ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने की चीन के साथ अच्छे संबंध बनाने की घोषणा, QUAD और ऑकस का क्या होगा?
Australia-China News: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री एंथनी अल्बानीज से कहा है, कि उनके देश "भरोसेमंद भागीदार" बन सकते हैं। जिसपर ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने चीन के साथ अच्छे संबंध बनाने की घोषणा की है, जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं, कि जो ऑस्ट्रेलिया पिछले कुछ सालों से चीन के खिलाफ खतरनाक बयानबाजी कर रहा था, और चीन के खिलाफ नये नये संगठन में शामिल हो रहा है, अब उन संगठनों क्या भविष्य क्या होगा?
ऑस्ट्रेलिया और चीन पिछले कुछ सालों से लगातार मानवाधिकार, कोविड और व्यापारिक मुद्दों पर आमने-सामने रहे हैं और दोनों देशों ने एक दूसरे खिलाफ जहरीली बयानबाजी की है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने तो ऑस्ट्रेलिया पर मिसाइल हमला करने तक की चेतावनी दी थी, लेकिन अब ऑस्ट्रेलियन प्रधानमंत्री ने जो घोषणा की है, उसने दुनियाभर के ऑब्जर्वर्स को हैरान कर दिया है।

ऑस्ट्रेलियाई पीएम की घोषणा का मतलब
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज इस वक्त चीन के दौरे पर हैं और उनका बीजिंग दौरा उस वक्त हो रहा है, जब दोनों देशों के संबंध काफी तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं और ऑस्ट्रेलिया ने चीन के खिलाफ सैन्य गठबंधन ऑकस का भी निर्माण किया है, जिसमें अमेरिका और ब्रिटेन भी शामिल हैं।
साल 2016 के बाद ये पहली बार है, जब किसी ऑस्ट्रेलियन नेता का बीजिंग दौरा हो रहा है और एक साल में दूसरी बार आमने-सामने हुई बातचीत में, एंथनी अल्बनीज और शी जिनपिंग ने एक घंटे से ज्यादा समय तक बात की है।
चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर सीसीटीवी ने दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक के बाद एक रीडआउट जारी किया है, जिसमें कहा गया है, कि शी जिनपिंग ने कहा, कि दोनों देशों के बीच "हितों का कोई बुनियादी टकराव नहीं है" और वे "परस्पर भरोसेमंद और पारस्परिक रूप से सफल भागीदार बन सकते हैं।"
Our relationship with China is important and I am committed to advocating Australia’s interests as we work to shape the decades ahead. pic.twitter.com/yF5MS9b4Wr
— Anthony Albanese (@AlboMP) November 7, 2023
चीनी नेता ने कहा, कि सहयोग के क्षेत्रों में "एशिया प्रशांत क्षेत्र की शांति और स्थिरता" से लेकर जलवायु परिवर्तन तक सब कुछ शामिल हो सकता है।
एंथनी अल्बनीज़, जिन्होंने पिछले साल मई में पदभार ग्रहण किया था, उन्होंने दोनों देशों के बीच के संबंधों को स्थिर करने की मांग की है। उन्होंने कहा, कि एक मजबूत संबंध "भविष्य में फायदेमंद" होगा और बीजिंग द्वारा ऑस्ट्रेलियाई सामानों पर अपने अधिकांश प्रतिबंध हटाने के बाद, हाल के महीनों में हुई सकारात्मक प्रगति पर ध्यान दिया।
दशकों तक, चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच मजबूत व्यापार रहे हैं और बीजिंग, कैनबरा का सबसे बड़ा वाणिज्यिक भागीदार बना रहा, लेकिन पिछले कुछ सालों से चीन ने जिस तरह से दक्षिण चीन सागर में अपना विस्तार किया है, उससे ऑस्ट्रेलिया के ऊपर खतरा मंडरा रहा है और ऑस्ट्रेलिया ने चीन के खिलाफ कदम उठाने शुरू कर दिए।
दोनों देशों के संबंधों में तब खटास आ गई, जब पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री स्कॉट मॉरिसन की कंजर्वेटिव सरकार के तहत ऑस्ट्रेलिया ने चीन पर उसकी राजनीति में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था। चीन की तकनीकी दिग्गज हुआवेई पर ऑस्ट्रेलिया ने प्रतिबंध लगा दिया और कोविड-19 की उत्पत्ति के लिए ऑस्ट्रेलिया ने चीन के खिलाफ जांच की मांग करनी शुरू कर दी।
इससे पहले सोमवार को, एंथनी अल्बानीज़, बीजिंग के प्रतिष्ठित टेम्पल ऑफ़ हेवन के पास रुके और गोलाकार इको वॉल पर फोटो खिंचवाई। ये वही जगह है, जहां ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन प्रधान मंत्री, गॉफ़ व्हिटलैम, साल 1973 में खड़े थे, जब दोनों देशों के बीच पहली बार राजनयिक संबंध स्थापित होने का एक साल पूरा हुआ था।

