Atique Ahmed: विदेशी मीडिया में छाया अतीक अहमद का Live मर्डर, US, अलजजीरा और पाकिस्तानी मीडिया में क्या छपा?

अतीक अहमद और उनके भाई की शनिवार को उस वक्त हत्या कर दी गई, जब उन्हें अस्पताल में मेडिकल चेकअप के लिए ले जाया जा रहा था। हमलावर मीडियाकर्मियों के भेष में आए थे और उन्होंने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।

Atique Ahmed row foreign media

Atique Ahmed Murder: उत्तर प्रदेश के बाहुबली गैंगस्टर और बाद में नेता बने अतीक अहमद और उनके भाई की हत्या अब विदेशी अखबारों की सुर्खियां बनने लगी हैं।

अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ को शनिवार रात प्रयागराज में उस वक्त गोली मारी गई, जब उन्हें रूटीन मेडिकल चेकअप के लिए ले जाया जा रहा था। अतीक और अशरफ पर उस वक्त फायरिंग की गई, जब वो मीडिया के सामने बोल रहे थे। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की आग की तरफ फैल गया।

वहीं, हत्याकांड में शामिल तीन आरोपियों ने फौरन सरेंडर कर दिया, लेकिन पुलिस हिरासत में आरोपियों को गोली मारने की इस घटना के बाद पुलिस की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जबकि, विदेशी मीडिया में भी अब अतीक और अशरफ की मौत पर अलग अलग एंगल से आर्टिकिल लिखे जा रहे हैं।

किसी अखबार ने अतीक और अशरफ की मौत को 'हिन्दुत्व' से जोड़ने की कोशिश की है, तो किसी ने इसे भारत में 'मुस्लिम' एंगल को निकाला है। कुछ अखबारों ने अतीक और अशरफ को बाहुबली और गैंगस्टर भी लिखा है।

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अलजजीरा में क्या लिखा गया?

इस्लामिक देश कतर से चलने वाले और इस्लामिक नजरिए को फैलाने वाले अलजजीरा ने अतीक अहमत की हत्या की खबर को अपने हेडलाइन में 'पूर्व एमपी और उसके भाई की लाइव टीवी पर हत्या' लिखा है।

हालांकि, अलजजीरा ने अपनी रिपोर्ट में अतीक अहमद को 'अपहरण का दोषी' भी लिखा है। अलजजीरा ने लिखा है, कि 'अपहरण के दोषी भारत की संसद के एक पूर्व सदस्य और उसके भाई की लाइव टीवी पर प्रयागराज में पुलिस हिरासत में गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिससे उत्तर प्रदेश राज्य में कानून के शासन पर सवाल उठ गये हैं'।

इसके अलावा अलजजीरा ने अपराधियों के 'जय श्री राम' नारे पर जोर दिया है और लिखा है, कि "तीनों शूटर्स ने दोनों भाईयों को गोली मारने के बाद फौरन ही पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, जिनमें से एक 'जय श्री राम' या "भगवान राम की जय" का नारा लगा रहा था, जो मुसलमानों के खिलाफ उनके अभियान में हिंदू राष्ट्रवादियों के लिए एक नारा बन गया है"।

इसके अलावा अलजजीरा ने अपनी रिपोर्ट में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को अल्पसंख्यक समुदाय के होने पर जोर दिया है।

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पाकिस्तानी मीडिया में क्या छपा

पाकिस्तानी मीडिया में अतीक और उनके भाई अशरफ की मौत को 'अल्पसंख्यकों' को निशाना बनाने वाली कार्रवाई बताया गया है।

पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अतीक और अशरफ की हत्या को 'मुस्लिमों का कत्ल' बताने की कोशिश की है। ट्रिब्यून ने इस बात पर भी जोर दिया है, कि 'उत्तर प्रदेश भारत की सत्तारूढ़ हिंदू-राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी द्वारा शासित है'।

वहीं, डॉन ने अपने हेडलाइन में लिखा है, कि 'पूर्व भारतीय नेता और उनके भाई की लाइव टीवी पर गोली मारकर हत्या।' डॉन ने लिखा है, कि 'अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ, जो बाद में नेता बन गये थे, उके पैर जुर्म के दलदल में धंसे हुए थे।' अखबार ने लिखा है, कि 'दोनों भाई मुस्लिम समुदाय से आते हैं, लेकिन उनके खिलाफ 100 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे, जिनमें अपहरण और मर्डर के मामले भी शामिल हैं।"

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अमेरिकी मीडिया में क्या छपा है?

