H-1B वीजा को लेकर अमेरिका का नया प्रस्ताव, हजारों भारतीयों की नौकरियां पर आएगा संकट
नई दिल्ली। अमेरिका के विदेश विभाग ने बुधवार को एच-1बी वीजा को लेकर नया प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव में अमेरिकी विदेश विभाग ने एच-1बी स्पेशलिटी अस्थायी बिजनेस वीजा जारी नहीं करने को सरकार से कहा है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देता है तो भारतीयों पर खासतौर से इसका असर होगा। इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने से करीब 8000 विदेशी कामगार हर साल प्रभावित होंगे। जिसमें ज्यादातर संख्या भारत के लोगों की ही होगी। खासतौर से उन कंपनियों पर भी असर होगा जो एच 1 बी वीजा पर तकनीकी पेशेवरों को अमेरिका भेजती हैं।
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एच-1बी वीजा अमेरिकी कंपनियों को देश में प्रौद्योगिकी पेशेवरों को छोटे कार्यकाल के लिए बुलाने और साइट पर जाकर काम करने की इजाजत देता है। अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि ऐसे में नया प्रस्ताव मंजूर होने पर अमेरिकी कंपनियों को अपने श्रमिकों को प्रोत्साहित करने का मौका मिलेगा। अमेरिका में तीन नवंबर को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है, ऐसे में इस कदम को चुनाव से जोड़कर ही देखा जा रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप और उनकी सरकार का रुख एत1 बी वीजा को लेकर लगातार सख्त ही रहा है। इसी महीने ट्रंप प्रशासन ने स्थानीय कामगारों की सुरक्षा के लिए चुनाव से पहले एच1बी वीजा को लेकर नई पाबंदियां लगाई हैं। नए नियमों में भत्तों से जुड़े पारामीटर्स बढ़ा दिए गए हैं। कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखने की शर्तों में बदलाव किए गए हैं। व्हाइट हाउस ने फ्रॉड डिटेक्शन फोर्स को ज्यादा अधिकार दिया है। इससे अब वीजा मंजूरी से पहले होने वाली जांच ज्यादा सख्त हो जाएगी। व्हाइट हाउस के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने एच1बी वीजा से जुड़े दो इंटैरिम फाइनल रुल्स (आईएफआर) के जरिए ये बदलाव किए हैं। इसके साथ-साथ नए नियम में थर्ड पार्टी क्लाइंट के तौर पर नियुक्त किए जाने वाले कर्मचारियों के वीजा के मान्य रहने का समय भी कम कर दिया गया है।












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