Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Bangladesh Election Result: कहां जाएंगे यूनुस? तारिक के राज में जुड़ पाएंगे ढाका-दिल्ली के तार? BNP का इतिहास

Bangaldesh के आम चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की शानदार जीत के बाद तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। यह जीत सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है। तारिक के सामने सबसे बड़ी चुनौती भारत के साथ रिश्तों को बेहतर करना होगी। हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को बांग्लादेश की नई सरकार को सौंपने का मुद्दा अब भी ज्वलनशील रहने की आशंका है। दूसरी तरफ चुनाव हारने के बाद पूर्व PM का बांग्लादेश से भागने का इतिहास रहा है। इसलिए ये सवाल भी जरूरी हो जाता है कि यूनुस कहां जाएंगे?

एक महीने में निर्वासित से प्रधानमंत्री बने तारिक

तारिक रहमान को कभी बांग्लादेश की राजनीति में 'डार्क प्रिंस' कहा जाता था। वह देश के सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवारों में से एक के वारिस माने जाते हैं, लेकिन 17 सालों से लंदन में अपने परिवार के साथ निर्वासन में जिंदगी गुजार रहे थे। शुक्रवार को हुए चुनावों में उनकी पार्टी BNP ने बड़ी जीत दर्ज की तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें शपथ से पहले ही बधाई दे दी। यह इस बात का संकेत था कि भारत, 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बिगड़े रिश्तों को फिर से पटरी पर लाना चाहता है।

Bangladesh

यूनुस से प्रति असंतोष

अगस्त 2024 में शेख हसीना के जाते ही नोबल प्राइज विजेता और अर्थशास्त्री मोहम्मद बांग्लादेश लौटे थे। यहां उन्हें चीफ एडवाइजर का पद दिया गया जो कि प्रधानमंत्री के समकक्ष था। बतौर कार्यवाहक पीएम उनके कार्यकाल में हिंसा, उपद्रव और विदेश नीति अपने निचले स्तर पर पहुंच गई थी। लिहाजा उनके खिलाफ भी असंतोष उपज गया। यही जमात-ए-इस्लामी के चुनाव हारने की मुख्य वजह बनी।

क्या बांग्लादेश से फिर भाग जाएंगे यूनुस?

जैसा कि बांग्लादेश का इतिहास रहा है कि चुनाव हारने वाला देश छोड़कर निकल जाता है। अगर इस लिहाज से देखें तो यूनुस की लंदन वापसी हो सकती है। लेकिन यूनुस और तारिक के संबंध अच्छे हैं। यूनुस ही वो शख्स हैं जिन्होंने खालिदा जिया को सशर्त हाउस अरेस्ट से बाहर निकाला और तारिक के खिलाफ चल रहे मुकदमे वापस करवाए। जिसकी बाद तारिक की वतन वापसी संभव हुई और वे चुनाव में भी हिस्सा ले सके। इसलिए यूनुस के बांग्लादेश से निर्वासित होने या छोड़ने की संभावना कम ही है।

भारत की नजर में BNP क्यों अहम?

भारत के लिए BNP को हमेशा जमात-ए-इस्लामी जैसी कठोर विचारधारा वाली पार्टी की तुलना में ज्यादा उदार और लोकतांत्रिक विकल्प माना गया है। अब जब तारिक प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं, तो सवाल उठता है कि क्या भारत-बांग्लादेश संबंधों में नया अध्याय शुरू होगा? क्या दोनों देशों के बीच पुराना 'काला इतिहास' आगे की राह को प्रभावित करेगा? यही वे फैक्टर हैं जो आने वाले समय में 'मैत्री एक्सप्रेस' जैसी साझेदारी की दिशा तय करेंगे।

तारिक और बांग्लादेश फर्स्ट की नीति

तारिक की वापसी के बाद उनका रुख पहले से ज्यादा संतुलित और सकारात्मक दिखा। 'तारिक जिया' के नाम से मशहूर नेता ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के 'अमेरिका फर्स्ट' की तर्ज पर 'बांग्लादेश फर्स्ट' एजेंडा पेश किया। उन्होंने वादा किया कि बांग्लादेश भारत, चीन और पाकिस्तान से समान दूरी बनाए रखेगा।

भारत के लिए तारिक के मन में क्या?

