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चीन के लिए 'भस्‍मासुर' बना जिनपिंग का प्लान, आंख बंद कर दिया भारी भरकम लोन, अब नहीं हो पा रही वसूली

चीन का बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव प्रोजेक्ट के बारे में आशंका जताई जा रही है कि यह अब फेल हो चुका है। गरीब तथा कम विकसित देशों को बीआरआई का लालच दिखाकर उन्हें कर्ज के जाल में फंसाने का चीनी प्लान उल्टा साबित हो गया है।

ऐसी रिपोर्ट्स आ रही है कि दुनिया के सबसे बड़े द्विपक्षीय ऋणदाता चीन को बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के तहत अपने कुछ उधारकर्ताओं के ऋण संकट से निपटने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

China’s double-edged Belt and Road debt trap

इस बीच चीन की घरेलू मंदी और कोविड महामारी ने बीआरआई परियोजना को और ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। चीन के पास अब इतने पैसे नहीं हैं कि वह फ्री में गरीब देशों को कर्ज बांट सके। वहीं, गरीब देश चीन से सिर्फ अनुदान की रट लगा रहे हैं और कर्ज से मना कर रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने इस प्रोजेक्ट के तहत पाकिस्तान 77.3 अरब डॉलर, अंगोला को 36.3 अरब डॉलर, इथियोपिया को 7.9 अरब डॉलर, केन्या 7.4 अरब डॉलर और श्रीलंका 7 अरब डॉलर का ऋण दिया है।

साल 2016 में चीन ने 28 अरब डॉलर से भी अधिक का ऋण दिया था। वहीं साल 2022 में चीन ने सिर्फ 1 अरब डॉलर का लोन ही दिया। जाहिर है कि चीन ने कर्ज की समस्या से निपटने के लिए 2017 से ऋण देना कम कर दिया है, लेकिन कुछ देशों का चीन पर बकाया कर्ज का भंडार ऊंचा बना हुआ है। ऐसे में चीन का उन देशों से पैसा निकलवाना मुश्किल साबित हो रहा है।

पाकिस्तान पर अपने कुल विदेशी कर्ज़ का एक तिहाई से अधिक चीन का बकाया है। अंगोला पर अपने कुल विदेशी ऋण (73 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का 40 प्रतिशत से अधिक चीन का बकाया है, वह अपने राजस्व का लगभग 70 प्रतिशत ऋण चुकाने पर खर्च कर रहा है।

पाकिस्तान, लाओस, श्रीलंका, जाम्बिया, इथोपिया जैसे देश उदाहरण हैं कि चीन ने जिन देशों को लोन दिया है वे या तो डिफॉल्‍ट होने की कगार पर हैं या फिर बेहद खराब आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे में चीन को उन देशों से किसी प्रकार की कर्ज वसूली नहीं हो पा रही है। पाकिस्‍तान जैसे कई देशों ने कर्ज रीस्‍ट्रक्‍चर करने के लिए कहा है।

पहले से ही आर्थिक संकट में फंसे चीन के लिए इससे मुश्किल बढ़ गई है। ऐसे में चीन ऋण संकट में फंसे बीआरआई कर्जदारों को राहत पैकेज की पेशकश कर रहा है, साथ ही ऋण देने में भी कमी कर रहा है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक 2020 से मार्च 2023 के बीच, चीन ने 78.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर के ऋणों पर फिर से बातचीत की और/या बट्टे खाते में डाल दिया।

पाकिस्तान वह देश है जहां प्रमुख चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा 2013 में शुरू किया गया था, लेकिन अब तक मेजबान नकदी-संकटग्रस्त देश के लिए कोई सकारात्मक परिणाम देने में विफल रहा है, जो अब संभावित डिफ़ॉल्ट का सामना कर रहा है।

यही वजह है कि चीन ने बीआरआई प्रोजेक्ट के अधीन सीपीईसी परियोजना का विस्तार कम करना शुरू कर दिया है। बीजिंग ने ऊर्जा, पर्यटन, जल प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन सहित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के तहत कई क्षेत्रों में प्रत्यक्ष निवेश से संबंधित इस्लामाबाद के कई प्रस्तावों को खारिज कर दिया है।

चीन के साथ संकट ये भी है कि उसके अतिचर्चित बीआरआई में अब कोई और देश शामिल नहीं होना चाहता है। हाल में ही इटली ने इस प्रोजेक्ट से हटने का ऐलान कर दिया है तो वहीं, युगांडा जैसे देश भी चीन को छोड़कर तुर्की से पैसा कर्ज ले रहा है। इसके अलावा कई अफ्रीकी देश अब चीन छोड़ आईएफएफ से लोन लेने पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।

क्या है बीआरआई प्रोजेक्ट?

बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को न्यू सिल्क रोड भी कहा जाता है। इसकी शुरुआत 2013 में हुई थी। शी जिनपिंग का ये प्रोजेक्ट बुनियादी ढांचे के जरिए पूर्वी एशिया और यूरोप को जोड़ने के लिए तैयार की गई एक पहल है।

ये परियोजना अफ्रीका, ओशिनिया और लैटिन अमेरिका में शुरू हुई है, इससे चीन के आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव में काफी विस्तार हुआ है। पहले इसे 'वन बेल्ट, वन रोड' पहल भी कहा जाता था, लेकिन अब इसे बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का नाम मिला है।

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