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Bangladesh violence: ढाका में बम धमाके में एक की मौत, क्या कलाकार थे असली निशाना? क्यों उठ रहे सवाल

Bangladesh violence: बांग्लादेश की राजधानी ढाका एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ गई है। 24 दिसंबर को देर शाम ढाका के मोगबाज़ार इलाके में हुए एक शक्तिशाली देसी बम धमाके में एक व्यक्ति की मौत हो गई।

यह धमाका ऐसे समय में हुआ है जब देश पहले से ही राजनीतिक तनाव, छात्र नेता की हत्या और विरोध-प्रदर्शनों के चलते अस्थिर दौर से गुजर रहा है। यह इलाका "मीडिया गली" के नाम से जाना जाता है, जहां शाम के समय अभिनेता, रंगकर्मी और परफ़ॉर्मिंग आर्टिस्ट अक्सर जमा होते हैं।

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पास ही 1971 के मुक्ति संग्राम के दिग्गजों का केंद्रीय कार्यालय बांग्लादेश मुक्तिजोधा संसद (Muktijoddha Sangsad) भी स्थित है। इसी वजह से इस धमाके को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

Dhaka Bomb Blast: फ्लाईओवर से फेंका गया देसी बम

बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार शाम करीब 7 बजे अज्ञात हमलावरों ने मोगबाज़ार फ्लाईओवर से नीचे सड़क पर एक देसी बम फेंका। धमाका मुक्तिजोधा संसद कार्यालय के ठीक सामने हुआ, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हतीरझील थाने के इंस्पेक्टर (ऑपरेशंस) एमडी मोहिउद्दीन ने बताया कि धमाके में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई।

पुलिस के अनुसार, मृतक की पहचान सैफुल के रूप में हुई है। वह एक निजी दुकान में काम करता था और फ्लाईओवर के नीचे सड़क किनारे चाय की दुकान पर चाय पी रहा था, तभी बम धमाका हुआ। धमाके की चपेट में आने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया और आसपास के इलाकों की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी गई है।

क्या कलाकार थे असली निशाना?

इस धमाके के बाद यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या इसका असली निशाना कलाकार, लेखक और सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोग थे। "मीडिया गली" क्षेत्र ढाका में कलाकारों का एक अहम ठिकाना माना जाता है, जहां थिएटर आर्टिस्ट, अभिनेता और पत्रकार नियमित रूप से मिलते-जुलते हैं।

देश के एक चर्चित कलाकार ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बांग्लादेश में कलाकारों, लेखकों और पत्रकारों को लगातार डराने और निशाना बनाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया और हालात को बेहद चिंताजनक करार दिया।

राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़ा हो सकता है धमाका?

यह बम धमाका ऐसे वक्त हुआ है, जब बांग्लादेश की राजनीति बेहद संवेदनशील दौर में है। दरअसल, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान करीब 17 साल के बाद लंदन से बांग्लादेश लौट रहे हैं। उनकी वापसी को लेकर देशभर में भारी राजनीतिक हलचल है। BNP ने दावा किया है कि ढाका में उन्हें स्वागत करने के लिए लाखों समर्थक जुटेंगे। इसी के मद्देनज़र मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने कड़े सुरक्षा इंतज़ामों के आदेश दिए हैं।

छात्र नेता की हत्या से उबल रहा है माहौल

बांग्लादेश पहले से ही एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। पिछले सप्ताह इंक़िलाब मंच के नेता और चर्चित छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या ने देश को झकझोर दिया था। हादी, जो 2024 के जन आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे, को 12 दिसंबर को ढाका में एक मस्जिद से निकलते समय नकाबपोश हमलावरों ने गोली मार दी थी। बाद में इलाज के दौरान सिंगापुर में उनकी मौत हो गई। इस हत्या के विरोध में मंगलवार को ढाका के शाहबाग इलाके में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे, जिनमें हिंसा भी देखने को मिली।

सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, जांच जारी

मोगबाज़ार बम धमाके के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। पुलिस यह जांच कर रही है कि यह हमला राजनीतिक अस्थिरता से जुड़ा है या किसी खास वर्ग, जैसे कलाकारों या सांस्कृतिक समुदाय को डराने के लिए किया गया, या फिर आगामी चुनाव और नेताओं की वापसी से पहले माहौल बिगाड़ने की साजिश है। फिलहाल हमलावरों की पहचान नहीं हो सकी है।

ढाका छात्र नेता की हत्या, राजनीतिक तनाव, विरोध-प्रदर्शन और अब बम धमाका बताती है कि देश एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर खड़ा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अगर कलाकारों, लेखकों और आम नागरिकों को भी निशाना बनाया जा रहा है।

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