क्या ट्रंप प्रशासन में डर कर रहते हैं भारतीय अमरीकी?
"पिछले एक साल में माहौल काफी बदला है. मैंने अपने बेटे को बोला है कि वो प्लेन में यात्रा करते व़क्त दाढ़ी न रखे क्योंकि वह गोरा नहीं है."
ये कहना है पत्रकार सीमा सिरोही का जो वाशिंगटन डीसी में रहती हैं. वे पिछले 20 साल से अमरीका में रहती हैं. इनकी एक बेटी और बेटा है जिसकी फ़िक्र उनको ट्रंप प्रशासन के बाद रहती है, इनका ताल्लुक दिल्ली से है.
सीमा कहती हैं, "आजकल के माहौल में कुछ भी हो सकता है इसलिए मुझे अपने बेटे की फ़िक्र रहती है. आपको किसी भी वक्त एयरपोर्ट पर रोका जा सकता है. मैं सोचती हूं कि क्या मुझे भी कभी भारत से अमरीका लौटने पर कुछ घंटों के लिए एयरपोर्ट पर रोका जा सकता है?"
किसे वोट देंगे भारतीय मूल के अमरीकी
अमरीकी चुनाव में बाजी मारने वाले भारतीय
ट्रंप के बारे में क्या सोचते हैं भारतीय?
'नेशनल एशियन अमरीकन' के एक सर्वे के मुताबिक़ लगभग 80 प्रतिशत भारतीय अमरीकियों ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को वोट किया था. ट्रंप प्रशासन को अब एक साल पूरा होने को है. जहां कुछ भारतीय उनकी वजह से परेशान हैं वहीं कुछ उनके शासन से संतुष्ट नज़र आते हैं.
ट्रंप प्रशासन ने सत्ता में आने से पहले कुछ वादे किए थे जिनमें अवैध अप्रवासियों से जुड़े कानून को सख़्त करना, मेक्सिको के लोगों को अमरीका से बाहर रखने के लिए दीवार बनाना, ओबामाकेयर को समाप्त करना, आधारभूत ढांचे पर एक ट्रिलियन डॉलर का भारी निवेश करना और गर्भपात विरोधी कानून के लिए काम करना शामिल था.
ट्रंप की खामोशी
हालांकि कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि एक साल में ट्रंप प्रशासन को कानून संबंधी के मामलों में ज़्यादा सफलता हासिल नहीं हुई. छह मुस्लिम देशों के लोगों को अमरीका आने पर प्रतिबंध लगाने के ट्रंप प्रशासन के आदेश को न्यायालय में कई बार चुनौती दी गई.
टैक्स सुधार के मामले में उन्हें अपनी ही पार्टी के लोगों से विरोध का सामना करना पड़ा. गर्भपात विरोधी अभियान वाले लोग भी ट्रंप से ज़्यादा खुश नहीं हैं क्योंकि ट्रंप इस मामले पर अभी तक खामोश रहे हैं. अमरीका के पहले के राष्ट्रपतियों के मुकाबले ट्रंप की लोकप्रियता पहले साल में काफी कम है.
पहले साल में कितने लोकप्रिय हुए ट्रंप?
ताज़ा सर्वे के मुताबिक़ राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता 40 प्रतिशत से भी कम है.
एक विशेषज्ञ कामरान बोहारी ने बीबीसी हिंदी से कहा, "ट्रंप कानून व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रहे हैं, ओबामा के पहले साल के मुकाबले ट्रंप प्रशासन की तरफ से अभी तक ऐसा कोई बड़ा कानूनी बदलाव सामने नहीं आया है. लेकिन उनकी निगरानी में आईएसआईएस ज़रूर कमजोर हुआ है. जबकि उत्तर कोरिया के मामले पर उन्होंने कूटनीतिक तरीका अपनाना बेहतर समझा है जो उनके राष्ट्रपति बनने से पहले वाले रवैये से अलग है, तब वे उत्तर कोरिया से युद्ध की बातें किया करते थे."
धर्म या देश
पाकिस्तान से ताल्लुक रखने वाली एक अमरीकी नागरिक नादिया अलुवा ट्रंप की पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कड़ी नीति से खुश हैं.
बीबीसी हिंदी को उन्होंने बताया, "मैं पाकिस्तान मैं पैदा हुई हूं, कराची से मेरा ताल्लुक है और हमें पता है कि कराची ज़्यादातर चरमपंथ की वजह से सुर्खियों में रहता है इसलिए मुझे लगता है कि ट्रंप किसी धर्म या देश को टारगेट नहीं कर रहे, बल्कि वो उन लोगों को टारगेट कर रहे हैं जो चरमपंथ फैला रहे हैं."
