अमेरिका के 'सबसे डरपोक राष्ट्रपति' का अफगानिस्तान में आखिरी 7 दिनों का मिशन, नहीं माफ किए जाएंगे बाइडेन

जो बाइडेन ने साफ कर दिया है कि हजारों अफगानों के मौत में मुंह में फंसने से भी उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है और अब वो तालिबान की बात मानने से इनकार नहीं कर सकते हैं।

वॉशिंगटन, अगस्त 25: आखिर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने आखिरी अफगानिस्तान मिशन को सिर्फ सात दिनों के अंदर ही खत्म करने का फैसला क्यों लिया है? इसका खुलासा जो बाइडेन के अलग अलग बयानों से ही हो गया है। और इसके साथ ही जो बाइडेन अमेरिकी इतिहास के सबसे डरपोक राष्ट्रपति बन गये हैं, जिसके फैसले से लाखों अफगानों पर मौत की बारिश होने की संभावना है। जो बाइडेन ऐसे राष्ट्रपति बन गये हैं, जिन्हें तालिबान आदेश दे रहा है और जो तालिबान के निर्देशों को मान रहे हैं।

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    अब एजेंडे में नहीं रहा अफगानिस्तान

    अब एजेंडे में नहीं रहा अफगानिस्तान

    अमेरिका के राष्ट्रपति ने अपने बयान से साफ कर दिया है कि अब अमेरिका के एजेंडे में दूर-दूर तक अफगानिस्तान नहीं है और अमेरिका ने अपना पीछा अफगानिस्तान से छुड़ा लिया है। जो बाइडेन ने अपने बयान में कहा कि ''हम अमेरिका में, अमेरिका के लोगों पर निवेश करने की दिशा में एक कदम और आगे आ चुके हैं। हम अपने देश को विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाने की दिशा में ला रहे हैं, ताकि अमेरिका के लोग विश्व से मुकालबा करने के लिए तैयार हो सकें''। अमेरिका के पहले के राष्ट्रपतियों के भाषण की शुरूआत वैश्विक मसलों पर होती थी, जिसमें अमेरिका के निर्माण से ज्यादा वैश्विक निर्माण पर जोर दिया जाता था, लेकिन जो बाइडेन ने अपने बयान में पूरी तरह से साफ कर दिया है कि मानवीय त्रासदियों से अमेरिका को खास मतलब अब नहीं रहा है और अफगानिस्तान से हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ ही अमेरिका का अफगानिस्तान मिशन खत्म हो रहा है और जो बाइडेन का पॉलिटिकल नजरिया सिर्फ अमेरिकियों तक सीमित होने वाला है।

    बाइडेन ने दिया अफगानिस्तान को धोखा?

    बाइडेन ने दिया अफगानिस्तान को धोखा?

    जो बाइडेन का फैसला निश्चित तौर पर राजनीतिक विरोधियों, अमेरिका का राजनीतिक दिग्गजों, इंटेलिजेंस ऑफिसर्स समेत कई लोगों को क्रोधित और निराश करेगा, जो मानते हैं कि अमेरिका को उन सभी लोगों को आश्रय देना चाहिए, जिन्होंने अफगानिस्तान मिशन के दौरान अमेरिकी सेना, नाटो सेना, अमेरिकी सरकार का साथ दिया था। कई जानकारों का मानना है कि जो बाइडेन ने जो अभी किया है, उसने हजारों अफगानियों के विश्वास को तोड़ दिया है, जो अब तालिबान के हाथों में मरने के लिए फंस चुके हैं। अफगान जानकारों का कहना है कि अमेरिका ने हजारों ऐसे लोगों को बेबस छोड़ दिया है, जिन्होंने हजारों अमेरिकी जवानों को तालिबान के हाथों मरने से बचाया है। लेकिन, जो बाइडेन का मानना है कि उनका फैसला अमेरिका के राष्ट्रीय हितों के अनुरूप है, क्योंकि अमेरिका भयंकर महामारी, सुस्त आर्थिक संकट और एक अजीब विदेश नीति से गुजर रहा है।

    क्या डर गये जो बाइडेन?

    क्या डर गये जो बाइडेन?

