AMCA: तुर्की और सीरिया के रास्ते पर चलेगा भारत? क्या Tejas MK2 Fighter Jet के लिए करेगा दोस्त देशों से डील?

AMCA Project: भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के प्रमुख अमर प्रीत सिंह ने हाल ही में भारत में बनने वाले फाइटर जेट्स के उत्पादन दिखने वाली सुस्ती पर दुख जताया है, जिसके बाद पूर्व वायुसेना दिग्गजों ने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू जेट (Fifth Generation Fighter Jets) को विकसित करने के लिए एक "जोखिम साझा करने वाले" भागीदार को लाने का सुझाव दिया है।

एयर मार्शल एम. माथेस्वरन (रिटायर्ड), जिन्होंने मल्टी रोल फाइटर जेट (MMRCA) पर काम किया है और रूस के साथ पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान (FGFA) पर बातचीत की है, उनका सुझाव है, कि भारत को एक "जोखिम साझा करने वाले" भागीदार को शामिल करना चाहिए।

amca project fifth generation fighter jets

माथेस्वरन के मुताबिक, भारत को अधिकतम लाभ हासिल करने के लिए एक साथ दो या तीन देशों के साथ सौदेबाजी करनी चाहिए। माथेस्वरन ने यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा है, कि "हमें एक भागीदार चुनना होगा। हमें AMCA (एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के लिए एक जोखिम साझा करने वाले भागीदार की आवश्यकता है और कोई ऐसा कोई, जो LCA Mk2 के डेवलपमेंट में आ रही देरी को भर सके, उसके साथ साझेदारी करनी चाहिए।

क्या स्वीडिश कंपनी SAAB की दी जानी चाहिए जिम्मेदारी? (SAAB single-engine Gripen E Fighter Jet Deal)

उनके मुताबिक, "स्वीडिश साब (SAAB) जैसी फाइटर जेट बनाने वाली कंपनियां इस जिम्मेदारी को संभालने के लिए तैयार हो सकती हैं।" साब अपने बहु-भूमिका लड़ाकू विमान (MRFA) प्रोग्राम के तहत भारत को आक्रामक रूप से विमान पेश कर रहा है, रिकॉर्ड समय में डिलीवरी का वादा कर रहा है। साब ने कहा कि वह कॉन्ट्रैक्ट मिलने के तीन साल के भीतर भारतीय वायुसेना को पहला ग्रिपेन-ई/एफ विमान (Gripen-E/F aircraft) सौंप देगा।

कंपनी पहले से ही भारत में फाइटर जेट बनाने की संभावनाओं पर विचार कर रही थी, ताकि देश में लेटेस्ट फाइटर जेट की टेक्नोलॉजी का ट्रांसफर किया जा सके, इस प्रकार स्वदेशी लड़ाकू उत्पादन के लिए भारतीय वायुसेना की आकांक्षाओं को पूरा किया जा सके।

बदले में, साब ने भारत में पूर्ण पैमाने पर फाइटर जेट्स के उत्पादन की पेशकश की है, जिसमें एयरफ्रेम से लेकर सिस्टम और सॉफ्टवेयर तक सब कुछ शामिल है। प्लेटफॉर्म को तेजी से स्वदेशी बनाने की योजनाएं चल रही हैं। इसके मामले में जो बात मदद करती है, वह यह है कि सिंगल-इंजन ग्रिपेन ई सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में से एक है। एयर मार्शल माथेस्वरन, न सिर्फ एमआरएफए अनुबंध पर बल्कि एएमसीए पर सहयोग करने पर भी विचार कर रहे हैं।

पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को लेकर क्या हैं विकल्प? (India Fifth Generation Fighter Jet)

फिलहाल दुनिया में सिर्फ तीन देशों के पास ही पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर हैं- चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस। तुर्की भी अजरबैजान के साथ सहयोग कर रहा है, और 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट KAAN के डेवलपमेंट के लिए पाकिस्तान को शामिल करने पर बात कर रहा है।

जबकि, KAI KF-21 Baromae एक दक्षिण कोरियाई और इंडोनेशियाई एडवांस बहुउद्देशीय विमान है, जिसे 2026 में सेवा में लाने का लक्ष्य रखा गया है। पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के निर्माण में भारी भरकम खर्च आता है और प्रोजेक्ट अगर फेल होता है, तो उस नुकसान की भरपाई करना आसान नहीं होता है, इसीलिए ये दोनों देश भी अकेले निर्माण में नहीं गये हैं और इसीलिए डिफेंस एक्सपर्ट्स सुझाव दे रहे हैं, कि भारत को भी किसी पार्टनर की तलाश करनी चाहिए।

एयर मार्शल माथेस्वरन का सुझाव है, कि अकेले संघर्ष करने के बजाए टेक्नोलॉजिकल डेलवलपमेंट्स में तेजी लाने और अर्थव्यवस्था में सुधार करने के लिए नए भागीदारों के साथ सहयोग करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

