Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

चीन के साथ आर-पार की लड़ाई के मूड में आया अमेरिका, लगा सकता है कई प्रतिबंध, क्या भारत साथ देगा?

अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, व्हाइट हाउस अपने एशिया और यूरोपीय सहयोगियों के बीच चीन पर प्रतिबंध लगाने के लिए कॉर्डिनेट कर रहे हैं और अपने सभी सहयोगियों को एक पृष्ट पर लाने की कोशिश कर रहा है।

वॉशिंगटन/बीजिंग, सितंबर 14: अमेरिका और चीन के बीच का तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है और अब ऐसी रिपोर्ट आ रही है, कि अमेरिका चीन के खिलाफ कई सख्त प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका प्रतिबंधों का एक पैकेज तैयार कर रहा है, जो चीन के खिलाफ लगाए जा सकते हैं और इस पैकेज में अलग अलग तरह के कई प्रतिबंध शामिल होंगे। इसके साथ ही यूरोपीय संघ भी ताइवान के दबाव में आकर चीन के खिलाफ प्रतिबंध लगाने का विचार कर रहा है और अगर अमेरिका और यूरोपीय संघ ऐसा करता है, तो फिर चीन के खिलाफ ये बहुत बड़ा एक्शन होगा और इसके कई जियो-पॉलिटिकल प्रभाव होंगे।

ताइवान को बचाने की कोशिश

ताइवान को बचाने की कोशिश

सूत्रों के मुताबिक, ताइवान पर चीन के हमले की आशंका को देखते हुए अमेरिका और ताइवान अलग अलग तरीके से यूरोपीय संघ से प्रतिबंध लगाने की पैरवी कर रहा है, हालांकि, अभी जो बातचीत चल रही है, वो प्रारंभिक चरण में है और प्रतिबंधों के इस पैकेज को चीनी आक्रमण की आशंकाओं की प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है, जिसके तहत चीन ने ताइवान जलडमरूमध्य में सैन्य तनाव काफी ज्यादा बढ़ा दी है और माना जा रहा है, कि निकट भविष्य में चीन किस भी कीमत पर ताइवान पर हमला करेगा ही। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, कंप्यूटर चिप्स और दूरसंचार उपकरण जैसी संवेदनशील प्रौद्योगिकियों में चीन के साथ कुछ व्यापार और निवेश को प्रतिबंधित करने के लिए पश्चिम में पहले से किए गए उपायों से अलग तरह के प्रतिबंधों को लगाने पर विचार किया जा रहा है।

क्या व्यावहारिक होंगे प्रतिबंध?

क्या व्यावहारिक होंगे प्रतिबंध?

हालांकि, सूत्रों ने यह ब्योरा नहीं दिया है, कि चीन के खिलाफ किन तरह के प्रतिबंध लगाने पर विचार किए जा रहे हैं, लेकिन सवाल उठ रहे हैं, कि विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और दुनिया के सबसे बड़े सप्लाई चेन वाले देश के खिलाफ अगर प्रतिबंध लगाए जाते हैं, तो वो कितने व्यावहारिक होंगे और क्या चीन के खिलाफ प्रतिबंध वाकई असरदार होंगे? अमेरिकी वाणिज्य विभाग के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी नाज़क निकख़्तर ने कहा कि, "चीन पर प्रतिबंध लगाने की संभावना रूस पर प्रतिबंधों की तुलना में कहीं अधिक जटिल अभ्यास है, क्योंकि अमेरिका और सहयोगियों का चीनी अर्थव्यवस्था के साथ व्यापक संबंध है।" चीन ने ताइवान को अपने क्षेत्र के रूप में दावा किया हुआ है और पिछले महीने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी ने ताइपे का दौरा करने के बाद द्वीप पर मिसाइलें तक दागीं थीं और अपने अनौपचारिक समुद्री सीमा के पार युद्धपोतों को रवाना किया था। बीजिंग ने नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा को एक उकसावे के तौर पर देखा था।

