शेख हसीना ने जताई थी भारत की सीमा पर 'ईसाई देश' बनाने की आशंका', किया था आगाह, क्या इसलिए गिरा दी गई सरकार?

Bangladesh News: भारी विरोध प्रदर्शन और हिंसा के बीच बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया है और देश छोड़कर चली गईं। शेख हसीना भारत आ गईं हैं और माना जा रहा है, कि वो भारत से लंदन जा सकती हैं।

लेकिन, क्या शेख हसीना की वो आशंका सच साबित हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था, कि उनके ऊपर 'एक शक्तिशाली देश' की तरफ से एयरबेस बनाने के लिए जमीन मांगी जा रही है और ऐसा करने पर उनकी सरकार सुरक्षित चलने का ऑफर दिया गया है। लेकिन, उन्होंने इस ऑफर को मानने से इनकार कर दिया है।

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ऐसे में सवाल ये है, कि क्या शेख हसीना ने ऑफर मानने से इनकार किया, इसलिए उनकी सरकार गिरा दी गई?

शेख हसीना ने क्या आरोप लगाए थे।

शेख हसीना ने मई में 14-पार्टी गठबंधन के नेताओं से कहा था, कि बांग्लादेश और म्यांमार से कुछ हिस्से लेकर "पूर्वी तिमोर जैसा एक ईसाई राज्य" बनाने की साजिश चल रही है। हालांकि, उन्होंने भारत का नाम लेने से परहेज किया था, कि इसमें भारत के भी कुछ हिस्से को शामिल किया जा सकता है।

शेख हसीना ने यह भी कहा था, कि एक श्वेत व्यक्ति ने बांग्लादेश में 7 जनवरी को हुए चुनाव में बिना किसी पश्चिमी देश की परेशानी के उन्हें जीतने में मदद करने की पेशकश की थी, और इसके लिए शर्त ये थी, कि इसके बदले उन्हें एक 'विदेशी देश को बांग्लादेश में हवाई अड्डा स्थापित करने की इजाजत देना होगा।' हालांकि, शेख हसीना ने उस 'श्वेत व्यक्ति और उसकी नागरिकता' का खुलासा नहीं किया।

क्या अमेरिका बनाना चाहता था 'ईसाई देश'?

शेख हसीना ने दावा किया, कि प्राचीन काल से ही खाड़ी और हिंद महासागर के रास्ते व्यापारिक गतिविधियां होती रही हैं। उन्होंने कहा, कि "कई लोगों की नजर इस जगह पर है। यहां कोई विवाद नहीं, कोई टकराव नहीं है। और मैं ऐसा होने भी नहीं दूंगी और ऐसा होने देना, मेरी नजर में एक अपराध है।"

वहीं, एयरबेस बनाने के प्रस्ताव को लेकर उन्होंने कहा था, कि "यह प्रस्ताव एक श्वेत व्यक्ति की तरफ से आया था। ऐसा लग सकता है, कि इसका लक्ष्य सिर्फ एक ही देश है, लेकिन ऐसा नहीं है। मैं जानती हूं, कि वे और कहां जाने का इरादा रखते हैं। हां, आगे अभी और परेशानी हो सकती है, लेकिन चिंता करने की जरूरत नहीं है।"

उन्होंने दावा किया था, कि "अगर मैं किसी देश को बांग्लादेश में एयरबेस बनाने की इजाजत देती हूं, तो फिर मुझे कोई दिक्कत नहीं होगी।" हालांकि, उन्होंने उस देश का नाम नहीं बताया, जो बांग्लादेश में एयरबेस स्थापित करना चाहता है, लेकिन यह माना जा रहा है, कि उस देश का नाम अमेरिका है।

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किस द्वीप पर टिकी है अमेरिका की नजर?

कई वर्षों से वाशिंगटन की नजर सेंट मार्टिन द्वीप पर है, जो बंगाल की खाड़ी के उत्तरपूर्वी भाग में एक छोटा सा द्वीप (क्षेत्रफल केवल 3 किलोमीटर) है, जो कॉक्स बाजार-टेकनाफ प्रायद्वीप के सिरे से लगभग 9 किमी दक्षिण में स्थित है। ये इलाका बांग्लादेश का सबसे दक्षिणी भाग का हिस्सा है।

इससे पहले जून 2023 में भी ढाका में एक अफवाह फैली थी, कि वाशिंगटन सत्तारूढ़ अवामी लीग सरकार का समर्थन करने बदले में सेंट मार्टिन द्वीप की मांग कर रहा है। लेकिन, बाद में, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने जोर देकर कहा, कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने सेंट मार्टिन द्वीप पर नियंत्रण लेने के संबंध में कभी भी किसी चर्चा में भाग नहीं लिया है और ऐसा करने का उसका कोई इरादा नहीं है।

14 जून 2023 को बांग्लादेशी संसद में एक बहस के दौरान बांग्लादेश की वर्कर्स पार्टी के अध्यक्ष राशेद खान मेनन ने आरोप लगाया था, कि संयुक्त राज्य अमेरिका सेंट मार्टिन द्वीप के पीछे पड़ा है और नई अमेरिकी वीज़ा नीति "शासन परिवर्तन" की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा, कि "अमेरिका सेंट मार्टिन द्वीप चाहता है, और वे भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देशों के गठबंधन QUAD में बांग्लादेश को चाहते हैं।"

उन्होंने आरोप लगाया था, कि "वे मौजूदा सरकार को अस्थिर करने के लिए सब कुछ कर रहे हैं।"

19 जून 2023 को जातीय समाजतांत्रिक दल के अध्यक्ष हसनुल हक इनु ने भी चिंता जताते हुए सवाल उठाया, कि क्या अमेरिका लोकतंत्र की खातिर या सेंट मार्टिन द्वीप पर नियंत्रण के लिए बांग्लादेश के मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है?

इनु ने कहा था, कि "यह हमें लेकर 'अमेरिका के अति-उत्साह' के पीछे की वजह के बारे में सोचने की बात है, कि क्या वो बांग्लादेशी लोकतंत्र के बारे में बार बार सवाल इसलिए उठा रहा है, कि उसे सेंट मार्टिन द्वीप मिल जाए?

आपको बता दें, कि मार्टिन द्वीप को लेकर अमेरिका पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं और साल 2003 में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत मैरी एन पीटर्स ने मीडिया की उन अटकलों को खारिज कर दिया था, कि वाशिंगटन अपनी सेना को सुदूर और मध्य पूर्व के बीच कहीं तैनात करने के लिए ढाका से एक सैन्य अड्डा पट्टे पर लेने के लिए बेताब है।

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