अफगानिस्तान से आई भारत के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी, चीन के खिलाफ हाथ लगा बड़ा मौका
अफगानिस्तान से भारत के हाथों में बड़ा मौका हाथ लगा है। अमेरिका ने कहा है कि वो अफगानिस्तान से सेना हटाकर पूरा ध्यान चीन पर लगाना चाहता है।
वॉशिंगटन, जुलाई 12: अफगानिस्तान में करीब 200 करोड़ डॉलर निवेश करने वाले भारत को उस वक्त सबसे बड़ा झटका लगा था, जब अमेरिका ने अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को बाहर निकालने का ऐलान किया था। और फिर अब स्थिति ये है कि तालिबान काफी तेजी से अफगानिस्तान में नियंत्रण बढ़ाए जा रहा है, जिसे देखते हुए भारत ने कंधार में स्थित अपने कॉन्सुलेट से 50 से ज्यादा अधिकारियों को वापस बुला लिया है। यानि, अफगानिस्तान से भारत के लिए अब तक अच्छी खबरें नहीं आ रही थीं, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अफगानिस्तान से सैनिकों को बाहर निकालने के पीछे जो असली वजह बताई है, वो भारत को खुश करने वाला है।

बाइडेन से मिली अच्छी खबर
अमेरिका ने अफगानिस्तान से काफी तेजी से अपने सैनिकों को बाहर निकाला है, जिससे हर कोई हैरान है। लेकिन, अब अमेरिका ने कहा है कि उसने चार साल पहले ही अफगानिस्तान से सैनिकों को बाहर निकालने का फैसला कर लिया था, क्योंकि वो अफगानिस्तान युद्ध से तंग आ चुका था। 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए आतंकी हमलों के बाद से अलकायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे खतरनाक आतंकी संगठनों से लड़ने में अमेरिका को अरबों डॉलर बर्बाद हुए और हजारों सैनिक मारे गये। ऐसे में अमेरिका अफगानिस्तान युद्ध से तंग आ गया था, लेकिन चीन की बढ़ती शक्ति ने दूसरी तरफ अमेरिका को काफी परेशान करना शुरू कर दिया था। लिहाजा, जो बाइडेन ने कहा है कि अफगानिस्तान से सैनिकों को बाहर निकालने के पीछ मुख्य वजह चीन और रूस है, क्योंकि अब अमेरिका सिर्फ और सिर्फ चीन और रूस पर अपना ध्यान केन्द्रित रखना चाहता है। ऐसे में अगर चीन और अमेरिका सीधे तौर पर उलझते हैं तो जाहिर तौर पर भारत को फायदा होगा।

चीन और रूस पर फोकस
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा है कि अफगानिस्तान से सैनिकों को निकालने के पीछे यूएस का मकसद ये है कि वो चीन और रूस पर ही अपना फोकस रख सके। उन्होंने कहा कि 31 अगस्त तक अफगानिस्तान से सभी अमेरिकी सैनिक वापस आ जाएंगे और फिर अमेरिका चीन पर फोकस करेगा। दरअसल, 2013 के शुरूआत में अमेरिका को अचानक पता चलता है कि 2012 में चीन के नये राष्ट्रपति बने शी जिनपिंग काफी तेजी से अपने देश की सेना को मजबूत कर रहे हैं। अमेरिका को रिपोर्ट में पता चला कि दक्षिण चीन सागर, जिबूती और एशिया और मध्य एशिया में कई जगहों पर सैन्य ठिकाने बनाने में लग गया है। दूसरी तरफ रूस भी लगातार मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हुए यूक्रेन के क्रीमिया पर कब्जा कर चुका है।

अमेरिका और चीन होंगे आमने-सामने
2017 में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन और रूस को अमेरिका के हितों के लिए खतरा बताया था और कहा था कि चीन और रूस लगातार अमेरिका के हितों को चुनौती दे रहे हैं। रूस के ऊपर अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने का आरोप लगा था, तो दूसरी तरफ ताइवान को कब्जाने में लगे चीन को रोकना अमेरिका को काफी भारी पड़ रहा है। चीन को रोकना अमेरिका ने अपनी प्राथमिकता में शामिल किया हुआ है, तो अमेरिकन नेवी अब विश्व की सबसे बड़ी नेवी बन चुकी है। ऐसे में अमेरिका अगर अफगानिस्तान में उलझा रहता, तो वो चीन पर पूरी तरह से फोकस नहीं कर पाता। लिहाजा जो बाइडेन ने कहा कि अमेरिका अब सिर्फ और सिर्फ चीन और रूस पर ध्यान केन्द्रित करना चाहता है।

भारत के लिए बनेगा मौका?
अफगानिस्तान में भले ही भारत को बड़े झटके लगे हैं, लेकिन अगर अमेरिका और चीन आमने-सामने आ जाते हैं तो भारत के लिए काफी बड़ा मौका मिलेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि, पाकिस्तान और चीन, दो मोर्चों पर उलझा भारत चीन पर पूरी तरह से फोकस नहीं कर पा रहा और चीन सीमा विवाद के बहाने भारत को उलझाए रखना चाहता है। लेकिन, अगर दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति उसके खिलाफ दूसरा मोर्चा खोल दे, तो निश्चित तौर पर चीन अमेरिका के साथ उलझेगा और भारत के लिए नये मौके बनेंगे। वहीं, इस साल के अंत में क्वाड की बैठक होने वाली है, जिसमें इस बार चीन के लिए विस्त्तृत नीति का निर्माण होना है। लिहाजा, माना जा रहा है कि चीन के खिलाफ चार फ्रंट खोले जाएंगे और चीन अब तक जिस नीति के सहारे आगे बढ़ता रहा है, उन्हीं नीतियों से चीन को घेरा जाएगा। ऐसे में जो बाइडेन के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि भारत को चीन के खिलाफ अमेरिका का संपूर्ण साथ आने वाले वक्त में मिल सकता है।












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