गलवान को लेकर चीन के एक और झूठ का पर्दाफाश! सैटेलाइट तस्वीरों ने झंडा फहराने के दावे पर PLA को किया बेनकाब
नई दिल्ली, 8 फरवरी: गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों के हाथों धूल चाटने की वजह से पहली बार ऐसा हुआ है कि दुनिया भर में चीन की नाक कट चुकी है और वह अपनी साख वापस कायम करने के लिए झूठ पर झूठ बोलता जा रहा है। लेकिन, दिलचस्प बात ये है कि टेक्नोलॉजी के जमाने में हर बार उसकी करतूतों की पोल खुल जा रही है। पिछले जनवरी में चीन ने एक प्रोपेगेंडा पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी में अपना झंडा फहराने के लेकर किया था। भारतीय सेना के सूत्रों ने तभी उसकी पोल खोल दी थी और सारे दावों को नकार दिया था। अब सैटेलाइट तस्वीरें भी सामने आ गई हैं और उससे पता चला है कि चीन ने गलवान नदी के किनारे हिंसक झड़प वाले जिस स्थान पर झंडा फहराने का दावा किया था, दरअसल उसने उस जगह से 1.2 किलोमीटर दूर यह कार्यक्रम किया था। लेकिन, उसकी सरकारी मीडिया ने पूरे विश्व में एक फर्जी माहौल बनाने की कोशिश की थी और भारत में भी लोगों को गुमराह करने की चाल चली थी। लेकिन, ड्रैगन को फिर से जोरदार तमाचा लगा है।

गलवान को लेकर चीन के एक और झूठ का पर्दाफाश!
पिछले जनवरी महीने चीन ने एक प्रोपेगेंडा वीडियो जारी कर पूर्वी लद्दाख में एलएसी के पास गलवान घाटी में पीएलए की ओर से उसका राष्ट्रीय झंडा फहराने का दावा किया था, जिसको लेकर काफी विवाद पैदा हुआ था। दरअसल, चीन की सरकारी भोंपू मीडिया ने इसको लेकर दावा किया था कि झंडा चीन के नए साल के अवसर पर पीएलए ने उस जगह पर फहराया है, जहां 15-16 जून, 2020 की दरमियानी रात को दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस झड़प में भारत के कई सैनिक भी शहीद हुए थे और कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उसके कई गुना चीनी सैनिक मारे गए थे। हालांकि, भारतीय सेना के सूत्रों ने तभी चीन के फर्जी दावे को नकार दिया था और कहा था कि पीएलए ने गलवान घाटी में हिंसक झड़प वाले इलाके से काफी दूर बफर जोन या डीमिलिट्राइज्ड क्षेत्र में अपना राष्ट्रीय ध्वज फहराया है।

इस सैटेलाइट इमेज से खुली चीन के झूठ की पोल
अब एक ट्विटर यूजर डेमियेन सायमॉन (@detresfa)ने एक सैटेलाइट इमेज शेयर करके चीन और उसकी पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी के प्रोपेगेंडा चैनल को बेनकाब कर दिया है। सायमॉन ओपन-सोर्स इंटेलीजेंस को ट्रैक करते हैं और उन्होंने सैटेलाइट इमेज शेयर करके बताया है कि दरअसल, पीएलए के सैनिकों ने जो चाइनीज झंडा फहराया था, वह गलवान के हिंसक झड़प वाली जगह से करीब 1.2 किलोमीटर दूर है। उनके मुताबिक यह (नए साल का ) समारोह पीएलए के एक नए पोस्ट पर किया गया, जो कि डीमिलिट्राइज्ड जोन के बाहर था।

गलवान घाटी में भारतीय सेना ने फहराया था तिरंगा
भारतीय सेना के सूत्रों ने 4 जनवरी को ही चीन के दावों को नकार दिया था कि उसने विवादित जगह पर झंडा फहराया है। सेना सूत्रों ने कहा था कि वह स्थान डीमिलिट्राइज्ड जोन था, जो कि गलवान घाटी झड़प के बाद दोनों ओर से पीछे हटने के लिए हुए कई दौर की बात के आधार पर तय हुआ था। यही नहीं, चीन की करतूत की पोल खोलने के लिए भारतीय सेना ने गलवान घाटी में गौरव के साथ उसी समय तिरंगा भी फहराया था और उसकी तस्वीर भी जारी की गई थी। वास्तव में पीएलए और उसकी सरकारी मीडिया की झूठ तो तभी दुनिया के सामने आ चुकी थी।
चीन ने झड़प वाली जगह से 1.2 किलोमीटर दूर फहराया था झंडा
सायमॉन ने अपने ट्विटर पोस्ट में लिखा है, 'जमीन और सैटेलाइड इमेज को जोड़कर GEOINT निकालने से उस दावों की सच्चाई जानने में ये मदद मिली है कि चीन ने गलवान नदी के मोड़ से दूर झंडा फहराया था, डेटा से मालूम होता है कि जनवरी में हुआ समारोह मोड़ से 1.2 किलोमीटर पर हुआ था, जो कि बफर जोन के बाहर पीएलए का नया पोस्ट है।'
चीन के वीडियो से मिली झूठ बेनकाब करने में मदद
इससे पहले ही उन्होंने 7 फरवरी को एक चाइनीज प्रोपेगेंडा वीडियो शेयर कर आशंका जता दी थी कि पीएलए की ओर से झंडा फहराने का एक अनकट वीडियो यूट्यूब पर शेयर किया गया है, जिसकी मदद से यह स्थापित करने में मदद मिली है कि, समारोह दरअसल मोटे तौर पर गलवान नदी की मोड़ से करीब एक किलोमीटर दूर का इलाका है और वह भी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के उसपार चीन की तरफ वाला हिस्सा है। उन्होंने लिखा था, 'दिख रहा है कि मोड़ से वास्तव में कितनी दूर यह हुआ था। कथित रूप से कहा गया कि यह वही जून, 2020 वाले झड़प का स्थान है, मोटे तौर पर मोड़ से 1 किलो मीटर दूर चीन की तरफ। '












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