Video: Ali Khamenei को भारत का आखिरी सलाम, सभी धर्मों के लोगों ने दी श्रद्धांजलि, देखती रही दुनिया
Ali Khamenei Funeral: ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई को आखिरी सलाम देने के लिए भारत का एक हाई लेवल प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंच गया है। इस डेलिगेशन में केंद्र सरकार के सीनियर ऑफीसर, विपक्ष के बड़े नेता और अलग-अलग धर्मों के धर्मगुरु शामिल हैं। भारत का यह कदम दोनों देशों के मजबूत और रणनीतिक रिश्तों का संकेत माना जा रहा है।
कौन कर रहा है भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई?
भारतीय प्रतिनिधिमंडल की सह-अगुवाई विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन कर रहे हैं। तेहरान पहुंचकर उन्होंने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की और हालिया क्षेत्रीय संघर्षों से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। भारत ने इस मौके पर एक बार फिर पश्चिम एशिया में शांति की अपील की।

विपक्षी नेताओं को भी मिली जगह
इस प्रतिनिधिमंडल की सबसे बड़ी खासियत इसकी विविधता है। भारत ने केवल सरकार के प्रतिनिधियों को ही नहीं, बल्कि विपक्ष के नेताओं को भी इसमें शामिल किया है। डेलिगेशन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद तथा जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती भी शामिल हैं। इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि विदेश नीति के अहम मुद्दों पर भारत एकजुट होकर खड़ा है।
सभी धर्मों के प्रतिनिधियों को किया गया शामिल
भारत की धर्मनिरपेक्ष और डायवर्सिफाइड पहचान को दिखाने के लिए इस प्रतिनिधिमंडल में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदायों के प्रमुख धर्मगुरुओं और विद्वानों को भी जगह दी गई है। इससे दुनिया के सामने भारत की विविधता और समावेशी सोच को पेश करने की कोशिश की गई है।
5 से 7 जुलाई तक होंगे राजकीय कार्यक्रम
ईरान सरकार के कार्यक्रम के मुताबिक, 5 जुलाई से 7 जुलाई के बीच राजधानी तेहरान और पवित्र शहर कौम में अयातुल्ला अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को आम लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इस दौरान कई राजकीय शोक सभाएं भी आयोजित होंगी।
9 जुलाई को मशहद में होगा अंतिम संस्कार
तीन दिनों के शोक कार्यक्रम के बाद 9 जुलाई को खामेनेई के गृह नगर मशहद में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस दौरान लाखों लोगों और कई विदेशी प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है ईरान?
भारत और ईरान के रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं। ऊर्जा सुरक्षा, चाबहार बंदरगाह का विकास और मिडिल ईस्ट तक पहुंच जैसे कई रणनीतिक मामलों में दोनों देशों की साझेदारी काफी अहम मानी जाती है। इसलिए भारत की इस यात्रा को केवल शोक व्यक्त करने तक सीमित नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम भी माना जा रहा है।
अता हसनैन ने साझा की जानकारी
लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने और मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने आधिकारिक तौर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने कहा कि इस दुख की घड़ी में भारत की सरकार और जनता ईरान के लोगों के साथ खड़ी है।
महबूबा मुफ्ती ने क्या कहा?
प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहीं महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अयातुल्ला अली खामेनेई एक ऐसे नेता थे जिन्होंने वैश्विक स्तर पर वंचित और कमजोर लोगों की आवाज उठाई। उन्होंने उनके निधन को पूरे क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति बताया और ईरान के प्रति संवेदना व्यक्त की।
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