भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल में फिर बनाएंगे सरकार, जानिए उनकी शख्सियत

तेल अवीव। इजरायल की टॉप कोर्ट ने बेंजामिन नेतन्‍याहू को अगले हफ्ते प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने की मंजूरी दे दी है। नेतन्‍याहू को ऐसे मौके पर कोर्ट की तरफ से मंजूरी मिली है जब उनके खिलाफ भ्रष्‍टाचार के गंभीर आरापे लगे हैं। कोर्ट ने कहा है कि वह कानूनी रूप से सरकार बना सकते हैं। इजरायल में एक साल के अंदर तीन बार चुनाव हुए मगर तीनों ही बार अनिश्चितता की स्थिति बनी रही।

तीनों चुनावों में चूक गए बीबी

तीनों चुनावों में चूक गए बीबी

नेतन्‍याहू को इजरायल में लोग बीबी कहकर बुलाते हैं। पिछले वर्ष अप्रैल फिर सितंबर और फिर मार्च में चुनाव हुए थे। लेकिन किसी भी पार्टी को स्‍पष्‍ट बहुमत नहीं मिल सका। इजरायल में किसी भी पार्टी या गठबंधन को बहुमत के लिए 60 सीटों की जरूरत होती है। मार्च में चुनावों से पहले एग्जिट पोल में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और साथी नेशनलिस्‍ट पार्टियों को 61 सीटों का अनुमान दिखाया जा रहा था लेकिन जब फाइनल नतीजे तो नेतन्‍याहू की पार्टी सिर्फ तीन सीटों से बहुमत हासिल करने से चूक गई। इजरायली पीएम, इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) का अहम हिस्‍सा रहे हैं।

पांचवीं बार संभालेंगे देश की कमान

पांचवीं बार संभालेंगे देश की कमान

नेतन्‍याहू के पास इजरायल के सबसे युवा पीएम होने का रिकॉर्ड है। इसके अलावा वह देश के पहले ऐसे पीएम भी थे जिनका जन्‍म वर्ष 1948 में इजरायल के गठन के बाद हुआ था। नेतन्‍याहू साल 1996 के बाद वह 2009 से 2013 तक पीएम के पद पर रहे और यह उनका दूसरा कार्यकाल था। वर्ष 1977 के बाद इजरायल के लिए यह पहला मौका था जब किसी पीएम ने अपना कार्यकाल पूरा किया हो। इसके बाद 2013 से 2015 तक पीएम बने और अब बतौर पीएम यह उनका चौथा कार्यकाल है। अब बीबी पांचवीं बार देश की कमान संभालेंगे।

अमेरिका से वापस लौटे इजरायल

अमेरिका से वापस लौटे इजरायल

नेतन्‍याहू का जन्‍म 21 अक्‍टूबर 1949 को तेल अवीव में हुआ था। सन् 1963 में उनका परिवार अमेरिका चला गया। यहां पर उनके पिता बेंनजियॉन जो कि एक इतिहासकार थे, उन्‍हें कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की ओर से प्रोफेसर की पोस्‍ट ऑफर हुई। 18 वर्ष की उम्र में सन् 1967 में हाई स्‍कूल से ग्रेजुएट होने के बाद नेतन्‍याहू अमेरिका से इजरायल वापस आ गए और यहां पर वह इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) का हिस्‍सा बन गए। ट्रेनिंग के बाद उन्‍हें आईडीएफ की स्‍पेशल कमांडो फोर्सेज सैराइट मटकल में शामिल किया गया। वह एक कमांडो थे और पांच वर्ष तक इसका हिस्‍सा रहे।

ट्रेंड कमांडो हैं नेतन्‍याहू

ट्रेंड कमांडो हैं नेतन्‍याहू

1967 से 1970 तक चले में अरब संघर्ष में कई सर्जिकल स्‍ट्राइक का हिस्‍सा बने और कई बार उन्‍होंने यूनिट को लीड किया। कई मिशन को किया लीड बीबी कई और मिशन का भी हिस्‍सा रहे जिसमें 1968 में हुआ ऑपरेशन इनफेर्नो और मई 1972 में सबेना फ्लाइट 571 का रेस्‍क्‍यू मिशन भी शामिल है। इस रेस्‍क्‍यू मिशन में तो उन्‍हें कंधे पर गोली भी लगी थी। नेतन्‍याहू कमांडो यूनिट के कैप्‍टन थे। साल 1973 में वह मिडिल ईस्‍ट वॉर में अपने देश के लिए लड़े।

