बासमती चावल पर भिड़े भारत-पाकिस्तान, यूरोपीयन यूनियन पहुंची लड़ाई, समझिए पूरी कहानी

भारत ने बासमती चावल के विशेष ट्रे़डमार्क के लिए यूरोपीयन यूनियन में आवेदन दिया है, ताकि भारत को बासमती चावल के टाइटल का मालिकाना हक प्राप्त हो जाए, जिसका पाकिस्तान की तरफ से विरोध किया गया है।

नई दिल्ली, जून 08: भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर सालों से अब तक फैसला नहीं हुआ है लेकिन अब बासमती चावल पर भी भारत और पाकिस्तान आपस में भिड़ गये हैं। बासमती चावल के बिना बिरयानी या पुलाव बनाने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है लेकिन सालों से दुश्मन बने दोनों पड़ोसी देश इस चावल की लड़ाई में उलझ गये हैं। कश्मीर का मसला भले यूनाइटेड नेशंस हल नहीं कर पाया हो लेकिन बासमती चावल को लेकर जो लड़ाई शुरू हुई है वो यूरोपीय यूनियन तक पहुंच गई है।

बासमती चावल पर आमने-सामने

बासमती चावल पर आमने-सामने

दरअसल, भारत ने बासमती चावल के विशेष ट्रे़डमार्क के लिए यूरोपीयन यूनियन में आवेदन दिया है, ताकि भारत को बासमती चावल के टाइटल का मालिकाना हक प्राप्त हो जाए। लेकिन जैसे भी मालिकाना हक के लिए भारत यूरोपीयन यूनियन पहुंचा, ठीक वैसे ही पीछे पीछे पाकिस्तान भी भारत के दावे का विरोध करने के लिए पहुंच गया। यूरोपीयन यूनियन में पाकिस्तान ने भारत के मालिकाना हक मांगने का विरोध किया है। पाकिस्तान का कहना है कि अगर भारत को बासमती चावल के मालिकाना हक का टाइटल मिल जाता है तो उससे पाकिस्तान को काफी नुकसान होगा। पाकिस्तान के लाहौर में अल-बरकत राइस मिल्स चलाने वाले गुलाम मुर्तजा ने कहा कि ''यह हमारे ऊपर परमाणु बम गिराने जैसा है''। यूरोपीयन यूनियन में पाकिस्तान ने भारत के प्रोटेक्टेड ज्योग्राफिकल इंडिकेशन यानि पीजीई हासिल करने के भारत के कदम का विरोध किया है।

भारत का ईयू में विरोध

भारत का ईयू में विरोध

गुलाम मुर्तजा ने कहा कि 'भारत ने वहां यह उपद्रव सिर्फ इसलिए किया है ताकि वो किसी तरह से हमारे बाजारों में से एक को हड़प सके।' मुर्तजा ने कहा कि उनका खेत भारत की सीमा से करीब 5 किलोमीटर दूर है और भारत के इस कदम से पाकिस्तान का चावल उद्योग बुरी तरह से प्रभावित होगा। यूनाइटेड नेशंस के डेटा के मुताबिक पूरी दुनिया में सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश भारत है, जिससे भारत को हर साल करीब 6.8 अरब डॉलर का इनकम होता है। वहीं, पाकिस्तान चावल निर्यात के मामले में पूरी दुनिया में चौथे स्थान पर है और चावल बेचने से पाकिस्तान को करीब 2.2 अरब डॉलर का इनकम होता है। पूरी दुनिया में बासमती चावल का उत्पादन और निर्यात करने वाले सिर्फ दो ही देश हैं भारत और पाकिस्तान। वहीं, देखा जाए तो कोलकाता से कराची तक बासमती चावल हर दिन खान-पान में शामिल किया जाता है। चाहे शादी-बारात का मामला हो या फिर कोई दूसरा फंक्शन, बासमती चावल की डिमांड साल भर बनी रहती है। ऐसे में भारत और पाकिस्तान का बासमती चावल पर आमने-सामने आना एक नये संघर्ष को शुरू कर सकता है।

पांव फैलाने की कोशिश में पाकिस्तान

पांव फैलाने की कोशिश में पाकिस्तान

रिपोर्ट के मुताबिक पिछले तीन सालों से पाकिस्तान ने बासमती चावल की सप्लाई यूरोपीयन देशों को बढ़ा दी है। वहीं, पाकिस्तान ने भारत की कुछ परेशानियों का फायदा भी उठाया है और यूरोपीय कीटनाशक मानकों को पूरा किया है। वहीं, यूरोपीयन कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक अब पाकिस्तान यूरोपीयन देशों की मांग का दो तिहाई चावल की सप्लाई करने लगा है। यूरोपीय देशों की सलाना चावल की मांग करीब 3 लाख टन होता है। वहीं, न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक, पाकिस्तान राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष मलिक फैसल जहांगीर ने कहा कि 'बासमती चावल पाकिस्तान के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण बाजार है'। इसके साथ ही मलिक फैसल ने दावा कर दिया कि 'पाकिस्तान में जो बासमती चावल की खेती होती है, वो गुणवत्ता के मामले में ज्यादा बेहतर है।'

क्या होता है पीजीआई का दर्जा ?