यह भारत के लिए अच्छा संकेत माना जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि मोहम्मद यूनुस के अंतरिम प्रशासन के दौरान बांग्लादेश ने पाकिस्तान और चीन से करीबी बढ़ाई थी। तारिक ऐसे समय में सत्ता संभालेंगे जब भारत-बांग्लादेश संबंध दो अलग दिशाओं में चल रहे हैं। एक तरफ दोनों देश 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं और व्यापार, बिजली और कनेक्टिविटी से जुड़े हैं। दूसरी तरफ, Gen Z और छात्र आंदोलनों के बाद हसीना के भारत जाने से बांग्लादेश में भारत को लेकर भावनाएं अब मिली-जुली हो गई हैं जो कभी दोस्ताना थीं।

भारत ने बढ़ाया दोस्ती का हाथ

भारत ने पहले ही अपने संपर्क बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। जब तारिक की मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया बीमार थीं, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक रूप से चिंता जताई और मदद की पेशकश की। BNP ने इसका आभार जताया। खालिदा जिया के निधन के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर 2024 के घटनाक्रम के बाद ढाका जाने वाले पहले भारतीय नेता बने। दिसंबर 2025 की इस दौरे में उन्होंने तारिक से मुलाकात कर प्रधानमंत्री मोदी का निजी पत्र भी सौंपा। चुनाव जीतने के बाद मोदी ने ट्वीट कर कहा कि वे बहुआयामी संबंधों को मजबूत करने के लिए साथ काम करने को तैयार हैं।

'न दिल्ली-न पिंडी' वाला संदेश

तारिक ने साफ कहा, 'न दिल्ली, न पिंडी, सबसे पहले बांग्लादेश।' इसका मतलब है कि BNP खुलकर किसी एक देश का पक्ष नहीं लेगी। अपने पहले संबोधन में भी उन्होंने कट्टरपंथी नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद भारत विरोधी माहौल बनाने से बचने की कोशिश की। उस हिंसा में हिंदुओं पर हमले बढ़े थे। 45 दिनों में करीब 15 हिंदुओं की हत्या हुई, जिनमें कपड़ा मजदूर दीपू चंद्र दास की लिंचिंग ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना झेली।

अल्पसंख्यकों को लेकर आश्वासन

तारिक ने समावेशिता पर जोर देते हुए कहा, 'धर्म व्यक्तिगत है, लेकिन राज्य सबका है।' उन्होंने सभी के लिए सुरक्षित बांग्लादेश बनाने का वादा किया। बांग्लादेश की आबादी का लगभग 8% हिस्सा हिंदू समुदाय का है। माना जा रहा है कि अगर अल्पसंख्यकों पर हमले हुए तो तारिक सख्त कदम उठा सकते हैं।

तारिक अब ढाका में सत्ता के केंद्र में होंगे, लेकिन पहले वे 'हवा भवन' से राजनीति संचालित करते थे। 2001 से 2006 के बीच, जब खालिदा जिया की सरकार थी, उस दौर को भारत-बांग्लादेश संबंधों का सबसे खराब समय माना जाता है। जमात-ए-इस्लामी BNP की सहयोगी थी। भारत ने आरोप लगाया था कि ढाका ने पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों और पूर्वोत्तर के विद्रोहियों को शरण दी।

2004 में भारत के खिलाफ साजिश के आरोप

भारत ने 2004 के चटगांव हथियार बरामदगी मामले में भी तारिक पर साजिश का आरोप लगाया था, जिसमें उल्फा का नाम सामने आया। दिसंबर 2005 में एक अमेरिकी राजनयिक केबल में उन्हें 'डार्क प्रिंस' कहा गया। 2008 में ढाका ट्रिब्यून ने कथित भ्रष्टाचार पर रिपोर्टें छापीं, जिससे यह टैग और मजबूत हुआ।

कानूनी राहत और वापसी

5 अगस्त 2024 को हसीना के सत्ता से हटने के बाद तारिक को 2004 के ग्रेनेड हमले सहित कई मामलों में बरी कर दिया गया। 17 साल सत्ता से बाहर रहने के बावजूद वे राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे। उनके ऑडियो संदेश BNP कार्यकर्ताओं में जोश भरते रहे। दिसंबर में उनकी वापसी पर हुआ भव्य स्वागत उनकी लोकप्रियता का संकेत था।

'तारिक रहमान 2.0' का असली टेस्ट

अब सवाल यह है कि 'तारिक रहमान 2.0' भारत के साथ कैसे रिश्ते बनाते हैं। क्या वे अतीत की कड़वाहट को पीछे छोड़ पाएंगे? क्या उनका 'बांग्लादेश फर्स्ट' एजेंडा संतुलन बनाए रखेगा? आने वाले सालों में भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा काफी हद तक तारिक के फैसलों पर निर्भर करेगी।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+