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एंजेलिना जोली ने पाकिस्तान में ऐसा क्या खोजा था कि रातोंरात मिली शोहरत

एंजेलिना जोली ने इस जगह को प्रिंसेज ऑफ़ होप का नाम दिया था. लेकिन इसकी सुरक्षा को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं.

अगर आप लसबेला से ग्वादर की ओर यात्रा करें तो आपको समुद्री किनारे के राजमार्ग के दोनों ओर ऐसे पहाड़ दिखाई देंगे जो पहली नज़र में किसी बेहतरीन कलाकार के हाथों तराशी हुई मूर्तियां लगती हैं.

लेकिन पुरातत्व विशेषज्ञों का कहना है कि यह कलाकृतियां प्रकृति के हाथों बनी हैं, जिसकी वजह समुद्री कटाव और कुछ दूसरे प्राकृतिक कारण हैं.

उन्हीं अजूबों में 'प्रिंसेज ऑफ़ होप' यानी 'उम्मीद की शहज़ादी' नाम की एक मूर्ति भी है, जो देखने में किसी महिला जैसी लगती है.

'प्रिंसेज ऑफ़ होप' लसबेला ज़िले के समुद्री इलाक़े में सदियों से मौजूद है लेकिन इसे वैश्विक स्तर पर उस समय प्रसिद्धि मिली जब हॉलीवुड की एक नामी अदाकारा ने उस इलाक़े का दौरा किया.

सरकारी अधिकारियों के अनुसार उन्होंने ही इसे 'प्रिंसेस ऑफ़ होप' का नाम दिया था. लेकिन पिछले कुछ समय से यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि 'प्रिंसेज ऑफ़ होप' के गिरने का ख़तरा है.

इन आशंकाओं के मद्देनज़र पुरातत्व विभाग ने बलूचिस्तान सरकार को 'प्रिंसेज ऑफ़ होप' समेत ऐसी दूसरी प्रतिमाओं और ढांचों के संरक्षण के सुधार के लिए उपाय करने के प्रस्ताव भेजे हैं.

लसबेला ज़िले के डिप्टी कमिश्नर मुराद कासी ने बीबीसी को बताया कि 'प्रिंसेज ऑफ़ होप' के संरक्षण के लिए क़दम उठाए गए हैं, जिनमें पुलिस अधिकारियों की तैनाती शामिल है.

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'प्रिंसेज ऑफ़ होप' या इस तरह की दूसरी कलाकृतियों की सुरक्षा के बारे में आशंकाएं क्यों व्यक्त की जा रही हैं? इस सवाल का जवाब जानने से पहले यह जानते हैं कि यह किस जगह स्थित है.

'प्रिंसे ऑफ़ होप' कहां है?

क्वेटा के दक्षिण में लगभग 700 किलोमीटर की दूरी पर 'प्रिंसेज ऑफ़ होप' कराची के पास बलूचिस्तान के ज़िला लसबेला में स्थित है. कराची से इस जगह पहुंचना तुलनात्मक रूप से आसान है क्योंकि यहाँ से इसकी दूरी डेढ़ सौ से पौने दो सौ किलोमीटर के बीच है.

हंगोल नेशनल पार्क की पहाड़ी शृंखला में यह अपनी तरह का अकेला ढांचा नहीं है बल्कि यहां लोगों को हैरान कर देने वाले इस तरह की कई दूसरी संरचनाएं भी हैं.

बलूचिस्तान यूनिवर्सिटी में पुरातत्व विभाग के लेक्चरर इमरान शब्बीर बलोच का कहना है कि आप उनको अजीबोग़रीब अजूबे कह सकते हैं क्योंकि अगर आप उनको देखें तो आप ज़रूर हैरान होंगे कि यह किसी इंसानी कोशिश के बिना किस तरह अलग-अलग रूपों में ढल गए हैं.

उनका कहना है, "यह वास्तव में प्राकृतिक तौर पर मिट्टी से बनने वाली संरचनाएं हैं, जो आपको बज़ी टॉप से लेकर ग्वादर में ईरानी सीमा के पास जीयोनी तक मिलेंगे."

