तालिबान के कारण 27 लाख लोग बन गए 'रिफ्यूजी', भुखमरी की कगार पर पहुंचा अफगानिस्तान!
पिछले अगस्त में तालिबान के अधिग्रहण के बाद शरण लेने के लिए पड़ोसी देशों में जाने वाले कई अफगान शरणार्थियों को अत्याचारों का सामना करना पड़ा क्योंकि कईयों के पास कानूनी दस्तावेज या वीजा नहीं थे।
काबुल 27 जुलाई: अफगानिस्तान में तालिबान के आने के बाद से देश की स्थिति चरमरा सी गई है। पहले तो वहां महिलाओं,लड़कियों से जुड़े मानवाधिकारों को खत्म कर दिए गए। अब खबर है कि,अफगान नागरिक देश छोड़कर (after Taliban takeover numerous Afghans drifted away from Afghanistan) भाग रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के देशो में अब तक 27 लाख अफगान शरणार्थी 98 देशों में फैल गए हैं। 27 लाख लोगों के पलायन के साथ अफगानिस्तान दुनिया के तीसरे बड़े शरणार्थियों की लिस्ट में शामिल हो गया है।

क्या कहती है यूएनएचआरसी की रिपोर्ट
इस विषय पर संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त (UNHRC) की रिपोर्ट में बताया गया है कि, अफगानिस्तान में विस्थापित नागरिकों का एक बड़ा समूह शामिल है, जो कभी-कभी सीरियाई और वेनेजुएला के शरणार्थियों के साथ सीमा पार करने के लिए मजबूर होते हैं। खामा प्रेस के मुताहिक, ईरान ने तालिबान के अत्याचारों के कारण देश छोड़क भागे 7 लाख 80 हजार से अधिक पंजीकृत अफगान नागरिकों को शरण दिया है। यूएनएचसीआर की रिपोर्ट में शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त फिलिपो ग्रांडी के हवाले से कहा गया है, 'अफगानिस्तान का विस्थापन संकट यूएनएचसीआर के सात दशक के इतिहास में सबसे बड़ा और सबसे लंबा है। अब हम निर्वासन में पैदा हुए अफगान बच्चों की तीसरी पीढ़ी को देख रहे हैं।'

देश छोड़कर भाग रहे अफगान नागरिक
खामा प्रेस ने रिपोर्ट के हवाले से बताया कि अकेले 2021 में, 108,000 अफगान नागरिक भागकर पाकिस्तान चले गए। रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान के डर से 59,000 अफगान नागरिक यूरोप, 27,000 ईरान और 6,000 एशिया और प्रशांत क्षेत्र को पलायन कर गए। UNHRC के मुताबिक, अफगानिस्तान में तालिबान के कारण उत्पन्न संकट के बीच लगभग 24 मिलियन लोग भुखमरी के शिकार हो गए। अफगान नागिरक भुखमरी, देश में आर्थिक मंदी, बाढ़, भूकंप, सूखा और अकाल,भयंकर ठंड जैसी प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित हैं और उन्हें तत्काल राहत की आवश्यकता है।

तालिबान कर रहे अफगान नागरिकों पर अत्याचार
विशेष रूप से, पिछले अगस्त में तालिबान के अधिग्रहण के बाद शरण लेने के लिए पड़ोसी देशों में जाने वाले कई अफगान शरणार्थियों को अत्याचारों का सामना करना पड़ा क्योंकि कईयों के पास कानूनी दस्तावेज या वीजा नहीं थे। पिछले साल अगस्त में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से, अफगानिस्तान की स्थिति केवल खराब ही नहीं हुई है बल्कि गंभीर मानवाधिकारों का उल्लंघन बेरोकटोक जारी है।

तालिबान राज में लोग मारे जा रहे हैं
बता दें कि, मानवाधिकार के लिए उच्चायुक्त (एचसीएचआर), मिशेल बाचेलेट की एक रिपोर्ट में,पिछले साल अगस्त में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पर प्रकाश डाला गया था। बाचेलेट ने कहा था कि, 15 अगस्त 2021 के बाद कम से कम 1156 नागरिक मारे गए थे और भारी संख्या में लोग घायल हुए थे। उन्होंने कहा था कि, देश में मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि अफ़गानों को विनाशकारी मानवीय और आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें आधी आबादी भुखमरी से पीड़ित हैं।

महिलाओं के अधिकार खत्म कर दिए गए
महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के बारे में बात करते हुए, बाचेलेट ने आगे बताया कि तालिबान शासन ने महिलाओं के अधिकारों और स्वतंत्रता को खत्म कर दिया है, आर्थिक संकट और प्रतिबंधों के कारण महिलाओं को बड़े पैमाने पर नौकरी से हटा दिया गया है। उन्होंने तालिबान शासन से अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने का भी आह्वान किया कि इस साल सभी बच्चों के लिए स्कूल खुलेंगे, चाहे लड़के हों या लड़कियां। बता दें कि, तालिबान शासन ने लड़कियों की शिक्षा पर रोक लगा दी है।

अफगान नागरिकों के बारे में सोचने की जरूरत
इससे पहले, अफगान नागरिकों की हालत को देखते हुए यूएनएचआरसी ने यूरोपीय संघ से पांच सालों में 42,500 लोगों की अवस्था ठीक करने की बात कही थी, जिसका देशों ने विरोध किया था। तालिबान के अफगानिस्तान में आने के बाद से देश की हालात बद से बदतर हो गई है। देश के नागरिक घरों को छोड़कर भाग रहे हैं। कुल मिलाकर अफगानिस्तान के हालात दिन प्रतिदिन खराब होते जा रहे हैं।












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