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दिवाली से पहले ऑटो इंडस्ट्री का निकला दिवाला, कई बड़ी कंपनियों ने कार उत्पादन रोका, जानिए असर

पूरी दुनिया में कार का प्रोडक्शन बुरी तरह गिर गया है और ऑडो इंडस्ट्री पर ऐतिहासिक असर पड़ने की आशंका है। वहीं, वैश्विक अर्थव्यवस्था भी खतरे में आ गई है।

न्यूयॉर्क, नवंबर 02: पूरी दुनिया में कार उत्पादन औंधे मुंह गिर गई है, जिसकी वजह से ऑटो इंडस्ट्री में उथल-पुथल मच गया है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरी तरह से प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है, वैश्विक अर्थव्यवस्था, जो बहुत हद तक कार उत्पादन और कार व्यापार पर टिकी हुई है, उसपर काफी ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है और ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की नौकरियां अचानक खतरे में चुकी है।

खतरे में ऑटो इंडस्ट्री

खतरे में ऑटो इंडस्ट्री

चाहे शंघाई मे कारों का उत्पादन करने वाली कंपनियां हों या फिर अमेरिकी शहर डेट्रॉइट हो, या फिर स्टटगार्ट, इन तमाम जगहों पर ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की नौकरियां भारी खतरे में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ऑटो इंडस्ट्री से जुड़े लोग, चाहे वो फिनलैंड में स्टील बनाने के लिए अयस्क का खनन कर रहे हों, या फिर वो थाईलैंड में टायर बनाने वाले श्रमिक हों, या फिर स्लोवाकिया में वोक्सवैगन के वो कर्मचारी हों, जो एसयूवी में उपकरण पैनल स्थापित कर रहे हों, उनकी आजीविका कार बाजार में आई भीषण संकट से प्रभावित होने वाली है और उनकी नौकरी शिपिंग चोकहोल्ड की दया पर है जो कारखानों को उत्पादन कम करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

कई देशों की अर्थव्यवस्था गिरेगी

कई देशों की अर्थव्यवस्था गिरेगी

इंडियन एक्सप्रेस ने न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से रिपोर्ट दजी है कि, ऑटो इंडस्ट्री का वैश्विक आर्थिक उत्पादन का लगभग 3% हिस्सा है और जर्मनी, मैक्सिको, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे कार निर्माता देशों या मिशिगन जैसे राज्यों में ये प्रतिशत बढ़कर काफी ज्यादा हो जाता है। न्यूयार्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा है कि, ऑटो सेक्टर में जो भारी मंदी आने वाली है, उससे उबरने में कई साल लग जाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, कार इंडस्ट्री में खतरे की वजह सेमीकंडक्टर की किल्लत है, जिसकी वजह से करीब करीब सभी कार निर्माता कंपनियों को उत्पादन बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं, ज्यादातर फैक्ट्रियों में अब कर्मचारियों की शिफ्टें कम कर दी गईं हैं, जिसकी वजह से कार उत्पादन से जुड़े कुछ देशों की अर्थव्यवस्था ही मंदी का शिकार हो सकती है। न्यूयॉर्क टाइम्स की चौंकाने वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि. जापान, जो टोयोटा और निसान जैसी कार कंपनियों का घर है, वहां इन गाड़ियों के पार्ट्स के उत्पादन में भारी कमी आई है, जिसकी वजह से जापान जैसे देश के एक्सपोर्ट्स में 46 प्रतिशत की कमी ला दी है, जिससे आप समझ सकते हैं कि, कार उत्पादन करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था पर ऑटो सेक्टर में आने वाली मंदी से क्या प्रभाव पड़ सकता है।