लीजेंड योनातन के भाई बीबी

लीजेंड योनातन के भाई बीबी

मिलिट्री सर्विस खत्‍म होने के बाद बीबी वापस अमेरिका आ गए और यहां पर उन्‍होंने मेसाच्‍यूसेट्स इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी (एमआईटी) से बैचलर और मास्‍टर्स डिग्री हासिल की। वर्ष 1976 नेतन्‍याहू के भाई योनातन चार जुलाई 1976 को युगांडा के एंतेबे एयरपोर्ट पर चलाए गए ऑपरेशन एंतेबे का हिस्‍सा थे। इस ऑपरेशन में पीएम ने अपने बड़े भाई को गंवा दिया था। उनकी मौत का नेतन्‍याहू फैमिली पर खासा असर हुआ और योनातन का नाम पूरे इजरायल में लीजेंड के तौर पर लिया जाने लगा।

बनाया एक एंटी-टेररिस्‍म इंस्‍टीट्यूट

बनाया एक एंटी-टेररिस्‍म इंस्‍टीट्यूट

पीएम नेतन्‍याहू ने अपने भाई की याद में एक एंटी-टेररिज्‍म इंस्‍टीट्यूट भी खोला। इसके बाद अमेरिका में इजरायल के राजदूत और अगले विदेश मंत्री मोशे अरेंस की नजरों में आए। वर्ष 1982 में अरेंस ने बेंजामिन को अपना डिप्‍टी बनाया और उन्‍हें वॉशिंगटन बुला लिया। यहां से उनके राजनीति करियर की शुरुआत हुई। अमेरिकी एक्‍सेन्‍ट के साथ अंग्रेजी बोलने वाले नेतन्‍याहू धीरे-धीरे अमेरिकी टेलीविजन का हिस्‍सा बन गए और उन्‍होंने इजरायल की आवाज उठानी शुरू की। वर्ष 1984 में उन्‍हें यूनाइटेड नेशंस के हेडक्‍वार्टर में इजरायल का स्‍थायी प्रतिनिधि नियुक्‍त कर दिया गया।

1988 में घरेलू राजनीति में सक्रिय नेतन्‍याहू

1988 में घरेलू राजनीति में सक्रिय नेतन्‍याहू

वर्ष 1988 में इजरायल वापस लौटे और फिर घरेलू राजनीति का हिस्‍सा बन गए। उन्‍होंने चुनावों में क्‍नेस्‍सेट संसदीय सीट जीत और देश के उप-विदेश मंत्री बनें। उन्‍होंने खुद को राजनीतिक पार्टी लिकुड के पूर्व नेताओं के काफी करीब रखा। जब वर्ष 1992 में पार्टी को चुनावों में हार मिली तो उन्‍हें इसका चेयरमैन बना दिया गया। 1996 में वह पहली बार सीधे तौर पर चुनाव जीतकर देश के पीएम बने। उन्‍होंने शिमॉन पेरेस को चुनावों में हराया था।

नेतन्‍याहू ने की हैं तीन शादियां

नेतन्‍याहू ने की हैं तीन शादियां

70 के दशक में अपना नाम बदलने के बारे में सोचा था। वह अपना नाम बदलकर बेन निते करना चाहते थे। उन्‍हें लगता था कि अमेरिकियों के लिए यह नाम पुकारना ज्‍यादा आसान होगा।नेतन्‍याहू ने तीन शादियां की हैं। उनकी पहली शादी मरियम वाइजमान के साथ हुई। इस शादी से उनकी एक बेटी है और अब वह इस बेटी की वजह से नाना भी हैं। इसके बाद उन्‍होंने फ्लूअर कैट्स से शादी की। फिलहाल उनकी पत्‍नी सारा बेन अरत्‍जी हैं और इस शादी से उनके दो बेटे याइर और अवनेर हैं।

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