माथेस्वरन ने सुझाव दिया है, कि भारत को अमेरिकी फाइटर जेट F-21 के अधिग्रहण से बचना चाहिए, जो कि F-16 का री-पैकेज्ड वेरिएंट है, जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान करता है। माथेस्वरन ने कहा, "मेरा सुझाव है कि F-21 पर ध्यान न दें। यह एक F-16 है, 50 साल पुराना डिजाइन है, और आप हमें सिर्फ नए एवियोनिक्स लगाकर नहीं बेच सकते। यह न तो रणनीतिक और न ही इंडस्ट्री के मकसदों को पूरा करेगा। भारत को भविष्य की ओर देखना चाहिए।"

फिर भी, माथेस्वरन का मानना ​​है कि भारत को अपने विकल्प खुले रखने चाहिए और एक साथ 2-3 देशों के साथ बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा, "जो हमारी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए तैयार हैं, उन्हें भारत में आकर निर्माण करने के लिए कहा जाना चाहिए। हमारी इंडस्ट्री को बढ़ावा देने और अत्यधिक कुशल कार्यबल प्राप्त करने का कोई और तरीका नहीं है।"

भारत के पास दिक्कत ये है, कि स्वदेशी लड़ाकू विमानों के अधिग्रहण में देरी और धीमी गति से डेवलपमेंट के कारण भारतीय वायुसेना के पास भारतीय हवाई क्षेत्र की रक्षा के लिए पुराने लड़ाकू विमानों की संख्या कम होती जा रही है। यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय वायुसेना के पास अब लड़ाकू विमानों की तुलना में सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की संख्या ज्यादा है।

उनका तर्क है कि सबसे पहले, हमें यह स्वीकार करना होगा कि भारत और चीन के बीच क्षमता का अंतर बहुत बड़ा है, और इसे "दीर्घकालिक रणनीतिक फोकस" के माध्यम से पाटा जा सकता है।

भारत के लिए क्यों बज रहा है खतरे का अलार्म? (China Stealth 5th Generation Fighter Jet)

मथेश्वरन कहते हैं, "सबसे पहले, हमें इसे मानना होगा और रिसर्च में इन्वेस्टमेंट करना होगा। चीन के 6वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोटोटाइप के दिखने के बाद सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया है। लेकिन अगर आप LCA MK2 प्रोजेक्ट को खत्म करते हैं, तो यह HF-24 मारुत की कहानी को दोहराना होगा। इसे जारी रहना चाहिए। LCA Mk2 को बनाना चाहिए। इंजन का काम जारी रहना चाहिए।"

पूर्व IAF वाइस चीफ एयर मार्शल अनिल खोसला ने भी LCA MK2 के निर्माण की आवश्यकता पर सहमति जताई है। जब उनसे पूछा गया, कि क्या इंडियन एयरफोर्स को 4+ पीढ़ी के विमान खरीदने की योजना को छोड़ देना चाहिए और इसके बजाय पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को चुनना चाहिए, तो एयर मार्शल अनिल खोसला (सेवानिवृत्त) ने यूरेशियन टाइम्स से कहा, "नहीं, हमें इसे नहीं छोड़ना चाहिए। समय की तत्काल आवश्यकता है, कि हम लड़ने की अपनी क्षमता और अपनी लड़ाकू ताकत को बढ़ाएं। हमें अंतर को भरने, परियोजना में तेजी लाने, तेजस एमके-1ए और एमके-2 के उत्पादन दर को बढ़ाने और एएमसीए प्रोजेक्ट में तेजी लाने के लिए एमआरएफए डील प्रक्रिया के तहत विमान खरीदने की जरूरत है।"

जब उनसे पूछा गया, कि क्या ग्रिपेन सबसे बेहतरीन होगा, तो एयर मार्शल खोसला ने कहा, कि "मैं पहले से ही परीक्षण किए गए और शामिल किए गए राफेल विमानों (चरणों में) के लिए जाने की सलाह देता हूं। एक और प्रकार के विमान को जोड़ने से पहले से ही विविधतापूर्ण इन्वेंट्री में इजाफा होगा। ज्यादातर दावेदार सूचीबद्ध लाभ (टीओटी, मेक इन इंडिया, आदि) प्रदान करते हैं। इन प्रस्तावों की सीमा का आकलन करने की आवश्यकता है। हालांकि, अगर सौदा आकर्षक है और पैसे के लिए अधिकतम लाभ प्रदान करता है, तो ग्रिपेन के लिए जाएं।"

भारत के पास फिलहाल फाइटर जेट्स की काफी कमी हो गई है, जिसने देश की सुरक्षा पर ही सवाल उठा दिए हैं और भारत ऐसे फाइटर जेट्स की तलाश में हो, जो मेक इन इंडिया के मकसदों को भी पूरा कर सके। AMCA को लेकर इंडस्ट्री का कहना है, कि इसके निर्माण में कम से कम 10 सालों का और वक्त लगेगा, लेकिन तबतक अगर भारत को एक साथ चीन और पाकिस्तान से लड़ना पड़ जाए, तो स्थिति मुश्किल हो सकती है।

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