ताइवान पर शी जिनपिंग का वादा

ताइवान पर शी जिनपिंग का वादा

आपको बता दें कि, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लोकतांत्रिक रूप से शासित ताइवान को बीजिंग के नियंत्रण में लाने का वादा किया हुआ है और वो साफ कर चुके हैं, कि ताइवान को चीन में मिलाने के लिए वो बल प्रयोग करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। वहीं, शी जिनपिंग अगले महीने कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस की बैठक में लगातार तीसरी बार देश का राष्ट्रपति बनने के लिए अपनी दावेदारी पेश करेंगे और माना जा रहा है, कि शी जिनपिंग अब और भी ज्यादा शक्तिशाली हो जाएंगे और उन्होंने तीसरी बार राष्ट्रपति बनने के लिए अपने सभी घरेलू विरोधियों को निपटा दिया है और माना जा रहा है, कि तीसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद शी जिनपिंग काफी तेजी से ताइवान के खिलाफ आक्रामक रूख अपना सकते हैं, जिसमें ताइवान पर आक्रमण करना भी शामिल है। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि, इस साल फरवरी में ही यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद चीन के खिलाफ भी प्रतिबंध लगाने का विचार शुरू किया गया था, लेकिन नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद चीन ने जिस तरह से आक्रामकता दिखाई है, उसके बाद तत्काल प्रतिबंध लगाने पर विचार किए जा रहे हैं। हालांकि, अमेरिका और सहयोगी देशों ने रूस के खिलाफ भी प्रतिबंध लगाए थे, जिसके बाद भी पुतिन आक्रमण करने से पीछे नहीं हटे।

सहयोगियों को विश्वास में लाने की कोशिश

सहयोगियों को विश्वास में लाने की कोशिश

व्हाइट हाउस अपने एशिया और यूरोपीय सहयोगियों के बीच चीन पर प्रतिबंध लगाने के लिए कॉर्डिनेट कर रहे हैं और अपने सभी सहयोगियों को एक पृष्ट पर लाने की कोशिश कर रहा है। इसकी जानकारी अलजदजीरा को एक गैर-अमेरिकी अधिकारी ने दिया है। वहीं, समाचार एजेंसी रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, अभी तक ये साफ नहीं हो पाया है, कि अमेरिकी प्रतिबंध में क्या क्या शामिल होंगे, लेकिन कुछ विश्लेषकों ने सुझाव दिया है,चीन की सेना पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज में क्रेग सिंगलटन ने कहा कि, बड़ी तस्वीर ये हो सकती है, कि शुरूआती प्रतिबंधों में उन तकनीकों को शामिल किया जा सकता है, जिनका इस्तेमाल चीन की सेना ताइवान पर हमला करने में इस्तेमाल कर सकती है।

किसी भी पक्ष ने नहीं की टिप्पणी

किसी भी पक्ष ने नहीं की टिप्पणी

हालांकि, व्हाइट हाउस ने इसपर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। वहीं, ताइवान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि, उसने चीन के हालिया युद्ध की धमकियों और "बड़ी चुनौतियों" पर चर्चा की है, चीन ने ताइवान और इस क्षेत्र को अमेरिका, यूरोप और अन्य समान विचारधारा वाले भागीदारों के साथ पेश किया, लेकिन विवरण का खुलासा नहीं किया गया। वहीं, चीन के विदेश मंत्रालय और वाशिंगटन में चीनी दूतावास ने भी पूछे गये सवाल का जवाब नहीं दिया है।

भारत का क्या होगा रूख?

भारत का क्या होगा रूख?

चीन पर प्रतिबंध लगाने से पहले अमेरिका अपने सहयोगी देशों से कॉर्डिनेशन बनाने पर काम कर रहा है, लेकिन सवाल ये उठ रहे हैं, कि अगर अमेरिका चीन पर प्रतिबंधों का ऐलान करता है, तो क्या भारत इसका समर्थन करेगा या फिर भारत चीन को लेकर भी रूस वाला ही रूख अपनाएगा। रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद जब भारत से सवाल पूछा गया था, तो भारत ने साफ कर दिया था, कि वो प्रतिबंधों पर विश्वास नहीं करता है, लेकिन रूस भारत का दोस्त था और चीन के साथ भारत लगातार संघर्ष में फंसा हुआ है और अगर चीन पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं, तो निश्चित तौर पर भारत के लिए ये एक अच्छी खबर होगी, लेकिन क्या ऐसी स्थिति में भारत भी अमेरिका के साथ जाकर प्रतिबंधों का पालन करेगा, या फिर चीन के साथ भारत का कारोबार पहले की ही तरह चलता रहेगा, ये एक बड़ा सवाल है। भारत और चीन के बीच का व्यापार इसी साल 100 अरब डॉलर को पार कर चुका है और कई एक्सपर्ट्स का मानना है, कि भारत अगर प्रतिबंध का साथ देता है, तो भारत पर भी असर पड़ सकता है, लिहाजा भारत सरकार जो भी फैसला लेगी, वो काफी सोच-समझकर ही लेगी।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+