Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Balen Shah oath: जनकपुर से चुनावी शंखनाद-राम नवमी पर शपथ! बालेन शाह के 'हिंदुत्व कार्ड' का क्या है मायने?

Balen Shah oath Ceremony: नेपाल की सियासत में इन दिनों एक ऐसी लहर उठी है जिसने हिमालय से तराई तक के पुराने राजनीतिक समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है। यह नाम है बालेंद्र शाह 'बालेन' का। 35 वर्षीय इंजीनियर और रैपर से देश के भावी प्रधानमंत्री तक का उनका सफर किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसा रोमांचक है, जिसने केपी शर्मा ओली जैसे दिग्गजों को उनके ही गढ़ में मात दे दी।

बालेन का 27 मार्च को 'राम नवमी' के दिन शपथ लेना और माता सीता की जन्मस्थली जनकपुर से चुनावी शंखनाद करना, केवल एक धार्मिक संयोग नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह 'न्यू नेपाल' का एक ऐसा संतुलित संदेश है, जो पुरानी राजशाही और दशकों से हावी रही जड़ कम्युनिस्ट विचारधारा के बीच एक 'तीसरा रास्ता' तैयार कर रहा है। इस एक्सप्लेनर में हम समझेंगे कि कैसे बालेन शाह का यह कदम नेपाल की पारंपरिक वामपंथी राजनीति के ताबूत में आखिरी कील साबित हो सकता है।

Balen Shah oath Ceremony

राम नवमी और जनकपुर: केवल धर्म नहीं, एक बड़ा संदेश

बालेन का जनकपुर (माता सीता की भूमि) से चुनाव शुरू करना और राम नवमी को शपथ लेना एक सोची-समझी रणनीति है। यह नेपाल की उस बहुसंख्यक आबादी को जोड़ने की कोशिश है जो अपनी हिंदू पहचान पर गर्व करती है। वे यह संदेश दे रहे हैं कि आधुनिक होने के लिए अपनी जड़ों को छोड़ना ज़रूरी नहीं है। यह कदम उन नेताओं के लिए बड़ी चुनौती है जो अब तक धर्म को केवल वोट बैंक का जरिया मानते थे।

ये भी पढे़ं: Balen Shah Nepal New PM: नेपाल का बदलेगा संविधान! बालेन शाह की पार्टी दो-तिहाई बहुमत के करीब, कितनी सीटें?

Balen Shah Nepal PM oath: कम्युनिस्ट और राजशाही के बीच 'तीसरा रास्ता'

नेपाल में दशकों से राजनीति केवल दो ध्रुवों के बीच फंसी थी एक तरफ पुरानी राजशाही के समर्थक और दूसरी तरफ कट्टर कम्युनिस्ट विचारधारा। बालेन शाह ने इन दोनों को किनारे कर एक 'तीसरा रास्ता' दिखाया है। वे न तो राजा को भगवान मानते हैं और न ही धर्म को राजनीति से पूरी तरह अलग रखते हैं। उनकी जीत यह बताती है कि जनता अब पुरानी विचारधाराओं की जंग से थक चुकी है और विकास के साथ अपनी संस्कृति का सम्मान चाहती है।

Nepal politics Hindi: युवाओं का भरोसा और केपी ओली की हार

नेपाल के इतिहास में केपी शर्मा ओली जैसे कद्दावर नेता को करीब 50 हजार वोटों से हराना कोई छोटी बात नहीं है। बालेन की पार्टी 'आरएसपी' ने संसद की 275 में से 182 सीटें जीतकर यह साबित कर दिया कि युवाओं को अब खोखले वादों के बजाय नतीजे चाहिए। एक रैपर के तौर पर सिस्टम के भ्रष्टाचार पर सवाल उठाने वाले बालेन आज उसी सिस्टम को सुधारने की कमान संभाल रहे हैं, जो पुरानी राजनीति के अंत का संकेत है।

ये भी पढे़ं: Balen Shah Caste: मधेशी खून या पहाड़ी पहचान? बालेन शाह की असली जाति क्या, इंटरनेट पर छिड़ी जंग

मधेशी पहचान और बदलता सामाजिक ढांचा

बालेन शाह मधेशी समुदाय से आने वाले पहले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। नेपाल में लंबे समय से पहाड़ी और मधेशी (तराई क्षेत्र) के बीच एक राजनीतिक खाई रही है। बालेन ने इस भेदभाव को खत्म कर पूरे देश का दिल जीता है। उनकी जीत ने यह साफ कर दिया है कि अब नेपाल की राजनीति में 'इलाका' नहीं, बल्कि 'काम' मायने रखता है। उन्होंने मधेशी पहचान को क्षेत्रीय राजनीति से निकालकर राष्ट्रीय गौरव बना दिया है।

क्या कम्युनिस्ट राजनीति का दौर अब खत्म हो गया?

विशेषज्ञों का मानना है कि बालेन शाह का उदय नेपाल में कम्युनिस्ट राजनीति के ताबूत में आखिरी कील साबित हो सकता है। कम्युनिस्ट पार्टियों ने हमेशा धर्म और संस्कृति से दूरी बनाए रखी, जबकि बालेन ने इसे खुलेआम अपनाया। 182 सीटों का भारी जनादेश यह दिखाता है कि जनता अब वामपंथी प्रयोगों के बजाय एक ऐसे नेता को चाहती है जो देश की आर्थिक प्रगति और सांस्कृतिक पहचान, दोनों को मजबूती से साथ लेकर चल सके।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+