    तालिबान के द्वारा अफगानिस्तान बंधक बना लिया गया है और काबुल एयरपोर्ट पर अमेरिका के 6500 जवान मौजूद हैं और मौजूदा स्थिति को देखते हुए अमेरिका और फ्रांस जैसे सहयोगी बाइडेन से अपील कर रहे थे कि अफगानिस्तान से लोगों को निकालने की आखिरी तारीख को बढ़ा दिया जाए, लेकिन जो बाइडेन ने उन प्रस्तावों को मानने से इनकार कर दिया। माना जा रहा है कि अफगानिस्तान से निकलने की आखिरी तारीफ बढ़ाकर जो बाइडेन आने वाले वक्त में तालिबान के साथ कोई और टकराव नहीं चाहते हैं और ना ही और ज्यादा अमेरिकियों की जान को खतरे में डालना चाहते हैं।

    मजबूरी है या लापरवाही ?

    मजबूरी है या लापरवाही ?

    जानकारों का कहना है कि अगर अमेरिका को सभी अमेरिकी मददगारों को बाहर निकालना है तो ना सिर्फ अमेरिका को काबुल एयरपोर्ट के चारों तरफ सुरक्षा दायरा को काफी ज्यादा मजबूत करना होगा, बल्कि अमेरिका को एक बार फिर से पूरे काबुल का कंट्रोल अपने हाथ में लेना होगा। इसके लिए और ज्यादा अमेरिकी फौज को भेजने और ऑपरेशन चलाने की जरूरत होगी, जिसके लिए अब जो बाइडेन किसी भी सूरत में तैयार नहीं हैं। इसीलिए जो बाइडेन ने 31 अगस्त को अफगानिस्तान में अमेरिकी मिशन खत्म करने का फैसला मददगार अफगानों की जिंदगी को खतरे में डालकर लिया है।

    अमेरिका का सबसे डरपोक राष्ट्रपति!

    अमेरिका का सबसे डरपोक राष्ट्रपति!

    अब जब तालिबान कह रहा है कि वह अफगान नागरिकों को देश छोड़ने की अनुमति नहीं देगा, तो बाइडेन के पास वीजा धारक शरणार्थियों को अफगानिस्तान से बाहर निकालने के लिए एकमात्र विकल्प अमेरिकी सैनिकों को सैन्य कदम उठाने की इजाजत देना है, जिसके लिए जो बाइडेन तैयार नहीं हैं। इसके साथ ही जो बाइडेन एक ऐसे 'डरपोक' राष्ट्रपति बन गये हैं, जिसे बार बार तालिबान धमका रहा है, ऑर्डर दे रहा है, निर्देश दे रहा है और जिसे वो हर बार मानने के लिए तैयार हो रहे हैं। पूरे अफगानिस्तान के संकट के दौरान सबसे बड़ी बात जो निकलकर सामने आई, और जिससे अमेरिका के पॉलिटिकल एक्टिविस्ट और दुनिया के अफगान मामलों के जानकर सहमत हैं, वो ये कि लाखों अफगानों को अमेरिका के राष्ट्रपति ने, अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने, राजनेताओं ने तालिबान के हाथों संभावित मौत मरने के लिए छोड़ दिया है। और खुद को बचाने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति नाटक कर रहे हैं कि उन्होंने अफगानिस्तान युद्ध खत्म कर दिया है।

    अफगानों को रोक रहा है तालिबान

    अफगानों को रोक रहा है तालिबान

    सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब तालिबान ने देश छोड़ने की कोशिश करते हुए एयरपोर्ट की तरफ आने वाले अफगानों को रोकना शुरू कर दिया है। सीएनएन ने एक राजनयिक के हवाले से रिपोर्ट दी है कि अफगानिस्तान में जमीन पर जो हकीकत है और जो राजनीतिक फैसले लिए जा रहे हैं, उस दोंनों में कोई कनेक्शन नहीं है और जो बाइडेन के 31 अगस्त को मिशन खत्म करने के फैसले से कई हजार अफगानी काबुल में मौत के मुंह में फंस जाएंगे। अमेरिका के एक सुरक्षा अधिकारी ने सीएनएन को कहा है कि 'मेरे लिए इन तमाम परिस्थितियों की कल्पना करना काफी मुश्किल हो रहा है कि 31 अगस्त तक सब पूरा करना होगा'। वहीं, रिपब्लिकन पार्टी के नेता ने जो बाइडेन को बुरी तरह से लताड़ते हुए कहा कि ''अब पूरी दुनिया में एक मैसेज चला गया है कि जो भी अमेरिका के लिए काम करेगा, वो मारा जाएगा''। उन्होंने कहा कि ''मैं अपने बयान पर कायम हूं कि जो बाइडेन के हाथ खून से लथपथ हो चुके हैं और अब अमेरिकियों के लिए कई दरवाजे बंद हो चुकते हैं''

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