सीडीएस बिपिन रावत के निधन के बाद चीन ने दिखाई अपनी औकात, भारतीय सेना के खिलाफ उगला जहर

नई दिल्ली, 9 दिसंबर: हेलीकॉप्टर हादसे में सीडीएस बिपिन रावत और भारतीय सेना और वायु सेना के 11 जवानों और अफसरों की दर्दनाक मौत के बाद चीन ने अपना असली चेहरा दिखाना शुरू कर दिया है। चीन ने अपनी सरकारी मीडिया के जरिए भारत, भारत की सशस्त्र सेना को लेकर खूब जहर उगला है। चीन के डिफेंस एक्सपर्ट के हवाले से छापी गई प्रोपेगेंडा खबर में चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी की तुलना में भारतीय सशस्त्र सेना को नाचीज साबित करने का मंसूबा जाहिर किया गया है। चीन की सरकारी मीडिया रिपोर्ट ने एक्सपर्ट के जरिए जो भावना उगली हैं, उससे लगता है कि जनरल रावत और भारतीय सेना के बारे में वहां की सरकार और सेना में कितनी कुंठा भरी हुई है।

हेलीकॉप्टर हादसे पर चीन ने दिखाई औकात

हेलीकॉप्टर हादसे पर चीन ने दिखाई औकात

तमिलनाडु में भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर हादसे के एक दिन बाद चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने कुछ चाइनीज एक्सपर्ट के हवाले से भारत के खिलाफ अपनी भड़ास निकालने की कोशिश की है। चीन सरकार की मीडिया ने लिखा है कि 'हेलीकॉप्टर क्रैश में भारत के डिफेंस चीफ का निधन न सिर्फ भारतीय मिलिट्री में अनुशासन और युद्ध की तैयारी की कमी को उजागर करता है, बल्कि इससे देश की सेना के आधुनिकीकरण को भी भारी झटका लगा है, जो लंबे समय तक बना रह सकता है।' सीडीएस बिपिन रावत को लेकर चीन के विश्लेषकों में किस कदर खौफ बैठा हुआ था, उसकी एक बानगी देखिए, 'लेकिन भारत के चीन-विरोधी शीर्ष रक्षा चेहरे के चले जाने के बावजूद, दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों में चीन के प्रति देश (भारत) के आक्रामक रवैए में बदलाव की संभावना नहीं है।' यह बात विश्लेषकों के हवाले से लिखा गया है।

 भारतीय सेना को असमर्थ साबित करने की कोशिश में ड्रैगन

भारतीय सेना को असमर्थ साबित करने की कोशिश में ड्रैगन

इसमें एक भारतीय मीडिया पोर्टल का हवाला देकर लिखा गया है कि एमआई-17वी5 की दुर्घटना की वजह धुंध वाला मौसम, बिजली की उलझी हुई लाइन, तकनीकी खराबी या गलत ऊंचाई से चॉपर को नीचे लाने जैसे बातों की संभावना जताई गई है। फिर ग्लोबल टाइम्स लिखता है कि यह सभी संभावित कारण मानवीय कारणों की ओर इशारा कर रहे हैं, न कि रूस में बने हेलीकॉप्टर की, 'क्योंकि एमआई-17 सीरीज के चॉपर दूसरे देशों में भी काफी इस्तेमाल किए जाते हैं।' एक चीनी एक्सपर्ट वेई डोंग्शू ने जीटी से कहा है कि एमआई-17वी5 तो एमआई-17 का भी एडवांस वर्जन है, जिसमें ज्यादा पावरफुल इंजन लगे हैं और यह ज्यादा भरोसेमंद है। वेई अब यह तर्क देते हैं कि भारतीय सेना कई तरह के हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करती है, देसी-विदेशी, इसलिए 'उसे लॉजिस्टिक सपोर्ट और मेंटेंस में दिक्कत होती है।'

