G20 शिखर सम्मेलन शुरू होते ही भारत का मास्टरस्ट्रोक, पीएम मोदी ने अफ्रीकन यूनियन को दिलाई सदस्यता

G20 Summit African Union: जी20 शिखर सम्मेलन शुरू होते ही भारत ने ग्लोबल साउथ का लीडर बनने की तरफ तेजी से कदम बढ़ा दिया है और अफ्रीकन यूनियन को जी20 का स्थायी सदस्य बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान अफ्रीकन यूनियन की सदस्यता का ऐलान किया है।

अफ्रीकी संघ को जी20 की सदस्यता दिलवाना भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इसके जरिए ना सिर्फ भारत को अफ्रीकी देशों में आगे बढ़ने का मौका मिलता है, बल्कि इससे अफ्रीकी देशों के बीच भारत का भरोसा भी बढ़ता है। भारत लगातार ग्लोबल साउथ की आवाज बनने की बात करता है और अफ्रीकी यूनियन को सदस्यता दिलाकर भारत आज सच्चे मायनों में ग्लोबल साउथ का लीडर बन गया है।

g20 african union

अफ्रीकन यूनियन बना जी20 का सदस्य

भारत का लक्ष्य अफ्रीकी संघ को G20 के सदस्य के रूप में शामिल करना काफी पहले से रहा है और इस बार भारत को अपने इस कैम्पेन में अमेरिका के साथ साथ जापान का भी साथ मिला। जिसके बाद जाकर चीन को भी मजबूरी में अफ्रीकन यूनियन के समर्थन के लिए भारत की मुहिम के साथ आना पड़ा।

इससे पहले अफ्रीकी संघ के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए पुष्टि की थी, कि समूह को स्थायी सदस्य बनाया जा रहा है। हालांकि, ये अधिकारी आधिकारिक तौर पर बोलने के लिए अधिकृत नहीं थे, लिहाजा उनकी पहचान उजागर नहीं की गई।

वहीं, एक भारतीय चैनल से बात करते हुए जी20 शिखर सम्मेलन के भारतीय कॉर्डिनेटर हर्षवर्धन श्रृंगला ने एक दिन पहले हालांकि इसकी तो पुष्टि नहीं की, कि अफ्रीकन यूनियन को शामिल करने पर सहमति बनी है या नहीं, लेकिन उन्होंने ये जरूर कहा है, कि भारत ग्लोबल साउथ और अफ्रीकन यूनियन की आवाज बन रहा है और अफ्रीकन यूनियन की सदस्यता के लिए भारत ने काफी प्रयास किए हैं और सदस्यता को लेकर जी20 देशों के नेताओं के बीच आखिरी फैसला होगा।

और आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी20 का उद्घाटन भाषण देते हुए अफ्रीकन यूनियन को जी20 की स्थायी सदस्यता का ऐलान किया है।

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अफ्रीकी संघ भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण?

अफ़्रीकी संघ (एयू) एक महाद्वीपीय निकाय है जिसमें 55 सदस्य देश शामिल हैं। इसे अफ्रीका महादेश का सर्वोच्च समूह माना जाता है जो अपने सदस्य देशों की आवाज़ का प्रतिनिधित्व करता है।

यह अफ्रीकी देशों की प्रगति और आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसे आधिकारिक तौर पर 2002 में अफ़्रीकी एकता संगठन (1963-1999) के उत्तराधिकारी के रूप में लॉन्च किया गया था।

अफ्रीकी यूनियन की वेबसाइट के अनुसार, यह "एक एकीकृत, समृद्ध और शांतिपूर्ण अफ्रीका की कल्पना करता है, जो अपने नागरिकों द्वारा संचालित हो और वैश्विक क्षेत्र में एक गतिशील शक्ति का प्रतिनिधित्व करे।"

1.3 अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करते हुए, इसकी संयुक्त जीडीपी लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर है।

अफ्रीकी यूनियन को जी20 सदस्य बनाने से इसे यूरोपीय संघ के समान दर्जा मिलेगा, जो फिलहाल पूर्ण सदस्यता वाला एकमात्र क्षेत्रीय ब्लॉक है और यह "आमंत्रित अंतर्राष्ट्रीय संगठन" के अपने वर्तमान पदनाम से एक कदम ऊपर होगा।

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