'चीन-अमेरिका मिलकर पाकिस्तान में आतंक की फैक्ट्री को खत्म करेंगे'
नई दिल्ली। पाकिस्तान और अमेरिका के बीच जिस तरह से पिछले कुछ दिनों में तनातनी बढ़ी है उसने दोनों देशों के बीच के रिश्तें में दरार डाल दी है। दोनों देशों के बीच तनातनी के बीच अब चीन अमेरिका के साथ मिलकर आतंकवाद के मुद्दे पर काम करने के लिए आगे आया है। व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चीन ने अमेरिका के आतंकवाद की पाकिस्तान के साथ आतंकवाद को लेकर तनातनी पर चिंता जाहिर की है, अमेरिका अब चीन व अन्य देशों के साथ मिलकर आतंकवाद के मुद्दे पर काम करना चाहता है। ट्रंप सरकार पाकिस्तान में आतंक को दी जाने वाली पनाह को खत्म करना चाहता है, जिससे अफगानिस्तान में शांति आ सके। ऐसे में अमेरिका को इस बात का भरोसा है कि इस काम में चीन अमेरिका की मदद करेगा ताकि इस क्षेत्र से आतंकवाद की समस्या को खत्म किया जा सके। यही नहीं अमेरिका को इस बात का भरोसा है कि चीन पाकिस्तान को यह समझाने में भी सफल होगा कि आतंकवाद को खत्म करने उसके ही हित में होगा।

चीन की भूमिका अहम
पाकिस्तान का चीन के साथ संबंध काफी लंबे समय से बेहतर रहा है, ना सिर्फ सैन्य बल्कि आर्थिक क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच संबंध काफी बेहतर रहा है, इसी कड़ी में चाइना-पाकिस्तान इकॉनोमिक कोरिडोर पर भी दोनों देश काम कर रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जिस तरह से अमेरिका ने आतंकवाद पर अपना रुख अख्तिरायर किया है उसपर चीन ने अपनी चिंता जाहिर की है, अमेरिका इस इलाके में अन्य लोगों के साथ मिलकर आतंकवाद को खत्म करना चाहता है, जिसमे से चीन एक अहम सदस्य हो सकता है। आतंकियों को पनाह देने के साथ खड़ा होना चीन के पक्ष में नहीं है। अधिकारियों का मानना है कि चीन ने अफगानिस्तान व पाकिस्तान के बीच रिश्ते को बेहतर करने में अपनी अहम भूमिका निभाई है।

पाकिस्तान में आतंक के शरण स्थल को खत्म करना जरूरी
व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इस मसले पर चीन लगातार अहम भूमिका निभाता आया है, हमे इस बात का भरोसा है कि चीन पाकिस्तान को यह समझाने में सफल रहेगा कि आतंकियों को पनाह नहीं देना उसके लिए ही फायदे का सौदा है। चीन भी अफगानिस्तान में शांति के लिए लगातार काम कर रहा है, लेकिन सबसे बड़ा मुद्दा है कि आखिर कैसे पाकिस्तान में चल रहे आतंकियों की शरणस्थली को खत्म किया जाए।

दक्षिण एशिया में शांति जरूरी
पाकिस्तान और चीन के बीच रिश्ते पहले से ही काफी बेहतर रहे हैं, ऐसे में जिस तरह से अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली 2 बिलियन यूएस डॉलर की मदद को रोकने का फैसला लिया है उसके बाद पाकिस्तान चीन की ओर और आगे बढ़ेगा। व्हाइट हाउस के अधिकारी का कहना है कि चीन व पाकिस्तान के बीच संबंध काफी मजबूत रहे हैं, लेकिन बड़ी बात यह है कि पाकिस्तान चीन और अमेरिका दोनों के साथ अपने संबंध बेहतर रखना चाहता है, लेकिन इसके साथ ही चीन भी दक्षिण एशिया में आतंकवाद को खत्म करने के लिए प्रयासरत है।

आतंक के नेटवर्क का खात्मा जरूरी
अमेरिकी अधिकारी का कहना है कि चीन अफगानिस्तान में स्थिरता लाने के लिए प्रतिबद्ध है और वह अफगानिस्तान व पाकिस्तान के बीच संबंध को बेहतर करने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे में अगर वह इस क्षेत्र में शांति लाना चाहता है तो उन्हें पाकिस्तान में चल रहे हक्कानी व तालिबान नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में काम करना होगा जो पाकिस्तान के लिए भी काफी अहम है।












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