक बार पूरा हो जाने पर, 100 मेगावाट (मेगावाट) बिजली पैदा करने की क्षमता होगी। वहीं, श्रीलंका में इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास से संबंधित एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि, भारत भी श्रीलंका में हवाई संपर्क को मजबूत करने पर विचार कर रहा है। अधिकारी ने कहा, "भारत सरकार, भारत को श्रीलंका के उत्तरी प्रांत से जोड़ने वाली उड़ानों की आवृत्ति बढ़ाने का इच्छुक है।" इसके अलावा, कांकेसंथुरई से कराईकल और तलाईमन्नार से रामेश्वरम तक नौका सेवाओं को फिर से शुरू करने के लिए "पर्याप्त उपायों और सुविधाओं" की आवश्यकता पर भी बैठक के दौरान चर्चा की गई।

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