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Alibaba की फेस रिकॉग्निशन तकनीक उइगर मुसलमानों के लिए खतरा, ऐसे बन सकते हैं निशाना

नई दिल्ली। Alibaba facial recognition technology चीनी टेक दिग्गज अलीबाबा ग्रुप ने फेस रिकॉग्निशन तकनीक चीन में उइगर मुसलमानों (Uighur Muslims in China) के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। इस तकनीक के इस्तेमाल के जरिए उइगर मुसलमानों पर चीन की सरकारी एजेंसियां नजर रख सकती हैं।

चीन में उइगर मुसलमानों की होती है निगरानी

चीन में उइगर मुसलमानों की होती है निगरानी

यूएस के रिसर्च संस्थान IVPM ने बुधवार को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ये सॉफ्टवेयर के माध्यम से अलीबाबा की क्लाउड सर्विस पर जाने वाले उइगर मुसलमानों की पहचान की जा सकेगी।

ये रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब चीन पर आरोप है कि उसने 10 लाख से अधिक उइगर मुसलमानों को खास तरह के कैंप में रखा हुआ है। इन शिविरों से बाहर निकले लोग और मानवाधिकार समूह इनकी तुलना यातना शिविरों से करते हैं। वहीं चीन इस तरह के आरोपों को नकारता है। उसका कहना है कि इन शिविरों में लोगों को रोजगार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। चीन के मुताबिक यहां लोगों की रखने की एक और वजह शिनजियांग प्रांत में इस्लामी चरमपंथ का प्रभाव भी है।

क्या है अलीबाबा की क्लाउड शील्ड ?

क्या है अलीबाबा की क्लाउड शील्ड ?

वहीं कम्युनिष्ट सरकार की सख्ती से बचने के लिए चीनी इंटरनेट फर्में काफी सावधानी बरतती हैं। ऑनलाइन स्ट्रीमिंग पर सरकार की तेज नजर के चलते ज्यादा इंटरनेट दिग्गज खुद ही सेंसर करते हैं ताकि किसी तरह की परेशानी न हो। पिछले महीने की चीनी प्रशासन ने लाइवस्ट्रीमिंग पर नजर रखने के लिए कानून बनाया था।

अलीबाबा ने बताया था कि उसकी क्लाउड शील्ड एक ऐसी प्रणाली है जो "अश्लील साहित्य, राजनीति, हिंसक आतंकवाद, विज्ञापनों और स्पैम से संबंधित पाठ, चित्रों, वीडियो और आवाज़ों का पता लगाकर उनकी पहचान करती है। इसके साथ ही उनका सत्यापन, अंकन, कस्टम कॉन्फ़िगरेशन जैसी अन्य क्षमताएं भी इसमें हैं।"

उइगरों की जातीय पहचान का लगाया जा सकता है पता

उइगरों की जातीय पहचान का लगाया जा सकता है पता

रिसर्च के मुताबिक इस तकनीक से किसी की आंखों की बनावट और मुस्कान से उसकी जातीय (Ethinic) पहचान का पता लगाया जा सकता है। चीन में पहले से ही निगरानी में रह रहे उइगर लोगों के लिए इसका खतरा और ज्यादा है क्योंकि उनके चेहरे की बनावट दूसरे चीनी समुदाय से अलग है।

इसे ऐसे समझा जा सकता है कि अगर कोई उइगर किसी वेबसाइट पर लाइव स्ट्रीमिंग करना शुरू करता है तो क्लाउड शील्ड उसके चेहरे को स्कैन करके ये बता सकता है कि ये कंटेंट उइगर द्वारा भेजा जा रहा है। इसके बाद इसे रोका या हटाया जा सकता है। यह एक तरह पर इंटरनेट पर उइगर लोगों पर निगरानी को बढ़ाएगा।

IVPM ने कहा कि उसकी रिपोर्ट सामने आने के बाद सॉफ्टवेयर से उइगर शब्द को हटा दिया गया है। वहीं अलीबाबा ने कहा कि इसका उपयोग अभी प्रयोगात्मक रूप से ही किया गया है।

क्लाउड कम्प्यूटिंग की दिग्गज है अलीबाबा

क्लाउड कम्प्यूटिंग की दिग्गज है अलीबाबा

क्लाउड कम्यूटिंग की दुनिया में अलीबाबा चीन के सबसे बड़ी जबकि दुनिया में ये चौथे नंबर की टेक दिग्गज है। अलीबाबा न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज और हॉंग-कॉंग स्टॉक एक्सचेंज दोनों जगह लिस्ट है। इस महीने की शुरुआत में ही अमेरिकी सांसदों ने इंटेल कॉर्प्स और एनवीडिया कॉर्प को उइगरों की निगरानी को लेकर नोटिस भेजा था। एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था इन कंपनियों के कम्यूटर चिप्स का इस्तेमाल उइगरों की निगरानी में किया गया था।

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