रूस-यूक्रेन के बाद अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच छिड़ी जंग, भारत से खरीदे गए हथियारों का होगा इस्तेमाल?
रूस-यूक्रेन के बीच जारी जंग के बीच अजरबैजान और आर्मेनिया के मध्य भी संघर्ष छिड़ गया है। अजरबैजान ने मंगलवार को एक बार फिर से पड़ोसी देश आर्मेनिया के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है।
अजरबैजान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उन्होंने नागोर्नो-काराबाख इलाके में आतंकवाद विरोधी अभियान शुरू कर दिया है। इससे पहले दोनों देशों के बीच लंबे समय से तनाव जारी था, लेकिन अजरबैजान के काराबाख के बारूदी सुरंगों में छह नागरिक मारे जाने के बाद तनाव बढ़ गया।

काराबाख के मुख्य शहर में हवाई हमले के सायरन और मोर्टार फायर की आवाजें सुनी गईं। एक खदान विस्फोट और एक अन्य घटना में ग्यारह अज़रबैजानी पुलिस और नागरिकों के मारे जाने की सूचना है।
मंगलवार को काराबाख क्षेत्रीय राजधानी खानकेंडी, जिसे अर्मेनियाई लोग स्टेपानाकर्ट के नाम से जानते हैं, से तोपखाने और गोलीबारी की आवाज़ सुनी जा सकती थी। अनुमानित 120,000 जातीय अर्मेनियाई लोग पहाड़ी इलाके में रहते हैं। एक तस्वीर में यहां पर लोगों को सुरक्षित जगहों पर पनाह लने के लिए भागते देखा गया है।
आर्मेनियाई रक्षा अधिकारियों ने अजरबैजान पर मिसाइल-तोपखाने से हमले करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने इसे युद्धविराम का उल्लंघन करार दिया है। आर्मेनियाई मीडिया ने भी इसे बड़े स्तर पर सैन्य आक्रमण का नाम दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों की सेनाओं के बीच भीषण गोलीबारी जारी है। आपको बता दें कि नागोर्नो-काराबाख अंतरराष्ट्रीय रूप से अजरबैजान का हिस्सा है, लेकिन आजादी के बाद से ही यह आर्मेनिया के कब्जे में है।
अज़रबैजान ने आर्मेनिया से काराबाख को जोड़ने वाली एकमात्र सड़क जिसे लाचिन कॉरिडोर के नाम से जाना जाता है को कई महीने से बंद रखा है। बाकू का कहना है कि आर्मनिया इस मार्ग का इस्तेमाल कथित तौर पर हथियारों की तस्करी के लिए करता है।
आर्मेनिया का कहना है कि काराबाख में उसका कोई सैन्यकर्मी नहीं है और उसकी प्राथमिकताएं पूरी तरह से मानवीय हैं। काराबाख का अधिकांश भाग अर्मेनियाई अधिकारियों द्वारा नियंत्रित है, जिसे बाकू लंबे समय से भंग करने और निरस्त्र करने के लिए दबाव डाल रहा है।
दोनों देशों के बीच का ये विवाद तीन दशक से भी अधिक समय से चल रहा है। आर्मीनिया और अजरबैजान पहले ही दो युद्ध लड़ चुके हैं और दोनों के बीच सबसे हालिया लड़ाई 2020 में हुई थी और उसके बाद से दोनों देश कई बार एक दूसरे के सामने आ चुके हैं और छोटी-मोटी झड़पें हो चुकी हैं।
नागोर्नो-काराबाख अंतरराष्ट्रीय रूप से अजरबैजान का हिस्सा है, लेकिन यहां पर आर्मेनियाई आबादी बड़े पैमाने पर रहती है। ऐसे में इस हिस्से पर दोनों देश अपना अधिकार जमाते हैं। इस क्षेत्र में चलने वाले संघर्ष की वजह से अभी तक 30 हजार से ज्यादा आम नागरिक मारे जा चुके हैं।
आर्मेनिया ने अपनी सेना को मजबूत करने के लिए भारत से कई हथियारों की खरीद की है। इसमें पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम और स्वदेशी होवित्जर टीसी-40 शामिल हैं। भारत के पहले स्वदेशी डिजाइन वाले पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की पहली खेप आर्मेनिया पहुंच चुकी है।
भारत की पिनाका को अमेरिका के हिमार्स के बराबर माना जाता है। पिनाका के लॉन्चर से 44 सेकंड में 72 रॉकेट को फायर किया जा सकता है। गाइडेड तकनीकों से लैस इसका निशाना अचूक और विध्वंसक है। पिनाका अपने दुश्मनों को संभलने का जरा भी मौका नहीं देता है।












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