अमेरिका से धोखा खाए इराक को रूस से मिलेंगे फाइटर जेट्स

इराक के प्रधानमंत्री नूरी मलिकी ने बीबीसी को दिए अपने एक इंटरव्यू में कहा है कि अगर अमेरिका की ओर से उसे समय पर हवाई मदद मिलती और आतंकियों पर हवाई हमले किए गए होते तो आज इराक की हालत इतनी खराब नहीं होती।
इसके साथ ही इराक के प्रधानमंत्री ने बताया कि अब उसने अमेरिका से मदद की उम्मीद छोड़ दी है और रूस से मदद ले ली है।
इराक के प्रधानमंत्री मलिकी ने अपने इंटरव्यू में कहा है कि रूस और बेलारूस से मिलने वाले फाइटर जेट्स विमान आने वाले दिनों में विद्रोहियों के खिलाफ मुश्किल हालात से निजात दिलाएंगे।
मलिकी कहा, 'अल्लाह ने चाहा तो एक हफ्ते के अंदर सेना असर दिखाने लगेगी। हम आतंकवादियों के अड्डे नष्ट कर देंगे।'
उन्होंने बताया कि अमेरिकी जेट खरीदने का मतलब है लंबी प्रक्रिया से गुजरना। विद्रोहियों का आगे बढ़ना तभी रोका जा सकता है अगर हवाई सुरक्षा अपनी जगह मुकम्मल हो।
इस्लामी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड अल-शाम यानी आईएसआईएस और उसके सुन्नी मुसलमान सहयोगी इराक के बड़े इलाकों पर कब्जा कर चुके हैं।
मलिकी ने आईएसआईएस के हमलों के बाद पहली बार कोई इंटरव्यू दिया है।
बीबीसी की अरबी सेवा को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मुझे ये कहने में कोई हिचक नहीं कि जब हम लोगों ने करार (अमेरिका से) पर हस्ताक्षर किए तो हम धोखे में थे।
मलिकी के मुताबिक हमें अपनी सेनाओं को हवाई सुरक्षा कवच मुहैया कराने के लिए ब्रिटेन, फ्रांस और रूस के जेट लड़ाकू विमानों की तरह व्यवस्था करनी चाहिए थी। अगर हमारे पास हवाई सुरक्षा होती तो जो कुछ हुआ, वैसा नहीं होता।
इराकी प्रधानमंत्री की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक इराक अब रूस और बेलारूस से पुराने जेट लड़ाकू विमान ले रहा है, जिन्हें दो या तीन दिनों में इराक पहुंच जाना चाहिए।
इराक सरकार उत्तर और पश्चिम की ओर से चरमपंथियों की बढ़त को रोकने में संघर्ष करती रही है। वहीं अमेरिका इस बात पर जोर दे रहा है कि विद्रोहियों को हराने का काम इराक की फौजों को खुद करना चाहिए।
मलिकी ने पुष्टि की कि सीरिया और इराक की सीमा पर सीरियाई सेनाएं इस्लामी विद्रोहियों पर हवाई हमले कर रही हैं।












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