Bangladesh News: उस्मान हादी के बाद एक और भारत विरोधी नेता को गोली मार गया अनजान हमलावर, देखें Video
Bangladesh News: बांग्लादेश में छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद फैली हिंसा अभी थमी भी नहीं थी कि एक और सनसनीखेज घटना सामने आ गई। अज्ञात हमलावरों ने नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) से जुड़े एक नेता पर हमला कर दिया। इस घटना ने देश में चल रहे तनाव को और बढ़ा दिया है।
खुलना में NCP नेता को मारी गई गोली
सूत्रों के मुताबिक, बीएनपी के खुलना मंडल प्रमुख मोहम्मद मोतलेब शिकदर को सोमवार को गोली मार दी गई। गोली उनके सिर के बाईं तरफ लगी है। हमले के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां वे फिलहाल इलाज के लिए भर्ती हैं। उनकी हालत को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

हादी की मौत के बाद भड़की देशव्यापी हिंसा
यह हमला ऐसे वक्त हुआ है, जब पूरे बांग्लादेश में पिछले हफ्ते शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हिंसक विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। हादी की हत्या के बाद कई शहरों में सड़क जाम, तोड़फोड़ और झड़पों की घटनाएं सामने आई हैं।
भारत-विरोधी बयान और भड़काऊ नारेबाजी
मोतलेब शिकदर पर हमला उस समय हुआ, जब उसने ने खुले तौर पर बयान दिए थे कि ढाका, दिल्ली-विरोधी ताकतों को पनाह देगा। इन बयानों को लेकर भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में भी तनाव की बात कही जा रही है।
नॉर्थ ईस्ट को लेकर विवादित बयान
उस्मान हादी की तरह NCP नेता मोतलेब शिकदर ने यह भी दावा किया था कि वे भारत के नॉर्थ ईस्ट वाले राज्यों-को भारत से अलग करने में मदद करेंगे। इस बयान को बेहद भड़काऊ और खतरनाक माना गया, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
लगातार बढ़ती हिंसा से बिगड़ते हालात
उस्मान हादी की हत्या, उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शन और अब मोतलेब शिकदर पर गोलीबारी ने साफ कर दिया है कि बांग्लादेश में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। राजनीतिक हिंसा, कट्टरपंथी बयानबाजी और हथियारबंद हमले देश को एक और अस्थिर दौर की ओर धकेलते नजर आ रहे हैं।
उस्मान हादी था विवादों का चेहरा
32 साल के शरीफ उस्मान हादी अपने तेज और कट्टरपंथी भारत-विरोधी बयानों के लिए जाने जाते थे। उन्हें एक ध्रुवीकरण करने वाला नेता माना जाता था, जो समर्थकों और विरोधियों दोनों के बीच तीखी बहस की वजह बनता था।
2024 के छात्र विद्रोह में निभाई थी बड़ी भूमिका
हादी ने 2024 के बांग्लादेशी छात्र विद्रोह में अहम भूमिका निभाई थी। इसी आंदोलन के चलते देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटना पड़ा। इसके बाद से हादी कट्टरपंथी राजनीति के एक बड़े चेहरे के रूप में उभरे थे।
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