ऑस्ट्रेलिया में रॉकेट की रफ्तार से बढ़े हिंदू और मुसलमान, इस फील्ड में भारतीयों ने गाड़े झंडे
नई जनगणना रिपोर्ट से पता चला है कि, ऐसे लोग, जिनका जन्म किसी और देश में हुआ है, और जो बाद में जाकर ऑस्ट्रेलिया में बस गये हैं, उनमें भारत ने अब चीन और न्यूजीलैंड को पीछे छोड़ दिया है।
कैनबरा, जुलाई 04: ऑस्ट्रेलिया में हुए नये जनगणना में भारी बदलाव देखने को मिल रहे हैं और सबसे ज्यादा हैरानी हिंदू धर्म और मुस्लिम धर्म मानने वालों की संख्या में हुई इजाफा का है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में हिंदुओं और मुस्लिमों की संख्या तेजी से बढ़ी है और ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीयों की संख्या में भी व्यापक बदलाव हुआ है। आपको बता दें कि, ऑस्ट्रेलिया में हर पांच सालों पर जनगणना की जाती है और पिछली जनसंख्या 2021 में की गई थी, जिसकी रिपोर्ट अब प्रकाशित की गई है।

क्या कहता है ऑस्ट्रेलिया का नई जनगणना
साल 2021 में हुए जनगणना से पता चला है कि, ऑस्ट्रेलिया की अब कुल आबादी बढ़कर ढाई करोड़ हो गई है। साल 2016 के मुकाबले ऑस्ट्रेलिया की आबादी 2 करोड़ 34 लाख थी, जो साल 2021 की जनगणना के मुताबिक बढ़कर 2 करोड़ 55 लाख हो गई है। वहीं, नई जनगणना रिपोर्ट से पता चला है कि, ऑस्ट्रेलिया में लोगों में आमदनी का भी इजाफा हुआ है। वहीं, पता चला है कि, ऑस्ट्रेलिया में अब 10 लाख से ज्यादा सिंगल परिवार हो गये हैं। ऑस्ट्रेलियन ब्यूरो ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स ने इन आंकड़ों को मंगलवार को जारी किया है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया के तेज़ी से बदलते चेहरे, परिवारों के मेक-अप और जीने के तरीके के बारे में कई बातें पता चली हैं।

ऑस्ट्रेलिया में बढ़ रही है विविधता
साल 2021 में हुए जनगणना से पता चलता है कि, साल 2017 से 2021 के बीच में ऑस्ट्रेलिया में 10 लाख से ज्यादा अलग अलग देशों से लोग रहने के लिए आए हैं। और देश में बसे नये लोगों को मिलाने के बाद पता चलता है कि, ऐसे लोग जो ऑस्ट्रेलिया के बाहर पैदा हुए हैं, या जिनके माता-पिता ऑस्ट्रेलिया के बाहर पैदा हुए हैं, उनकी संख्या अब मूल ऑस्ट्रेलियाई लोगों की संख्या से ज्यादा हो गई है और अब ऑस्ट्रेलिया में कुल मिलाकर 51.5 प्रतिशत लोग 'बाहरी' हैं। हालांकि, कोरोना काल में ऑस्ट्रेलिया में बसने वालों की संख्या में गिरावट आई है, जो स्वाभाविक है। लेकिन, सबसे ज्यादा दिलचस्प बात ये है, कि ऑस्ट्रेलिया में जाकर बसने वालों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है और ऑस्ट्रेलिया में बाहरी देशों से बसने वालों की संख्या में एक चौथाई भारतीयों की है।

भारत को लेकर दिलचस्प आंकड़े
नई जनगणना रिपोर्ट से पता चला है कि, ऐसे लोग, जिनका जन्म किसी और देश में हुआ है, और जो बाद में जाकर ऑस्ट्रेलिया में बस गये हैं, उनमें भारत ने अब चीन और न्यूजीलैंड को पीछे छोड़ दिया है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच के टकराव ने चीनी नागरिकों की दिलचस्पी ऑस्ट्रेलिया से कम की है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया में ही जन्म लेने वालों की संख्या अभी भी सबसे ज्यादा है और उनके बाद ऐसे लोगों की संख्या आती है, जिनका जन्म ब्रिटेन में हुआ और वो बाद में जाकर ऑस्ट्रेलिया में बस गये, वहीं तीसरे नंबर पर भारत आता है। वहीं, जनगणना से पता चला है कि, ऑस्ट्रेलिया में 20 प्रतिशत से ज्यादा ऐसे लोग रहते हैं, जो अपने घरों में अंग्रेजी के अलावा किसी और भाषा का प्रयोग करते हैं। वहीं, अग्रेजी के बाद अभी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा चायनीज और अरबी है।