ऑटो इंडस्ट्री पर मंदी से असर

ऑटो इंडस्ट्री पर मंदी से असर

ऑटो सेक्टर में आये इस संकट को लेकर पैंथियन मैक्रोइकॉनॉमिक्स के मुख्य अर्थशास्त्री इयान शेफर्डसन ने कहा कि, "यह विकास और रोजगार पर को काफी ज्यादा खींचने वाला है।" वहीं, कार इंडस्ट्री में आए इस संकट का प्रभाल पॉल जैक्स जैसे लोगों पर बुरी तरह से पड़ सकता है, जो कार के पार्ट्स बनाने वाली एक आपूर्तिकर्ता कंपनी मैग्रा इंटरनेशनल के एक डिविजन के लिए काम करते हैं। ये कंपनी पास ही स्थिति एक कार बनाने वाली क्रिसलर मिनीवैन फैक्ट्री के लिए कार की सीटों का निर्माण करती है। न्यूयॉर्क टाइम्स से बात करते हुए पॉल जैक्स ने कहा कि, उन्हें बताया गया है कि, क्रिसलर मिनीवैन फैक्ट्री की मूल कंपनी, स्टेलंटिस ने एक शिफ्ट के कर्मचारियों को नौकरी से बाहर निकालने का फैसला किया है, जिसकी वजह सेमीकंडक्टर्स की है। आपको बता दें कि, सेमीकंडक्टर एक कम्प्यूटर चिप होता है, जिसका इस्तेमाल क्रूज कंट्रोल सिस्टम, इंजन मैनेजमेंट और कार के अंदर कई और दूसरे कामों के लिए किया जाता है। पॉल जैक्स कहते हैं, कि उन्हें पता है कि उनकी और उनके सहकर्मियों की नौकरी भी अब खतरे में आ चुकी है।

दाम बढ़ाने को मजबूर कार कंपनियां?

दाम बढ़ाने को मजबूर कार कंपनियां?

कार उत्पादन में भारी किल्लत के बीच कार कंपनियों ने दामों में इजाफा करना शुरू कर दिया है और मुनाफा दिखाना शुरू कर दिया है। फोर्ड और जनरल मोटर्स ने पिछले हफ्ते रिपोर्ट में कहा है कि, उनकी बिक्री और मुनाफे में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन इन दोनों कंपनियों ने अपनी सलाना मुनाफे को ज्यादा कर दिखाया है। वहीं, मर्सिडीज-बेंज कारों के निर्माता डेमलर ने शुक्रवार को कहा कि, तीसरी तिमाही में उसका शुद्ध लाभ 20% बढ़ा है, भले ही कंपनी ने 25% कम गाड़ियों की बिक्री की है। इसकी वजह कारों की कीमत में वृद्धि कर देना है। स्थिति ये है कि, लोग कार खरीदना चाह रहे हैं, ज्यादा कीमत भी देने को तैयार हैं, लेकिन कार कंपनियां उतनी कारों का उत्पादन ही नहीं कर पा रही हैं। जिसकी वजह से वो लोग, जो सस्ते कार लेना चाहते हैं, उनकी जेब से ज्यादा पैसा जा रहा है। वहीं, पुरानी कारों की कीमतें भी आसमान छूने लगी हैं।

सस्ते वाहनों पर भारी असर

सस्ते वाहनों पर भारी असर

फोर्ड एफ-150 या चेवी सिल्वरैडो पिकअप जैसे उच्च लाभ मार्जिन वाली गाड़ियां, इनका उत्पादन अभी भी तेजी से हो रहा है, लेकिन असर छोटी गाड़ियों पर हो रहा है। अमेरिकी शहर डेट्रॉइट में स्थित कंसल्टिंग फर्म किर्नी के एक पार्टनर राम किदांबी ने कहा कि, "जिन वाहनों का मार्जिन कम है, वे प्रभावित हो रहे हैं, और इसलिए वहां का कार्यबल भी प्रभावित हो रहा है।"वहीं, महिंद्रा एजी नॉर्थ अमेरिका के सीईओ वीरेन पोपली ने कहा कि ''पिछले साल स्टील और तांबे जैसे प्रमुख कच्चे माल की कीमतें चढ़ने के साथ ही ये संकट शुरू हो गया था।'' आपको बता दें कि, महिन्द्रा एजी नॉर्थ एक विशाल भारतीय वाहन निर्माता कंपनी की की एक शाखा है जो संयुक्त राज्य के बाजार के लिए ट्रैक्टर बनाती है।

