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Ariha case: जर्मन कोर्ट का 28 महीने की बच्ची को भारतीय मां-बाप को सौंपने से इनकार, अरिहा केस को जानिए

Ariha case: जर्मनी के पैंको में एक जिला अदालत ने 28 महीने की अरिहा शाह को उसके माता-पिता को सौंपने से इनकार कर दिया है। जर्मनी की अदालत ने दो फैसलों में 28 महीने की अरिहा शाह को उसके जैविक माता-पिता को सौंपने से इनकार कर दिया और बच्ची को जर्मन युवा सेवा जुगेंडमट को सौंप दिया है।

भावेश और धारा शाह की बेटी अरिहा शाह जब 7 महीने की थी, तभी उसे जर्मनी के चाइल्ड केयर संस्था के लोग अपने साथ लेकर चले गए थे। उसके बाद से अब तक 20 महीने गुजर चुके हैं, लेकिन अब तक उसे वापस नहीं लाया जा सका है। आपको बता दें, कि फॉस्टर होम में उन बच्चों को रखा जाता है, जिनके माता-पिता या तो इस दुनिया में नहीं हैं, या फिर वह बच्चे की देखभाल करने में असमर्थ हैं।

Ariha case

अरिहा के माता-पिता महीने में सिर्फ दो बार ही उससे मिल पाते हैं।

जर्मनी की अदालत ने क्या फैसला दिया?

जर्मनी की एक अदालत ने फैसला सुनाते हुए भावेश और धारा शाह को उनकी बेटी सौंपने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए 28 महीने की बच्ची को जुगेंडमट को सौंपने का आदेश दिया है। जर्मन कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा, कि "माता-पिता अब बच्ची के भविष्य के बारे में फैसला लेने के लिए अधिकृत नहीं हैं।"

कोर्ट ने धारा और भावेश शाह की इस अपील को भी खारिज कर दिया, कि उनकी बच्ची को इंडियन वेलफेयर सोसाइटी को सौंप दिया जाए।

इससे पहले 3 जून को भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने जर्मन अधिकारियों से आग्रह किया था, कि "अरिहा को जल्द से जल्द भारत भेजने के लिए वह सब कुछ करें, जो एक भारतीय नागरिक के रूप में उसका अधिकार है"। इससे पहले जून में, भाजपा, कांग्रेस, वाम दल और तृणमूल कांग्रेस सहित 19 राजनीतिक दलों के 59 सांसदों ने भारत में जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन को एक संयुक्त पत्र लिखा था, और उनसे यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करने को कहा था, कि अरिहा शाह को भारत जल्द से जल्द लाया जाए।

अरिहा शाह को लेकर विवाद क्या है?

अरिहा शाह को लेकर विवाद ये है, कि अरिहा शाह जब सात महीने की थी और वो खेल रही थी, उस वक्त उसे चोट लग गई और इसके बाद, उसके पैरेंट्स, धरा और भावेश बच्ची अरिहा को लेकर अस्पताल गए। अस्पताल में डॉक्टरों ने आरोप लगा दिया, कि बच्ची का यौन शोषण हुआ है। इसके बाद जर्मन अधिकारियों ने बच्ची को कस्टडी में ले लिया।

बच्ची के माता-पिता का कहना था, कि एक मामूली दुर्घटना में बच्ची को चोट लग गई थी, जिसकी वजह से उसके प्राइवेट पार्ट से खून बहने लगा था। लेकिन वहां के अधिकारियों ने अरिहा के माता-पिता की एक न सुनी और अरिहा को फॉस्टर होम भेज दिया गया।

भावेश पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। उन्होंने इस बात की रिपोर्ट पुलिस में कराई, जिसके बाद अस्पताल और पुलिस रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि भी की, कि अरिहा के साथ कोई यौन उत्पीड़न नहीं हुआ, लेकिन फिर भी अरिहा को चाइल्ड केयर संस्था ने नहीं दिया।

फॉस्टर होम में अरिहा को यह कहकर रखा है, कि उसके सॉफ्टवेयर इंजीनियर पिता भावेश और मां धरा बच्चे की अच्छी देखभाल नहीं कर पाए, तभी बच्ची को इतनी गंभीर चोट लग गई। इसी के बाद से अरिहा के माता-पिता उसे वापस पाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।

अरिहा शाह के माता-पिता का कहना था, कि 7 महीने की अपनी बेटी को जब वो नहा रहे थे, उस वक्त वो बाथरूम में गिर गई थी, जबकि कोर्ट ने कहा, कि मां-बाप ने जानबूझकर बच्ची को चोट पहुंचाई और कोर्ट ने बच्ची को उसके मां और पापा को सौंपने से इनकार कर दिया।

महीने में सिर्फ दो बार मिलने की इजाजत

जर्मन कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा, कि माता-पिता के पास महीने में दो बार बच्ची से मिलने की इजाजत है और इसमें वो बच्ची के प्रति अपने अधिकार और कर्तव्य का निर्वहन कर सकते हैं। कोर्ट ने हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को 60 मिनट के लिए पैरेंट्स को बच्ची से मिलने की इजाजत दी है।

माता-पिता ने इस समय को बढ़ाकर 90 मिनट करने के लिए अनुरोध लगाया था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा, कि ज्यादादेर तक मिलने से बच्ची के ऊपर गलत प्रभाव पड़ सकता है।

कोर्ट के फैसले के बाद, अरिहा के माता-पिता 15 जून को बर्लिन से नई दिल्ली पहुंचे और भारत सरकार से उसके प्रत्यावर्तन की अपील की, क्योंकि वह एक भारतीय नागरिक है। माता-पिता ने भारत सरकार से अपील की है, कि "हम जर्मनी में एक उच्च न्यायालय में अपील करने की योजना बना रहे हैं, लेकिन निष्पक्ष सुनवाई होने की बहुत कम उम्मीद है। हम इस तरह के फैसले की उम्मीद पहले से ही कर रहे थे। उन्होंने हमारा बचाव करने वाले विशेषज्ञों की रिपोर्ट पर विचार नहीं किया और सिर्फ एकतरफा फैसला सुनाया।"

अरिहा के माता-पिता ने अरिहा के प्रत्यावर्तन के अनुरोध के साथ विदेश मंत्रालय से संपर्क किया है। उन्होंने कहा, कि उन्हें नहीं पता कि अरिहा के 3 साल का होने के बाद जुगेंडमट जारी रहेगा या यात्रा की अनुमति देगा। उसकी मां धारा ने कहा, कि "धीरे धीरे अरिहा का हमसे कोई इमोशनल रिश्ता ही नहीं बचेगा और वो खुद हमें याद नहीं रखेगी, जिसके बाद अगर हम उसे भारत लाने की कोशिश भी करते हैं, तो हो सकता है, कि वो खुद भारत आने से इनकार कर दे।

अरिहा को अपने माता-पिता से मिलने की इजाजत उसी वक्त तक रहेगी, जब तक की उसे फोस्टर होम में कोई नया माता-पिता नहीं मिल जाता। यानि, अरिहा शाह को फोस्टर होम से कोई और दंपति गोद ले सकता है और फिर अरिहा को उसके अपने माता-पिता से मिलने की भी इजाजत नहीं दी जाएगी।

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