वहीं एक और भारतीय अमरीकी का कहना था, "मैं ट्रंप की कारोबारी नीतियों का समर्थन करती हूं. हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे सुरक्षित रहें और ट्रंप चरमपंथ को रोकने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो मुझे पसंद है. वो कहते हैं लोग सही तरीकों का प्रयोग कर अमरीका में प्रवास करें जो बिलकुल सही है. मुझे ग्रीन कार्ड लेने में 8-10 साल लग गए और अगर हमने कानूनी वैधता पाने के लिए संघर्ष किया है तो बाकियों को भी करना चाहिए."
क्या ट्रंप नस्लवादी हैं?
पिछले साल नवंबर में जब न्यूयॉर्क के बिजनेसमैन डोनल्ड ट्रंप अमरीका के राष्ट्रपति बने तो उन्होंने कई लोगों को हैरानी में डाल दिया था. लेकिन वकील आनंद अहुजा ट्रंप के एक साल के काम से बहुत खुश हैं. उन्होंने ट्रंप के चुनाव अभियान में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था.
बीबीसी हिंदी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "नस्लवाद को अगर छोड़ दें तो ट्रंप की बाकी नीतियों से मैं काफ़ी संतुष्ट हूं, ट्रंप के युग में व्यापार और बाज़ार अच्छी दिशा में जा रहे है हैं."
हालांकि न्यूयॉर्क निवासी डॉक्टर भूपेंद्र रामभाई पटेल ट्रंप से खुश नहीं हैं. उन्होंने चुनाव के दौरान हिलेरी के लिए चुनाव प्रचार किया था.
उत्तर कोरिया को न्योता
डॉक्टर भूपेंद्र कहते हैं, "मुझे नहीं लगता कि हमारे राष्ट्रपति नस्लवादी हैं, लेकिन उनकी नीतियों ने इस तरह का माहौल बना दिया है. न्यूयॉर्क की तरफ देखिए, यहां आपको नहीं लगेगा कि आप कोई बाहरी व्यक्ति हैं."
ट्रंप के बारे में अमरीका के दक्षिण एशियाई अल्पसंख्यकों का मूड कुछ भी हो, फिलहाल तो सारी नज़रें अमरीका और उत्तर कोरिया के बीच जारी तनाव पर लगी हैं. एशिया के अपने पहले आधिकारिक दौरे पर ट्रंप ने उत्तर कोरिया को बातचीत का न्योता दिया है.
क्या ट्रंप व्हाइट हाउस में एक साल गुज़ारने के बाद कूटनीति सीख रहे हैं? इसका फ़ैसला तो जनता मध्यावधि चुनाव में ही करेगी.
-
Iran US War: सुप्रीम लीडर खामेनेई समेत किन शीर्ष नेताओं की हुई मौत? युद्धविराम के बाद बर्बादी का हिसाब -
'मेरे पति ने 9 महिलाओं संग बनाया संबंध', फेमस एक्ट्रेस ने बयां किया दर्द, 14 साल साथ रहे, फिर टूटा रिश्ता -
'Exclusive है, पैसे दो सबकुछ देखो', कौन हैं Vishnu Priya जिनके फोटोज ने मचाई तबाही? क्या है Paid Subscription? -
पिता के पैर छूकर लिया आशीर्वाद, स्मृति मंधाना-पलाश मुच्छल करेंगे शादी? ब्रेकअप के बाद क्या हो गया पैचअप! -
Iran US Ceasefire: सीजफायर नहीं, तो बर्बाद हो जाता पाकिस्तान! शहबाज शरीफ के 'नापाक' प्लान का हुआ पर्दाफाश -
Iran US Ceasefire: 'तुरंत देश छोड़ें भारतीय', सीजफायर के बाद इंडिया की एडवाइजरी, Helpline Number जारी -
15 की उम्र में Janhvi Kapoor संग हुई थी भयावह घटना, Photos देख श्रीदेवी की बेटी का दिल दहला, क्या हुआ था? -
Ruchi Vira कौन हैं, RSS को 'देश के लिए नासूर' बताने वालीं? Akhilesh Yadav से क्या है 'पावर कनेक्शन'? -
Iran US Ceasefire: 'यह युद्ध का अंत नहीं है', क्या हैं सशर्त युद्धविराम के लिए ईरान की 10 बड़ी मांगें? -
Iran-US War-14 DAYS CEASEFIRE: पाकिस्तानी प्रस्ताव के पीछे Trump की स्क्रिप्ट? शरीफ की बेवकूफी से खुली पोल -
Khamenei Health Update: सीजफायर या धोखा? मोजतबा खामेनेई कोमा में, फिर पर्दे के पीछे किसने पक्की की ईरान की डील -
Crude Oil Price Today: ट्रंप के एक 'सीजफायर' से दुनिया भर में गिरे तेल के दाम! अब कितने पर पहुंचा क्रूड ऑयल?












Click it and Unblock the Notifications