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जातिगत भेदभाव पर प्रतिबंध लगाने वाली पहली कंपनी बनी Apple, स्टाफ को दी जा रही जाति व्यवस्था की ट्रेनिंग

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वाशिंगटन, 16 अगस्तः दुनिया की अधिकतर बड़ी कंपनियों में बड़ी संख्या में भारतीय कर्मचारी काम करते हैं। इन कंपनियों में डायवर्सिटी का खास ख्याल रखा जाता रहा है। इसके साथ ही यहां भेदभाव नीतियां भी लागू हैं लेकिन भारत जैसे देश में पाए जाने वाले जातिगत भेदभाव जैसी असमानताओं को लेकर अब तक इन कंपनियों में कोई विशेष प्रावधान नहीं था। ऐसे में ऐप्पल कंपनी में जातिगत भेदभाव को स्पष्ट रूप से बंद करने और प्रतिबंधित करने वाली पहली तकनीकी कंपनी बन गया है।

भारत की जाति व्यवस्था की दी जा रही ट्रेनिंग

भारत की जाति व्यवस्था की दी जा रही ट्रेनिंग

अब दिग्गज टेक कंपनी एपल दुनिया की पहली ऐसी कंपनी बन गई है जिसने न सिर्फ जातिगत भेदभाव पर अपनी चुप्पी तोड़ी है, बल्कि कंपनी में जातिगत भेदभाव पर पाबंदी लगा दी है। इसके साथ ही यह देखते हुए कि जाति व्यवस्था जो कि भारत में सदियों चलती आ रही है, वह अमेरिका में प्रबंधकों और कर्मचारियों के लिए अंजान हो सकती है, ऐसे में ऐप्पल ने इस विषय पर प्रशिक्षण भी शुरू कर दिया है ताकि उसके कार्यकर्ता नई नीतियों को बेहतर ढंग से समझ सकें।

2 साल बाद एक्शन में आया एपल

2 साल बाद एक्शन में आया एपल

रॉयटर्स के अनुसार, ऐप्पल ने लगभग दो साल पहले जाति आधारित भेदभाव को प्रतिबंधित करने के लिए अपनी सामान्य कर्मचारी आचरण नीति को अपडेट किया था, लेकिन अब तक इसकी रिपोर्ट नहीं की गई थी। नई नीति नस्ल, धर्म, लिंग, उम्र और वंश के खिलाफ भेदभाव पर रोक लगाने वाली नीतियों के साथ जातिगत भेदभाव को भी सख्ती से प्रतिबंधित करती है।

सिस्को सिस्टम्स पर दायर हुआ था केस

सिस्को सिस्टम्स पर दायर हुआ था केस

रिपोर्ट के मुताबिक एप्पल का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब पहली बार जून 2020 में कैलिफोर्निया के इम्प्लॉयमेंट रेगुलेटर ने सिस्को सिस्टम्स पर मुकदमा दायर किया था। इम्प्लॉयमेंट रेगुलेटर ने यह मुकदमा एक तथाकथित नीची जाति के इंजीनियर की ओर से दायर किया था, जिसने तथाकथित ऊंची जाति के दो बॉस पर उनके कैरियर में बाधा डालने का आरोप लगाया था। हालांकि, सिस्को ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया था। सिस्को के मुताबिक आंतरिक जांच में अधिकारियों के खिलाफ कोई सबूत नहीं पाए गए। इसके साथ ही कुछ आरोप आधारहीन भी हैं।

फिर से मामले की हो सकती है सुनवाई

फिर से मामले की हो सकती है सुनवाई

इस बीच अगस्त में ही एक अपील पैनल ने इस मामले को निजी मध्यस्थता में भेजने की मांग को खारिज कर दिया है। इसका आशय यह है कि अगले साल की शुरुआत तक एक पब्लिक कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हो सकती है। इस घटना को कथित जातिवाद के बारे में पहले अमेरिकी रोजगार मुकदमे के रूप में देखा गया था और इसने प्रमुख तकनीकी कंपनियों को वास्तविकता का सामना करने के लिए मजबूर किया।

IBM ने भी किया नीति में बदलाव

IBM ने भी किया नीति में बदलाव

भारत में लागू की गई अपनी नीतियों में पहले से ही जाति का उल्लेख करने वाली टेक कंपनी IBM ने भी बताया कि उसने सिस्को मुकदमे के बाद अपनी वैश्विक भेदभाव नीति में बदलाव किया है। हालांकि, IBM ने यह नहीं बताया कि उसने यह बदलाव कब किया। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, IBM केवल अपने प्रबंधकों को जाति के विषय पर प्रशिक्षण दे रहा है।

तकनीकी कंपनियों में जाति को लेकर हो रही चर्चा

तकनीकी कंपनियों में जाति को लेकर हो रही चर्चा

अन्य बड़ी तकनीकी कंपनियां जैसे Amazon, Dell, Facebook के मालिक Meta, Microsoft, और Google अपनी मुख्य वैश्विक नीति में जाति का विशेष रूप से और स्पष्ट रूप से संदर्भ नहीं देते हैं। इनमें से कुछ ने अपने कर्मचारियों को केवल इंटरनली नोट रिलीज किया है। हाल के वर्षों में भारतीय विरासत वाले तकनीकी कर्मचारियों के बीच जाति और कथित जातिगत भेदभाव के विषय पर सिलिकॉन वैली में बहुत चर्चा हुई है।

गूगल ने जाति आधारिक वार्ता रद्द की

गूगल ने जाति आधारिक वार्ता रद्द की

कुछ महीने पहले जून में गूगल ने जातिगत भेदभाव पर एक वार्ता रद्द कर दी थी। इस वार्ता में दलित अधिकार कार्यकर्ता थेनमोझी सुंदरराजन को एक प्रस्तुति देनी थी। वार्ता का आयोजन गूगल की कर्मचारी तनुजा गुप्ता ने कर रही थीं। वार्ता रद्द करने की खबर सामने आने के बाद, एक रिपोर्ट में कहा गया कि गूगल ने बातचीत को रद्द कर दिया क्योंकि इससे कंपनी के अंदर विद्वेष पैदा हो रहा था।

भारत की बड़ी समस्या है जातिवाद

भारत की बड़ी समस्या है जातिवाद

इसके बाद तनुजा गुप्ता को कथित तौर पर कंपनी की आचार संहिता के उल्लंघन के लिए जांच के दायरे में रखा गया था। इसके तुरंत बाद तनुजा गुप्ता ने गूगल से इस्तीफा दे दिया था। विदित हो कि भारत जैसे देश में जातिगत भेदभाव एक सच्चाई है और देश की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। इसमें जन्म के आधार पर कुछ लोगों को नीचे दर्जे का माना जाता है और उनके साथ सामाजिक-आर्थिक और अन्य तरह के भेदभाव किए जाते हैं।

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English summary
Apple became the first company to ban caste discrimination, training being given to staff
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