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Argentina ने IRGC को आतंकी संगठन क्यों घोषित किया? 35 साल पुराने हमले से क्या है कनेक्शन? US को कितना फायदा?

Argentina Declares IRGC Terrorist Organization Reason: दुनिया में बढ़ते भू-राजनैतिक तनाव (अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान)के बीच अर्जेंटीना का एक बड़ा फैसला चर्चा में है। अर्जेंटीना ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC को आधिकारिक तौर पर आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। यह कदम सिर्फ एक सुरक्षा निर्णय नहीं, बल्किवैश्विक राजनीति में एक बड़ा संकेत भी माना जा रहा है।

अब सवाल यह है कि Argentina ने अचानक ऐसा क्यों किया? इसके पीछे की कहानी करीब 35 साल पुरानी है, जो आज भी वहां के लोगों के लिए एक दर्दनाक याद बनी हुई है।आइए विस्तार से जानते हैं कि क्या है वो भयानक कहानी और इससे US को क्या फायदा होगा?

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Argentina 1994 AMIA Bombing Story: 32 और 35 साल पहले क्या हुआ था? 1994 का वो AMIA बम विस्फोट

18 जुलाई 1994 को ब्यूनस आयर्स में AMIA (अर्जेंटीना इसराइली म्यूचुअल एसोसिएशन) यहूदी सामुदायिक केंद्र पर एक कार बम विस्फोट हुआ। इसमें 85 लोग मारे गए, जबकि 300 से ज्यादा घायल हुए। यह अर्जेंटीना के इतिहास का सबसे घातक आतंकी हमला था। जांच में सामने आया कि हमला हिजबुल्लाह ने किया, लेकिन पीछे IRGC के Quds Force का हाथ था। ईरानी अधिकारियों ने प्लानिंग और सपोर्ट दिया था। 1992 में भी ब्यूनस आयर्स में इजरायली दूतावास पर हमला हुआ था कि 29 लोग मारे गए। दोनों हमलों का जिम्मेदार ईरान और उसके प्रॉक्सी हिजबुल्लाह को ठहराया जाता है।

अर्जेंटीना के राष्ट्रपति कार्यालय ने स्पष्ट कहा कि कुद्स फ़ोर्स (Quds Force) दूसरे देशों में आतंकी हमले ट्रेन और एक्जीक्यूट करने में स्पेशलाइज्ड है। हम 1990 के दशक के हमलों के शिकार बने। BBC फारसी और अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फैसला न्यायिक जांच और सुरक्षा आकलन के आधार पर लिया गया।

IRGC/Quds Force असल में क्या है?

IRGC ईरान का एलीट सैन्य बल है जो शिया इस्लामिक क्रांति की रक्षा करता है। इसमें Quds Force विदेशी ऑपरेशंस का जिम्मा संभालता है। हिजबुल्लाह, हमास जैसे प्रॉक्सी ग्रुप्स को ट्रेनिंग, हथियार और फंडिंग देता है। IRGC का ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी भारी दबदबा है। अमेरिका, इजराइल और अब कई देश इसे आतंकी संगठन मान चुके हैं।

US को क्या फायदा?

यह फैसला अमेरिका के लिए रणनीतिक जीत है:-

  • ईरान पर दबाव बढ़ेगा: ज्यादा देश IRGC/Quds Force पर प्रतिबंध लगाएंगे। इसका आर्थिक नेटवर्क कमजोर होगा।
  • ट्रंप प्रशासन की नीति मजबूत: अर्जेंटीना पहले ही मैक्सिको के जलिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल को आतंकी घोषित कर चुका है। अब IRGC पर भी। लैटिन अमेरिका में अमेरिका की एंटी-टेरर लाइन और मजबूत हो रही है।
  • ईरान के प्रॉक्सी पर लगाम: हिजबुल्लाह जैसे ग्रुप्स को फंडिंग मुश्किल होगी।
  • कूटनीतिक और आर्थिक सहयोग: अर्जेंटीना-अमेरिका संबंध और गहरे होंगे। इजराइल ने भी इस कदम का स्वागत किया है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अन्य लैटिन अमेरिकी देशों को भी आतंकवाद और संगठित अपराध के खिलाफ सख्ती करने के लिए प्रेरित कर सकता है।

क्या होगा आगे?

ईरान-अर्जेंटीना संबंधों में तनाव तो बढ़ेगा ही, लेकिन अर्जेंटीना की सरकार इसे 'आतंकवाद और संगठित अपराध से लड़ाई' का हिस्सा बता रही है। IRGC पर अर्जेंटीना की जमीन पर वित्तीय रोक लग जाएगी। 32 साल पुराने जख्मों को न्याय दिलाने का यह एक और कदम है। अर्जेंटीना अब साफ तौर पर अमेरिका और इजराइल की लाइन पर खड़ा है। मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच यह फैसला वैश्विक स्तर पर ईरान को और अलग-थलग करने वाला साबित हो सकता है। देखना होगा कि ईरान की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आती है। क्या लगता है आपको, क्या अर्जेंटीना का यह कदम ईरान पर असर डालेगा? कमेंट में अपनी राय जरूर दें...

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