अमेरिका ने छोड़ा साथ, अब अफगानिस्तान को भारत से उम्मीद, कहा- पाकिस्तान में हैं तालिबानी 'आका'
नई दिल्ली, 09 जुलाई। अफगानिस्तान से अब अमेरिकी सेना अपना बोरिया-बिस्तरा बांध घर वापस लौट चुकी है। यूएस सेना के जाने से अफगान में एक बार फिर तालिबान अपने पैर पसारने लगा है जिससे वहां अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो गई है। अमेरिका से मिल रही सैन्य मदद बंद होने के बाद अब अफगानिस्तान अपने मित्र दोस्त भारत से सहायता की उम्मीद कर रहा है। नई दिल्ली में अफगानिस्तान के राजदूत फरीद ममुंडजे ने कहा कि भारत अन्य क्षेत्रीय अभिनेताओं के साथ मिलकर हमारी शांति प्रक्रिया में रचनात्मक भूमिका निभा सकता है।

भारत से अफगानिस्तान को काफी उम्मीदें
फरीद ममुंडजे ने उस रिपोर्ट पर भी प्रतिक्रिया दी है जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान तालिबान का समर्थन कर रहा है। न्यूज एजेंसी एएनआई से बात बात करते हुए अफगान राजदूत ने कहा, 'भारत एक प्रमुख भागीदार रहा है। वह अन्य क्षेत्रीय अभिनेताओं के साथ मिलकर हमारी शांति प्रक्रिया में रचनात्मक भूमिका निभा सकता है। वार्ता की मेज पर आने के लिए राजनयिक चैनलों के माध्यम से तालिबान पर अधिक दबाव डालने के लिए भारत अपनी संयोजक शक्ति का उपयोग कर सकता है।'
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अभी हालात इतने बुरे भी नहीं
फरीद ने आगे कहा, 'हम अंधकार युग की ओर नहीं जा रहे हैं। हमें यह याद रखने की जरूरत है कि 40+ नाटो सदस्य देश आतंकवाद के खिलाफ युद्ध लड़ रहे थे। नाटो के खत्म होने के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि हम एक कठिन दौर से गुजरेंगे। हमने हमेशा कहा है कि पाकिस्तान में शूराओं (तालिबान) की मौजूदगी हमारे लिए बहुत चिंता का विषय रही है। उनके परिवार अभी भी वहीं रहते हैं। उनके पास वर्तमान में पाकिस्तान में मौजूद समर्थन और बुनियादी ढांचा है, हम इसे बदलना चाहते हैं।'

हजारों लोग मारे गए, कई सैनिक हुए घायल
अफगान राजदूत कहते हैं, 'अप्रैल से अब तक 3,600 से अधिक सिर्फ स्थानीय लोग मारे गए हैं। करीब 1000 सैनिक शहीद हुए हैं, 3000 से अधिक घायल हुए हैं। अफगानिस्तान के लोग भारत सरकार के साथ भारतीय वाणिज्य दूतावासों की उपस्थिति चाहते हैं। लोगों और सरकार के लिए अपने निर्णय को हम महत्व देते हैं। वर्तमान में हम कोई खतरा नहीं देख रहे हैं, भारतीय वाणिज्य दूतावासों को बंद करने पर ऐसी कोई बातचीत नहीं हो रही है।'

तालिबान से दोस्ती अच्छी नहीं
उन रिपोर्टों पर जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान तालिबान का समर्थन कर रहा है, प्रतिक्रिया देते हुए फरीद ने आगे कहा, हमने बार-बार कहा कि जो क्वेटा को लेकर रिपोर्ट सामने आई थी जिसमें कहा गया है लीडरशिप (तालीबान की) क्वेटा, पेशावर में है। उनके परिवार वहां है...तो वो सपोर्ट नेटवर्क अगर नहीं होता इस हद तक हालात खराब नहीं होते। पाकिस्तानी कवि फराज ने एक कविता में कहा है कि 'बारिशों से तेरी दोस्ती अच्छी नहीं फराज, कच्चा तेरा मकान है कुछ तो ख्याल कर'...तो इन बारिशों (तालिबान) से दोस्ती अच्छी नहीं है, आज हम इस तरह के हालात से सामना कर रहे हैं, कल शायद उनकी (पाकिस्तान) भी नौबत आ जाए।
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