उनके अनुसार, इस इलाक़े में मिस्र के स्फिंक्स से मिलता जुलता एक ढांचा भी है, जिसका सर इंसान और धड़ शेर जैसा है.

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इमरान शब्बीर बलोच ने बताया कि बलूचिस्तान के समुद्री किनारे पर स्थित यह स्ट्रक्चर और मड फ़ॉर्मेशन सदियों से मौजूद हैं, लेकिन महिला से मिलते जुलते इस ढांचे को उस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोहरत मिली जब हॉलीवुड अदाकारा एंजेलिना जोली ने उस इलाक़े का दौरा किया.

बलूचिस्तान के पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर जमील बलोच ने बताया कि सन 2002 में एंजेलिना जोली ने संयुक्त राष्ट्र की सद्भावना दूत के तौर पर उस इलाक़े का दौरा किया था और उन्होंने ही इसे 'प्रिंसेज ऑफ़ होप' का नाम दिया था.

उनका कहना था कि एंजेलिना जोली के दौरे के बाद यह ढांचा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया.

इमरान शब्बीर बलोच ने बताया कि पुरातत्व की दृष्टि से उनका कोई ख़ास महत्व नहीं है.

उनका कहना था कि पुरातत्व विशेषज्ञ जॉर्ज डेल्स ने 1960 में इस इलाक़े का दौरा किया था जबकि उसी तरह फ़्रांसीसी विशेषज्ञों की टीम ने भी उस इलाक़े का दौरा किया लेकिन उन्हें यहां ऐसे साक्ष्य नहीं मिले जिनके आधार पर निर्माण को इंसानों से जोड़ा जा सके.

एंजलीना जोली
Getty Images
एंजलीना जोली

लेकिन जमील बलोच ने बताया कि उन संरचनाओं में कुछ दिलचस्प बातें हैं.

उनका कहना था कि कुछ विशेषज्ञों की राय में यह हिंदुओं के मंदिर हैं क्योंकि उनका एक महत्वपूर्ण और बड़ा धार्मिक केंद्र हिंगलाज माता पास ही है.

उन्होंने बताया कि यूनानी विद्वानों में से कुछ उनको यूनानी देवताओं की कल्पना समझते हैं.

लेकिन अक्सर विशेषज्ञों की राय में यह ढांचे समुद्री कटाव समेत प्राकृतिक कारणों से बने हैं.

उन्होंने बताया कि अब उन्हें पुरातत्व के नियमों के तहत न केवल संरक्षण प्राप्त है बल्कि उन्हें नुक़सान पहुंचाने की स्थिति में सज़ा भी हो सकती है.

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इन ढांचों को क्या ख़तरे हैं?

जमील बलोच के अनुसार, इन ढांचों को इस समय दो तरह के बड़े ख़तरों का सामना करना पड़ रहा है. पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर जमील बलोच ने बताया कि एक ख़तरा इंसानों से है जबकि दूसरा बारिश और मौसमी हालात से.

पिछले दिनों सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी तस्वीरें शेयर की गईं जिनमें 'प्रिंसेज ऑफ़ होप' के पास लोग मौजूद थे. कुछ लोगों ने लिखा कि 'प्रिंसेज ऑफ़ होप' अब कुछ दिनों की मेहमान है जबकि दूसरों ने लिखा, "अलविदा, प्रिंसेज ऑफ़ होप, अलविदा!"

उनका कहना था, "अब पर्यटकों के यहां आने का रुझान अधिक हो गया है जो कि अच्छी बात है लेकिन लोग यह नहीं देखते कि यह चीज़ कितनी संवेदनशील और नाज़ुक है. वह तस्वीरें और वीडियो बनाने के लिए ढांचे पर चढ़ते हैं."

उनका कहना था कि हालांकि यह है तो एक पथरीला ढांचा लेकिन इसके बीच मिट्टी है और जब लोग उन पर तस्वीरें और वीडियो बनाने के लिए चढ़ते हैं तो उनके गिरने या प्रभावित होने की आशंका होती है.