सीएनएन ने अपनी रिपोर्ट में अतीक अहमद की मौत को जुर्म की कहानी से जोड़ा है। सीएनएन ने अपने हेडलाइन में लिखा है, 'पूर्व भारतीय सांसद की लाइव टीवी पर हत्या।'

सीएनएन ने लिखा है, कि "भारत की संसद के एक पूर्व सांसद, अपहरण के दोषी, को उसके भाई के साथ गोली मार दी गई, जब पुलिस उन्हें शनिवार को मेडिकल जांच के लिए ले जा रही थी"। CNN ने अपनी रिपोर्ट में इस वारदात की पूरी कहानी लिखी है, और इसे किसी 'हिन्दू-मुस्लिम' एंगल से नहीं जोड़ा है।

हालांकि, न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने आर्टिकिल में इसे 'हिन्दू-मुस्लिम' की चाशनी में जमकर डूबोया है।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने हेडलाइन में लिखा है, 'लाइव टीवी पर हत्या भारत में न्यायेतर हिंसा को लेकर अलार्म है।'

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में लिखा गया है, कि 'उत्तर प्रदेश में डकैत-राजनेता के बेटे का भी एनकाउंटर किया गया और भारत में ऐसे घातक एनकाउंटर्स के लिए कट्टर हिन्दू भिक्षु नेता योगी आदित्यनाथ की तारीफ की जा रही है, जिन्हें संभावित प्रधानमंत्री के तौर पर देखा जाता है।'

इसके साथ ही, न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है, कि अतीक अहमद और उनके भाई की लाइव टीवी पर मर्डर के बाद "आदित्यनाथ की हिंदू राष्ट्रवादी सत्ताधारी पार्टी की वफादार मीडिया आउटलेट के सदस्यों ने प्रशंसा की, लेकिन साथ ही एक पेचीदा सवाल भी उठाया: डकैत-राजनीतिज्ञ अतीक अहमद, जो पहले से ही उम्रकैद की सजा काट रहा था और उसके खिलाफ 100 अन्य मामले लंबित थे, पुलिस हिरासत में उसका खूनी अंत कैसे हुआ?

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में लिखा गया है, कि 'अतीक अहमद को गोली मारने के बाद उनके शूटर्स ने धार्मिक नारे लगाए और फिर सरेंडर कर दिया। और उसके बाद में उत्तर प्रदेश के दो राज्य-मंत्रियों ने दो मुस्लिम डकैतों की हत्याओं को ईश्वरीय न्याय के समान बताया'।

न्यूयॉर्क टाइम्स में लिखा गया है, कि 'असाधारण रूप से सार्वजनिक रूप से हिंसा की बाढ़ ने एक बार फिर इस बात की चिंता बढ़ा दी है, कि राज्य के शासन में असाधारण हिंसा कितनी गहराई तक फैल गई है, एक ऐसा अभियान. जो अक्सर धार्मिक उपक्रमों की तरफ बढ़ता है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी भारत के धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र को फिर से आकार देने के लिए आगे बढ़ रही है'।

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      न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में विभिन्न एक्सपर्ट्स का हवाला देते हुए 'भारतीय न्यायव्यवस्था, कोर्ट्स, लोकतंत्र, और मीडिया' पर भी गंभीर सवाल उठाए गये हैं और कहा गया है, कि 'भारतीय मीडिया हिन्दू सरकार के एजेंडे को बढ़ाने का काम करता है और इस असंवेदनशीलता को भी सही ठहराने की कोशिश करता है।'

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