गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप, नया संविधान बनाने का झंझट... फिर से चर्चा में क्यों है 37 साल का ये राष्ट्रपति?
चिली के राष्ट्रपति गेब्रियल बोरिक एक बार फिर से चर्चा में हैं। लैटिन अमेरिका के सबसे युवा नेता का ब्रेकअप हो गया है। 37 वर्षीय वामपंथी राष्ट्रपति ने इंस्टाग्राम पर इसकी घोषणा की है। यह खबर सबसे पहले स्थानीय अखबार द्वारा रिपोर्ट की गई थी लेकिन बाद में खुद राष्ट्रपति ने इसकी पुष्टि की।
बोरिक ने सोशल मीडिया पर एक मार्मिक पोस्ट में लिखा कि उन्होंने और 34 वर्षीय इरीना करामानोस कुछ हफ्ते पहले अलग होने का फैसला किया। राष्ट्रपति बोरिक ने कहा कि वह और करामानोस दोनों एक-दूसरे से सिर्फ अलग हो रहे हैं, वे साथ ही काम करते रहेंगे।

ग्रीक और जर्मन मूल की सामाजिक वैज्ञानिक करमानोस ने मार्च में अपने प्रेमी बोरिक के राष्ट्रपति बनने के बाद चर्चा में आई थीं। करमानोस ने पिछले दिसंबर में प्रथम लेडी की भूमिका से इस्तीफा दे दिया था।
करमानोस ने कुछ मसय पहले एक टॉक के दौरान आधुनिक लोकतंत्रों में फर्स्ट लेडी की भूमिका की पुरानी प्रकृति के बारे में बात की थी और असुविधाओं के बावजूद बदलावों पर जोर दिया था।
अपने निजी जीवन के अलावा, राष्ट्रपति बोरिक महत्वपूर्ण राजनीतिक कोशिशों में लगे रहे हैं। उनक प्रमुख फैसलों में एक देश का संविधान बदलने की कोशिशों की खासा चर्चा रही है।
राष्ट्रपति गेब्रियल बोरिक ने बुधवार को कहा कि दिसंबर में होने वाला जनमत संग्रह उनकी सरकार का संविधान में सुधार का दूसरा और आखिरी प्रयास होगा, उन्होंने कहा कि देश को स्थिरता की जरूरत है।
मार्च 2021 में चिली के राष्ट्रपति बने गेब्रियल ने पिछले साल भी नए संविधान के लिए लोगों से वोट करने को कहा था मगर बहुसंख्यक लोगों ने इसके खिलाफ वोट डाला था। अब एक बार फिर से ग्रेबियल लोगों को संविधान बदलने के लिए वोट करने की अपील कर रहे हैं।
चिली में 17 दिसंबर को मतदान होगा, जिसमें यह तय किया जाएगा कि 1980 से लागू संविधान के स्थान पर नए संविधान को अपनाया जाए या नहीं।
अगर यह नया संविधान बनता है तो दशकों पहले सैन्य तानाशाह ऑगस्टो पिनोशे के कार्यकाल में तैयार किया संविधान इतिहास बन जाएगा। दरअसल ऑगस्टो पिनोशे के संविधान ने चिली को विकास के रास्ते पर तो अग्रसर किया, लेकिन जबर्दस्त असमानताएं भी साथ लेकर आया।
इन असमानताओं की वजह से 2019 में बोरिस के नेतृत्व में कई महीनों तक चिली में हिंसक प्रदर्शन हुए। लोगों का समर्थन हासिल कर और संविधान बदलने का वादा कर बोरस देश के राष्ट्रपति बन तो गए मगर अब लोग ही उनकी एक कोशिश पर पानी फेर चुके हैं।
राष्ट्रपति बोरिक का लक्ष्य सरकारी कामकाज के फैसलों में नागरिकों को सीधे शामिल करके, लोकतांत्रिक प्रथाओं को मजबूत करना और यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी कामकाज लोगों की इच्छा के मुताबिक हो।
बतादें कि चिली दुनिया में तांबे का शीर्ष उत्पादक देश है। बैटरी बनाने के काम आने वाली धातु लीथियम के उत्पादन में उसे दूसरा स्थान हासिल है। ऐसे में अगर नए संविधान का मसौदा स्वीकार कर लिया जाता, तो पर्यावरण की सुरक्षा के लिहाज से कड़े नियमों का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।
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