Video: दाने-दाने को मोहताज हुए अफगानी, पाकिस्तान के रास्ते 50,000 मीट्रिक टन गेहूं भेज रहा है भारत
अमृतसर (अटारी), 22 फरवरी: भारत ने अफगानिस्तान में भूख से तड़पती जनता की मदद के लिए मंगलावर को गेहूं से लदे 50 ट्रकों की पहली खेप भेजा है। अफगानिस्तान की आम जनता की हालत कितनी नाजुक है, इसकी जानकारी गेहूं लेने वहां से ट्रक लेकर आए अफगानियों ने दी है। उनके लफ्ज भारत को शुक्रिया कहते थम नहीं रहे हैं। भारत ने तो पिछले साल अक्टूबर की शुरुआत में ही मानवीय आधार पर अफगानियों की सहायता का फैसला किया था, लेकिन ट्रकों का कारवां पाकिस्तान से होकर गुजरना है, इसलिए उसकी रजामंदी लेने में काफी वक्त निकल चुका है। खैर, मंगलवार को भारतीय विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला ने विश्व खाद्य कार्यक्रम और बाकी संबंधित लोगों की मौजूदगी में ट्रकों को हरी झंडी दिखा दी है।

50,000 मीट्रिक टन गेहूं अफगानिस्तान भेज रहा है भारत
अफगानिस्तान में तालिबान का राज है, लेकिन इसमें वहां की मजबूर जनता का कोई कसूर नहीं है। यही दरियाली दिखाते हुए मंगलवार को भारत ने मुफलिसी में जीवन गुजार रहे अफगनियों के लिए मदद का हाथ बढ़ाया है। अफगानिस्तान के नागरिकों तक मानवीय सहायता पहुंचाने के मद्देनजर भारत मंगलवार को उसे गेहूं से भरे 50 ट्रकों की पहली खेप भेजी है। गेहूं से लदे इन ट्रकों का कारवां अटारी-वाघा बॉर्डर से होते हुए पाकिस्तान से गुजरकर अफगानिस्तान में दाखिल होगा। इस मानवीय सहायता को भारत कितनी अहमियत दे रहा है कि राहत में भेजे जा रहे गेहूं की खेप को हरी झंडी दिखाने की जिम्मेदारी खुद देश के विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला अटारी पहुंचे हैं।

पहली खेप में 2,500 टन गेहूं भेजा गया है
गेहूं से लदे 50 ट्रकों की पहली खेप अफगानिस्तान रवाना करते हुए विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला ने कहा, 'हम अफगानिस्तान को अपनी मानवीय सहायता के रूप में 50,000 टन गेहूं दे रहे हैं। आज हम 50 अफगानी ट्रकों में 2,500 टन की अपनी पहली खेप को हरी झंडी दिखा रहे हैं। इसे वितरण के लिए विश्व खाद्य कार्यक्रम के हवाले किया जाएगा।'

बहुत अच्छा लग रहा है- गेहूं ले जाने आए अफगानी
भारत से मदद की यह भेंट पाकर अफगानिस्तान से गेहूं ले जाने आए लोग बहुत ही ज्यादा खुश हैं। एक ऐसे ही अफगानी नागरिक ने कहा है, 'हम अफगानिस्तान से आए हैं...अफगानिस्तान जाना है। मैं बहुत खुश हूं....बहुत अच्छा लग रहा है...' दरअसल, भारत ने गेहूं की यह खेप भेजने के लिए पिछले साल अक्टूबर की शुरुआत में ही पेशकश की थी, लेकिन पाकिस्तान से होकर गुजरने के लिए उसके साथ बातचीत में इतना वक्त गुजर चुका है। पाकिस्तान ने भारत की गुजारिश पर पिछले साल 24 नवंबर को ही पहला रेस्पॉन्स दिया था, लेकिन फिर भी सभी पहलुओं को तय करने में इतना वक्त लग चुका है।

'वहां पर लोगों के पास कुछ भी पैसे नहीं हैं और वे बहुत ही गरीब हैं'
गेहूं ले जाने के लिए अफगानिस्तान से आए एक शक्स ने वहां की जो हालत बयां की है, उससे मालूम होता है कि भारत संकट की इस घड़ी में वहां के नागरिकों के साथ किस तरह खड़ा हुआ है। उसने कहा है, 'अफगानिस्तान में गेहूं की अत्यधिक आवश्यकता है। वहां पर लोगों के पास कुछ भी पैसे नहीं हैं और वे बहुत ही गरीब हैं। मदद के लिए हम भारत के शुक्रगुजार हैं।'
अफगानिस्तान की करीब 2.20 करोड़ आबादी पर खाद्य संकट
बता दें कि विश्व खाद्य कार्यक्रम के भारत में कंट्री डायरेक्टर बिशॉ पाराजुली के मुताबिक यह संगठन पहले ही करीब 70 लाख अफगानिस्तानियों की सहायता कर चुका है; और अफगानिस्तान में करीब 2.20 करोड़ लोग दाने-दाने के लिए तरस रहे हैं। यह आबादी अफगानिस्तान की जनसंख्या की लगभग आधी है।












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