भारतीय सेना के खिलाफ चीन ने उगला जहर

भारतीय सेना के खिलाफ चीन ने उगला जहर

इसके बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का अखबार एक अज्ञात चाइनीज मिलिट्री एक्सपर्ट के हवाले से लिखता है, 'भारत को एक लचर और अनुशासनहीन सैन्य संस्कृति के लिए जाना जाता है, और भारतीय सैनिक अक्सर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसेड्योर और रेगुलेशन का पालन नहीं करते हैं।' उसके मुताबिक जिसके चलते 'भारत में पहले भी कई हादसे हो चुके हैं और सबकी वजह मानवीय गलतियां ही रही हैं।' एक और अज्ञात चीनी एक्सपर्ट का हवाला देकर लिखा गया है कि 'अगर मौसम ठीक होने का इंतजार किया गया होता, पायलट सावधानी से या कुशलता से उड़ा रहा होता या ग्राउंड मेंटेनेंस क्रू ने चॉपर को ठीक से मेंटेन किया होता तो हादसे को टाला जा सकता था।' लेकिन, इसके बाद यह कहकर कि 'इस दुर्घटना ने फिर से भारतीय सेना की जंग की तैयारियों की कमी को उजागर कर दिया है।' जहर उगलने की कोशिश की गई है।

भारत को धमकाने की कोशिश

भारत को धमकाने की कोशिश

जिस बात ने पिछले डेढ़ सालों से शी जिनपिंग की रात की नींदें उड़ा रखी हैं, वह ग्लोबल टाइम्स के जरिए कथित चीनी एक्सपर्ट के शब्दों के रूप में बाहर आ रहे हैं। जीटी लिखता है, 'यह चीन-भारत सीमा क्षेत्रों में तैनात भारतीय सैनिकों समेत पूरी भारतीय सेना की एक आम समस्या है, जो उकसावे वाला कदम उठाते रहते हैं, लेकिन अगर वास्तव में लड़ाई शुरू होती है तो चीनी सेना के खिलाफ कोई मौका नहीं मिलता है।' इसके बाद वेई ने दिवंगत सीडीएस बिपिन रावत को साधारण जनरल साबित करने की कोशिश में कहा है, 'रावत की भूमिका भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना में विरोधाभासों की मध्यस्थता करने और सेना को आधुनिक बनाने के लिए इन बलों को एकीकृत करने की थी। उनके निधन से संभवतः भारतीय सेना की आधुनिकीकरण योजना अस्त-व्यस्त हो जाएगी'

भारत की नीतियों पर भी निकाली भड़ास

भारत की नीतियों पर भी निकाली भड़ास

गौरतलब है कि सीडीएस जनरल रावत ने हाल ही में चीन को भारत की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था। जीटी लिखता है कि बहुत लोग चीन-भारत सीमा मुद्दे पर रावत को बहुत बड़ा खिलाड़ी समझते थे, लेकिन चीन के विशेषज्ञों को उनके निधन से सीमा पर मौजूदा हालात में सुधार की उम्मीद नहीं है। सिंघुआ यूनिवर्सिटी के नेशनल स्ट्रैटजी इंस्टीट्यूट में रिसर्च डिपार्टमेंट के डायरेक्टर क्यूइआन फेंग ने कहा है, 'चीन-भारत सीमा मुद्दा सिर्फ सैन्य मसला नहीं है, बल्कि एक राजनीतिक मुद्दा भी है। भारत सीमा मुद्दे पर क्या करता है, यह मुख्य रूप से मोदी सरकार की नीतियों पर निर्भर करता है। इसलिए सिर्फ दुर्घटना से भारत के सीमा मुद्दे पर दृष्टिकोण बदलने की संभावना नहीं है, क्योंकि मुख्य विषय अभी भी भारत-चीन संबध है।'

चीन ने भारतीय सेना को बताया अनुशासनहीन

चीन ने भारतीय सेना को बताया अनुशासनहीन

चीन के एक और कथित एक्सपर्ट हैं लैन जियांशू, जिन्हें चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टीडज में एशिया-पेसिफिक स्टडीज डिपार्टमेंट का डायरेक्टर बताया जाता है। उन्होंने जीटी को ज्ञान दिया है कि, 'भारत चाहे बदले या न बदले, इससे यह सच्चाई नहीं बदलेगी कि भारत का सबसे बड़ा दुश्मन उसका पिछड़ापन है, चीन नहीं।' अब जो बात कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की सरकार के दिलों में थी, वह कथित चाइनीज एक्सपर्ट के जरिए ग्लोबल टाइम्स ने कह दिया है। सीडीएस रावत के निधन के बाद इसने भारत को धमकाते हुए कहा है, 'प्रभावशाली रावत के चले जाने के बाद, भारत सरकार को यह महसूस करना चाहिए कि अनुशासनहीन सेना सरकार के हाथों से आगे निकल सकती है, जिससे सीमा की स्थिति और अधिक बेकाबू हो जाएगी।'

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