पेड़ों को अपने बच्चों जैसा प्यार देने वाला राज मिस्त्री! लगाए 20,000 पौधे, 10 हजार को कील से दिलाई मुक्ति

नई दिल्ली, 24 सितंबर। प्राकृतिक आपदाओं से धरती को सुरक्षित करने वाले पेड़ पौधे ही तो हैं। लेकिन उनके अंधाधुंध दोहन से आज सब कुछ अनबैलेंस्ड हो चुका है। लेकिन इस बीच वनस्पतियों से अटूट प्रेम रखने वाले दुनिया में बिरले लोग अब भी हैं, जिनके कारण प्रकृति अब भी कई स्थानों पर संतुलित है। पेशे से एक राजमिस्त्री यानी घर बनाने का काम करने वाले शख्स ने चार साल में जो किया वो समूचे विश्व के लिए मिशाल है। ये वो शख्स है जो पेड़ों को अपने बच्चों जैसा प्यार देता है और उन पर लगी कील देखकर पीड़ा से सिहर उठता है।

20,000 से अधिक पौधे लगा चुका है शख्स

20,000 से अधिक पौधे लगा चुका है शख्स

60 वर्षीय शख्स का नाम है वाहिद सरदार। ये पेशे से राजमिस्त्री हैं और पर्यावरण कार्यकर्ता भी। ये बंग्लादेश के नागरिक हैं। पेड़ों को सुरक्षित रखने, उनसे कील हटाने के अलावा भी वाहिद पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अन्य कई कार्य कर रहे हैं। पर्यावरण के प्रति खुद जागरूक होने के साथ वो दूसरों में भी पेड़ पौधों प्रति सुरक्षा की भावना विकसित करने का कार्य कर रहे हैं। साल 2006 से वो इस दिशा में प्रयास कर करे हैं। वहिद स्वयं के पैसे से अपने जिले में पेड़ लगा रहे हैं। उन्होंने अपने गृहनगर जशोर में अब तक लगभग 20,000 फल और औषधीय पौधे लगाए हैं।

पहली बार नाखून से निकाली थी कील

पहली बार नाखून से निकाली थी कील

वाहिद सरदार को पेड़ों से काफी लगाव है। वे पूरे बांग्लादेश में पेड़ों के तने में लगे कीलों को हटाकर वृक्षों के सुरक्षित करने का मिशन चला रहे हैं। वाहिद अब तक 10 हजार से अधिक पेड़ों को कील से मुक्ति दिलाई है। जुलाई 2018 जब उन्होंने इसकी शुरूआत की थी तो उन्होंन पहली बार अपने नाखून से कील निकाल निकाला था।

बच्चों जैसा पेड़ों से करते हैं प्यार

बच्चों जैसा पेड़ों से करते हैं प्यार

वाहिद सरदार मानते हैं कि पेड़ उनकी संतान हैं। उन्होंने कील के दर्द से पेड़ों को मुक्त करने के लिए अथक प्रयास किया। इसके लिये उन्होंने बंग्लादेश में अपने गृह जनपद जशोर में मिशन शुरू किया। जिसके बाद अन्य जिलों भी इस इस मिशन को आगे बढ़ाया गया। जशोर के अलावा वाहिद सरदार ने बंग्लादेश में झेनैदाह, खुलना समेत अन्य कई जिलों में पेड़ों को कील से मुक्ति दिलाने का अभियान चलाया।

वाहिद को मिल चुका है राष्ट्रीय पुरस्कार

वाहिद को मिल चुका है राष्ट्रीय पुरस्कार

पिछले कुछ वर्षों से बंग्लादेश में वाहिद की छवि एक पर्यावरण प्रेमी की रूप में स्थापित हो चुकी है। उन्हें वर्ष 2020 में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रीय पर्यावरण पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। जिसका उद्देश्य बांग्लादेश के पर्यावरण के विकास में उत्कृष्ट योगदानकर्ताओं को सम्मानित करना है।

बंग्लादेश में पेड़ों पर होर्डिंग्स लगाना अवैध

बंग्लादेश में पेड़ों पर होर्डिंग्स लगाना अवैध

बांग्लादेश के ग्रैफिटी राइटिंग एंड पोस्टर स्टिकिंग कंट्रोल एक्ट, 2012 तहत पेड़ों के संरक्षण के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत किसी भी पेड़ पर होर्डिंग लगाना अवैध है। वाहिद सरदार वहां लोगों को इस एक्ट के प्रावधानों और इसके उल्लंघन पर होने वाली कार्रवाई से भी लोगों को जागरूक करते हैं।

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