कोरोना वायरस का हथौड़ा अलग से

कोरोना वायरस का हथौड़ा अलग से

ऑटो सेक्टर पहले से ही बदहाली के कगार पर खड़ा है, दूसरी तरफ कोरोना वायरस की वजह से सप्लाई चेन पर बहुत बुरा असर पड़ा है। कोरोना वायरस विश्व के अलग अलग इलाकों में अलग अलग वक्त पर अपना प्रकोप दिखाता है, जिससे अलग अलग देशों में लॉकडाउन लगा दिए जाते हैं। उदाहरण के लिए महिन्द्रा कंपनी ने गाड़ियों को बनाने के लिए पार्ट्स तो खरीब लिए, लेकिन उन पार्ट्स की डिलवरी नहीं होने की वजह से उसे काफी इंतजार करना पड़ा। महिन्द्रा के सामान जिस जहाज से आ रहे थे, वो काफी देर से पहुंची, लिहाजा उसमें रखे गये कंटेनर्स की लागत तीन हजार डॉलर से बढ़कर 20 हजार डॉलर्स तक पहुंच गई। वहीं, पेनसिल्वेनिया के ब्लूम्सबर्ग में ट्रैक्टर असलेंबली प्लांट को लेकर पोपली ने कहा कि, "कैलिफोर्निया के लॉन्ग बीच में बंदरगाह पर जहाज फंसा रहा, जिसकी वजह से हमें 2 महीने तक हर दिन 25 प्रतिशत उत्पादन कम करना पड़ा।"

भारी संख्या में जाएगी लोगों की नौकरी

भारी संख्या में जाएगी लोगों की नौकरी

वहीं, जर्मनी का ईसेनाच शहर, जहां की आबादी करीब 42 हजार है, वहां ओपल नाम की कार कंपनी ग्रैंडलैंड नाम से एसयूवी कारों का निर्माण करती है, लेकिन पिछले महीने ओपल कंपनी ने इस फैक्ट्री का काम अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है। कंपनी ने अगले साल उत्पादन शुरू करने की योजना अभी तक नहीं बनाई है, लिहाजा कंपनी में काम करने वाले करीब दो हजार से ज्यादा कर्मचारियों को डर सता रहा है कि, कहीं कारखाना हमेशा के लिए ही बंद ना हो जाए, लिहाजा लोग कार कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसी स्थिति कई और राज्यों और शहर में है।

210 अरब डॉलर का होगा नुकसान

210 अरब डॉलर का होगा नुकसान

AlixPartners का अनुमान है कि, सिर्फ सेमीकंडक्टर चिप की वजह से इस साल पूरी दुनिया में करीब 77 लाख कम वाहनों का उत्पादन किया जाएगा, जिसकी वजह से ऑटो इंडस्ट्री को 210 अरब डॉलर का नुकसान होगा। दुनिया में कम ही देश हैं, जो कार उत्पादन करते हैं। बड़े देशों में सिर्फ चीन और अमेरिका ही हैं, जो कार बनाते हैं। इसके अलावा सिर्फ 54 लाख आबादी वाला देश स्लोवाकिया हर साल 10 लाख से ज्यादा कारों का उत्पादन करता है और औसत के हिसाब से ये अमेरिका और चीन से भी आगे है, जिसपर काफी ज्यादा प्रभाव पड़ेगा। सिर्फ कार ही नहीं, बल्कि ट्रैक्टर और ट्रकों के उत्पादन पर भी काफी ज्यादा असर पड़ेगा और ये कमी जब तक बनी रहेगी, अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव उतना ही ज्यादा पड़ेगा। क्योंकि, आधुनिक अर्थव्यवस्था को काम करने के लिए ज्यादा गाड़ियों की जरूरत होती है, खासकर ट्रक और ट्रैक्टर्स की, जिसकी कमी की वजह से कई और क्षेत्र पर बुरा प्रभाव पड़ने वाला है।

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