क्वाड और ऑकस का क्या होगा?
शी जिनपिंग ने कहा, कि "चीन में हम अक्सर कहते हैं, कि पानी पीते समय हमें उन लोगों को नहीं भूलना चाहिए जिन्होंने कुआं खोदा।" उन्होंने आगे कहा, कि "चीनी लोग, हमारे लिए कुआं खोदने के लिए प्रधान मंत्री व्हिटलैम को नहीं भूलेंगे।"
अल्बनीज़ ने सोमवार की शी जिनपिंग के साथ हुई बैठक को "बहुत सकारात्मक" बताया और कहा, कि उन्होंने शी जिनपिंग को ऑस्ट्रेलिया आने के लिए आमंत्रित किया है।
अल्बनीज़ ने कहा, कि "हम दोनों निश्चित रूप से इस बात पर सहमत हुए हैं, कि हमें अपने मतभेदों से परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि यह स्वीकार करना चाहिए, कि वे मौजूद हैं, लेकिन हमारे बीच जो पारस्परिक लाभ हैं, उसे भी पहचानना चाहिए।"
वहीं, एंथनी अल्बनीज के बयान के बाद एक्सपर्ट्स हैरान हो रहे हैं।
अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार डेरेक.जे. ग्रॉसमैन ने कहा है, कि "सीरियसली, ये क्या हो रहा है। क्या अब ऑकस बेमतलब हो गया?"
दूसरी तरफ, ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ क्वाड समूह का हिस्सा है, और साथ ही अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम के साथ AUKUS का भी हिस्सा है, जिसके तहत उसे अमेरिका की परमाणु पनडुब्बी तकनीक से लाभ होने की उम्मीद है।
ऑस्ट्रेलिया ने भी प्रशांत द्वीप समूह में बीजिंग के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई है, जबकि अल्बानीज़ ने राष्ट्रों के आत्मनिर्णय के अधिकार के साथ-साथ मानवाधिकारों और शांति बनाए रखने की बात की है, जिसमें ताइवान जलडमरूमध्य भी शामिल है, जो चीन को स्वयं से अलग करता है।
अल्बनीज़ ने ऑस्ट्रेलियाई लेखक यांग हेंगजुन का मामला भी उठाया है, जो जासूसी के आरोप में बीजिंग में चार साल से जेल में बंद हैं। बीजिंग ने पिछले महीने ऑस्ट्रेलियाई पत्रकार चेंग लेई को रिहा कर दिया था, जिन्हें इन्हीं आरोपों के तहत तीन साल से हिरासत में रखा गया था।
बैठक से पहले, उन्होंने दोनों देशों के बीच मतभेदों के बारे में ऑस्ट्रेलिया को "स्पष्ट रूप से" रहने की आवश्यकता को स्वीकार किया था। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "हमें चीन के साथ वहां सहयोग करने की जरूरत है जहां हम कर सकते हैं, जहां असहमत होना चाहिए, और अपने राष्ट्रीय हित में शामिल होना चाहिए।"












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