हिंदू और इस्लाम मानने वालों की संख्या बढ़ी
ऑस्ट्रेलिया में ऐसा पहली बार हुआ है, कि ईसाई धर्म मानने वालों की संख्या में गिरावट आई है। साल 2016 के मुकाबले ऑस्ट्रेलिया में ईसाई धर्म मानने वालों की संख्या 52.1 प्रतिशत से घटकर 43.9 प्रतिशत हो गई है, जबकि, साल 2011 में ये आंकड़ा 60 प्रतिशत से ज्यादा था। वहीं, ऑस्ट्रेलिया में लगभग 40 प्रतिशत ने खुद को "कोई धर्म नहीं" के रूप में वर्गीकृत किया। वहीं, इस जनगणना में पता चला है, कि ऑस्ट्रेलिया में हिंदू धर्म को मानने वालों की संख्या में 55.3 प्रतिशत का इजाफा हुआ है और अब ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले हिंदुओं की संख्या 6 लाख 84 हजार 2 हो गई है, जो ऑस्ट्रेलिया की कुल जनसंख्या का 3.2 प्रतिशत है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया में इस्लाम मानने वालों की संख्या भी बढ़ी है और अब ऑस्ट्रेलिया की कुल जनसंख्या में मुस्लिमों की संख्या भी करीब 3 प्रतिशत हो गई है। साल 2016 में ऑस्ट्रेलिया में हिंदुओं की आबादी 1.9 प्रतिशत और मुस्लिमों की आबादी 2.6 प्रतिशत थी। वहीं, आदिवासी और टोरेस स्ट्रेट आइलैंडर की आबादी 2016 के बाद से एक चौथाई से बढ़कर 800,000 से अधिक हो गई है, जो कुल गणना का 3.2 प्रतिशत है।

बदल रहा है परिवारों की स्ट्रक्चर
जनगणना में ऑस्ट्रेलियाई परिवारों की बदलती रूपरेखा भी दर्ज की गई, जिसमें लगभग 16 प्रतिशत एक-माता-पिता वाले परिवार थे, और उन पाँच में से चार माता-पिता महिलाएँ थीं। 15 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 46.5 प्रतिशत ऑस्ट्रेलियाई विवाहित हैं, और लगभग 24,000 समलैंगिक विवाह में हैं। वहीं, ऑस्ट्रेलिया में करीब 18 लाख लोग तलाकशुदा हैं और इस जनगणना अवधि में ऑस्ट्रेलिया में 6 लाख 70 हजार से अधिक लोग अलग हो चुके हैं। कोविड -19 ने बच्चों की देखभाल करने के तरीके को भी बदल दिया है और साल 2016 में जहां 7 लाख 75 हजार बच्चे अपने दादा-दादी के साथ रहते थे, उनकी संख्या में 50 हजार की कमी आई है।

ऑस्ट्रेलिया में घर खरीदना हुआ और महंगा
नई जनगणना रिपोर्ट में पता चला है कि, 25 साल पहले जहां करीब एक चौथाई ऑस्ट्रेलियाई अपना घर खरीद लेते थे, उनकी संख्या में काफी कम हो गई है और महंगाई की वजह से लोगों का घर खरीदना काफी मुश्किल हो गया है। लोग अब रहने के लिए कई और विकल्पों की तलाश करने लगे हैं। वहीं, जब देश के स्वास्थ्य की बात आती है, तो जनगणना में पाया गया कि लगभग 48 लाख ऑस्ट्रेलियाई लोगों में दीर्घकालिक स्वास्थ्य स्थितियां हैं, जिनमें अस्थमा और मानसिक बीमारी से पुरूष परेशान हो रहे हैं। वहीं, 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए अस्थमा सबसे आम स्वास्थ्य स्थिति है।












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