पाकिस्तान के बाद दुश्मन चीन ने भी झटका हाथ, भारत को इस बैठक में रूस और ईरान का मिला साथ

नई दिल्ली ने कहा है कि, बैठक को लेकर सभी क्षेत्रीय देशों के बीच आम सहमति है, लेकिन इस बैठक को लेकर पाकिस्तान की 'समस्या का स्रोत' है।

नई दिल्ली, नवंबर 09: कहते हैं, पुराना दोस्त कभी साथ और हाथ नहीं छोड़ता है और रूस भी भारत का पुराना दोस्त ही है। अफगानिस्तान के मुद्दे पर भारत को पाकिस्तान से असहयोग की ही उम्मीद थी और वही उम्मीद चीन से भी थी और ऐसा ही हुआ है। पिछले हफ्ते पाकिस्तान के इनकार के बाद चीन ने भी नई दिल्ली में अफगानिस्तान के मुद्दे पर बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया है।

चीन ने दिया भारत को झटका

चीन ने दिया भारत को झटका

अफगानिस्तान मुद्दे पर पहली बार भारत सरकार ने नई दिल्ली में 10 नवंबर को बैठक का आयोजन किया है। ये बैठक एनएसए स्तर की होने वाली है। जिसमें पिछले हफ्ते पाकिस्तान के एनएसए मोइद युसूफ ने भाग लेने से इनकार कर दिया था और अब इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने भी क्षेत्रीय वार्ता में हिस्सा नहीं लेने के लिए"शेड्यूलिंग मुद्दों" का हवाला दिया है कि वह 10 नवंबर को अफगानिस्तान पर दिल्ली क्षेत्रीय सुरक्षा वार्ता में भाग नहीं लेगा।

बैठक में ये देश होंगे शामिल

बैठक में ये देश होंगे शामिल

पाकिस्तान के बाद चीन ने भी नई दिल्ली में होने वाली बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया है, लेकिन इस क्षेत्र के अन्य प्रमुख देश, रूस, ईरान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बैठक में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। अफगानिस्तान के मुद्दे पर भारत पहली बार बैठक का आयोजन कर रहा है और इस बैठक की अध्यक्षता भारत ने नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोवाल करेंगे, जिसमें भाग लेने के लिए रूस और ईरान की तरफ से हरी झंडी दे दी गई है। हालांकि, चीन ने इस बैठक में हिस्सा लेने से जरूर इनकार कर दिया है, लेकिन चीन ने भारत को संदेश दिया है कि, वो अफगानिस्तान के मुद्दे पर भारत के साथ द्विपक्षीय डिप्लोमेटिक बात करने के लिए तैयार है और दूसरे चैनलों के माध्यम से भी द्विपक्षीय वार्ता के लिए तैयार है।

बैठक का क्या है उद्येश्य

बैठक का क्या है उद्येश्य

इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि, नई दिल्ली में होने वाली इस बैठक में अफगानिस्तान पर तालिबान के अधिग्रहण से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए एक "क्षेत्रीय सुरक्षा आर्किटेक्चर" विकसित करने पर विचार करेगी। खास तौर पर अफगानिस्तान की सीमा के भीतर और सीमा के बाहर आतंकवाद, कट्टरता और उग्रवाद, सीमा पार मुवमेंट, नशीली दवाओं के उत्पादन और तस्करी, और अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा छोड़े गए हथियारों और उपकरणों के संभावित उपयोग पर चर्चा करना है। नई दिल्ली में कल होने वाली बैठक में ईरान के रियर एडमिरल अली शामखानी, रूस के एनएसए निकोलाई पी पात्रुशेव, कजाकिस्तान के करीम मासिमोव, किर्गिस्तान के मराट मुकानोविच इमांकुलोव, ताजिकिस्तान के नसरुलो रहमतजोन महमूदजोदा, तुर्कमेनिस्तान के चारीमिरत काकलयेवविच अमावोव और उज्बेकिस्तान के मखमुदोव शामिल होंगे।

पीएम मोदी से होगी मुलाकात!

पीएम मोदी से होगी मुलाकात!

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बात की उम्मीद की जा रही है कि इन सभी देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संयुक्त रूप से मुलाकात करेंगे। वहीं, भारत आने वाले इन प्रतिनिधियों का भारत के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल, जैसे अमृतसर और आगरा जाने का भी कार्यक्रम बन सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान से संबंधित सुरक्षा चिंताओं के साथ दिल्ली के दिमाग में तालिबान शासित अफगानिस्तान की "वर्तमान स्थिति और भविष्य के दृष्टिकोण" पर चर्चा आयोजित करना है। सूत्रों ने बताया कि बहुपक्षीय बैठक के अलावा सुरक्षा अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी होंगी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि, "उच्च स्तरीय वार्ता में अफगानिस्तान में हालिया घटनाओं से उत्पन्न क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करेगी"।

बैठक पर भारत का बयान

बैठक पर भारत का बयान

भारतीय विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में होने वाली इस बैठक को लेकर कहा है कि, ''भारत ने पारंपरिक तौर पर अफगानिस्तान के लोगों घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंधों का आनंद लिया है और अफगानिस्तान के सामने सुरक्षा और मानवीय चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक यूनाइटेड इंटरनेशनल रिएक्शन का आह्वान किया है और आने वाली बैठक में उसी दिशा में कदम उठाए जाने की उम्मीद है।" वहीं, पिछले हफ्ते इस्लामाबाद में पत्रकारों के साथ मुलाकात के दौरान पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद यूसुफ ने कहा था कि, वह नई दिल्ली में होने वाली बैठक में शामिल नहीं होंगे और उन्होंने कहा कि भारत के स्पष्ट संदर्भ में "एक बिगाड़ने वाला शांतिदूत नहीं हो सकता"।

''समस्या का स्रोत है पाकिस्तान''

''समस्या का स्रोत है पाकिस्तान''

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने कहा है कि, नई दिल्ली ने कहा है कि, बैठक को लेकर सभी क्षेत्रीय देशों के बीच आम सहमति है, लेकिन इस बैठक को लेकर पाकिस्तान की 'समस्या का स्रोत' है। सूत्रों ने कहा कि अफगानिस्तान पर पाकिस्तान की कार्रवाइयों और इरादों के बीच विश्वसनीयता का अंतर है। भारत सरकार के एक सूत्र ने कहा कि, ''पाकिस्तान का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन आश्चर्यजनक नहीं है। यह अफगानिस्तान को लेकर पाकिस्तान के खुद को संरक्षक के रूप में देखने की उसकी मानसिकता को दर्शाता है। पाकिस्तान इस प्रारूप की पिछली बैठकों में शामिल नहीं हुआ है। भारत के खिलाफ पाकिस्तानी मीडिया की टिप्पणियां अफगानिस्तान में उसकी घातक भूमिका से ध्यान भटकाने का एक असफल प्रयास है।'' सूत्रों के मुताबिक, देश का शीर्ष सुरक्षा प्रतिष्ठान राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय, इस सम्मेलन को आयोजित करने का बीड़ा उठा रहा है। सूत्रों ने कहा कि, ये बैठक पूरी तरह से सुरक्षा पर है और यह राजनयिक ट्रैक से पूरी तरह अलग है।

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