उन्होंने बताया कि इंसानों के अलावा प्राकृतिक तौर पर बड़ा ख़तरा बारिश से है क्योंकि बारिश से उनके कटाव की आशंका है और इससे उनके गिरने के साथ-साथ उनमें बदलाव की भी आशंका रहती है.

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इन ढांचों का संरक्षण कैसे हो सकता है?

जमील बलोच ने बताया कि उन्होंने पुरातत्व विभाग की ओर से सरकार को जो प्रस्ताव भेजा है उसका मक़सद इंसानी और प्राकृतिक- दोनों ख़तरों से इन्हें बचाना है.

उन्होंने बताया कि एक तो लोगों को ध्यान दिलाने की ज़रूरत है ताकि वह उनको नुक़सान नहीं पहुंचाएं जिसके लिए 'प्रिंसेज ऑफ़ होप' समेत दूसरी जगहों में से हर एक पर पांच से छह साइन बोर्ड लगाने की ज़रूरत है.

"उन साइन बोर्डों पर यह लिखा हो कि यह पुरातात्विक महत्व के ढांचे हैं, इसलिए इनको नुक़सान नहीं पहुंचाया जाए. उनको नुक़सान पहुंचाना अपराध है. इस बारे में जो सज़ाएं हैं, वह भी उन साइन बोर्डों पर लिखी हों."

"इसके साथ ही उनके आसपास कंटीले तार या इस तरह की रुकावटें भी हों ताकि लोग उनके पास न जा सकें, बल्कि वह एक दूरी पर रहें."

"इसके अलावा उन्हें बारिश से बचाने के लिए फ़ाइबर ग्लास लगाए जाएं और यह पर्यावरण के अनुसार हो क्योंकि लोहे या कंक्रीट का कोई स्ट्रक्चर उस इलाके में देर तक नहीं टिक सकता."

उन्होंने ग्वादर के इलाक़े में प्रथम विश्व युद्ध के समय अंग्रेज़ों के बनाए गए एयरपोर्ट के बारे में बताते हुए कहा कि यह समुद्र के साथ है लेकिन इसको इस तरह बनाया गया है कि वह आज तक सुरक्षित है.

"उसे जाकर देखें. उसका जो रनवे है और उस पर जो टावर बनाए गए हैं वह इस तरह बनाए गए हैं कि लंबा समय गुज़रने के बावजूद उनको कुछ नहीं हुआ."

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अब तक 'प्रिंसे ऑफ़ होप' के संरक्षण के लिए क्या उपाय किए गए हैं?

'प्रिंसेज ऑफ़ होप' के संरक्षण के लिए अब तक किए जाने वाले उपायों के बारे में जब लसबेला ज़िले के डिप्टी कमिश्नर मुराद कासी से संपर्क किया गया तो उनका कहना था कि बलूचिस्तान के समुद्री किनारों का प्राकृतिक सौंदर्य लोगों के आकर्षण का केंद्र बना है और पर्यटक बड़ी संख्या में आ रहे हैं.

उनका कहना था कि 'प्रिंसेज ऑफ़ होप' के बारे में जो आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं, उनका संज्ञान लेते हुए उसके संरक्षण के लिए कुछ तात्कालिक उपाय किए गए हैं, जिनमें 'प्रिंसेज ऑफ़ होप' के 100 मीटर के दायरे में लोगों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है जिसके कारण वह अब उसके पास नहीं जा सकेंगे.

"इसके अलावा यहां पर पुलिस की भी तैनाती की गई है ताकि किसी को तस्वीर या वीडियो बनवाने के लिए बहुत पास न जाने दिया जाए."

उन्होंने यह उम्मीद ज़ाहिर की कि इन उपायों से न केवल इस कलाकृति को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी बल्कि दूसरे प्राकृतिक तौर पर बने ढांचों के संरक्षण के लिए उपाय भी किए जाएंगे.

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