क्या होता है पीजीआई का दर्जा ?

आपको बता दें कि पीजीई यानि प्रोटेक्टेड ज्योग्राफिकल इंडिकेशन का दर्जा भौगोलिक उत्पादों को लेकर इंटलेक्च्वल प्रॉपर्टी का अधिकार मुहैया कराता है। भारत के दार्जिलिंग चाय, कोलंबिया कॉफी और कई फ्रांसीसी उत्पादों को पीजीआई का टैग मिला हुआ है और अब भारत चाहता है कि बासमती चावल को लेकर भी उसे पीजीआई का टैग मिले। इसके लिए भारत की तरफ से यूरोपीय यूनियन में आवेदन दिया गया है। जिन उत्पादों को पीजीआई का टैग मिल जाता है, उनके नकल को लेकर सिक्योरिटी मिली हुई होती है, यानि उसका नकल कोई और देश नहीं कर सकता है और पीजीआई टैग मिलने के बाद उस उत्पाद का बाजार में कीमत और ज्यादा बढ़ जाता है। अगर भारत को पीजीआई का टैग मिल गया तो पाकिस्तान के लिए ये एक बड़ा झटका होगा।

भारत ने क्या कहा ?

भारत ने क्या कहा ?

बासमती चावल के पीजीआई टैग को लेकर भारत ने कहा है कि उसने अपने आवेदन में हिमालय की तलहटी में उगाए जाने वाले एक खास प्रकार के विशिष्ट चावल के एकमात्र उत्पादक होने का दावा नहीं किया था, फिर भी पीजीआई का टैग मिलने से भारत को यह मान्यता मिल जाएगी। वहीं, इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विजय सोतिया ने एसोसिएट प्रेस को कहा कि 'भारत और पाकिस्तान पिछले 40 सालों से दुनिया के अलग अलग बाजारों में बिना किसी विवाद के निर्यात कर रहे हैं। दोनों स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं और मुझे नहीं लगता है कि अगर भारत को पीजीआई का टैग मिलने से कुछ भी बदलेगा।'

यूरोपीयन यूनियन ने क्या कहा ?

यूरोपीयन यूनियन ने क्या कहा ?

बासमती चावल को लेकर आमने-सामने खड़े भारत और पाकिस्तान को लेकर एएफपी ने यूरोपीयन कमीशन के एक प्रवक्ता से बात की। जिसमें उन्होंने बताया कि 'यूरोपीय संघ के नियमों के मुताबिक दोनों देशों को सितंबर तक एक सौहार्दपूर्ण प्रस्ताव पर बातचीत करने की कोशिश करनी चाहिए'। वहीं लीगल एक्सपर्ट डेल्फिन मैरी-विवियन ने कहा कि 'ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो बासमती चावल को लेकर भारत और पाकिस्तान दोनों के दावे समान हैं। यूरोप में भी ज्योग्राफिकल इंडिकेशन को लेकर कई बार मामले सामने आए हैं लेकिन हर बार ऐसे मामले सुलझा लिए गये हैं।'

पाकिस्तान ने मांगा सेंधा नमक का टैग

पाकिस्तान ने मांगा सेंधा नमक का टैग

आपको बता दें कि पाकिस्तान की सरकार ने सेंधा नमक के पीजीआई टैग को हासिल करने के लिए आवेदन किया है वहीं जनवरी में पाकिस्तान की सरकार ने देश में बासमती चावल की खेती के लिए जगहों का सीमांकन किया था। वहीं, पाकिस्तान के राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष मलिक फैसल जहांगीर का कहना है कि 'पाकिस्तान को उम्मीद है कि भारत संयुक्त तौर पर आवेदन दाखिल करने के लिए तैयार हो जाएगा। बासमती चावल भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए साझी विरासत का हिस्सा है।' उन्होंने कहा कि 'मुझे उम्मीद है कि जल्द ही दोनों देश सकारात्मक निष्कर्ष पर पहुंच जाएंगे और इस बात को पूरी दुनिया जानती है कि बासमती चावल को भारत और पाकिस्तान, दोनों देश उत्पादन करते हैं और दुनिया के बाजार में बेचते हैं।'

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