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'निगलने के लिए बहुत बड़ा है अफगानिस्तान', पाकिस्तान पर भड़के कार्यवाहक अफगान राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह

काबुल, 19 अगस्त। अफगानिस्तान में भले ही तालिबान आतंकियों ने राजधानी काबुल समेत देश के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है और देश में युद्ध खत्म होने की घोषणा कर दी है लेकिन अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ अभी लड़ाई खत्म नहीं हुई है। अफगानिस्तान में अशरफ गनी प्रशासन में उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने तालिबान के खिलाफ लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है। अमरुल्लाह सालेह ने खुद को देश के अंदर ही मौजूद बताते हुए कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित कर दिया है और तालिबान के खिलाफ न झुकने की कसम खाई है।

तालिबान को कहा आतंकी समूह

तालिबान को कहा आतंकी समूह

तालिबान को पाकिस्तान का प्रॉक्सी गुट बताने वाले अमरुल्लाह सालेह ने एक बार फिर पाकिस्तान पर निशाना साधा है। एक ट्वीट में उन्होंने लिखा है "राष्ट्रों को कानून के शासन का सम्मान करना चाहिए, हिंसा का नहीं। अफगानिस्तान इतना बड़ा है कि पाकिस्तान निगल नहीं सकता और तालिबान के शासन करने के लिए बहुत बड़ा है। अपने इतिहास को आतंकवादी समूहों के लिए अपमान और झुकने का एक अध्याय न बनने दें।"

अमरुल्लाह सालेह ने ये ट्वीट अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रपति जार्ज बुश के स्पीच राइटर रहे माइकल जॉन के ट्वीट के जवाब में किया है। माइकल जॉन ने अपने ट्वीट में लिखा था "2004 में अपनाया गया अफगानिस्तान का संविधान, उन परस्थितियों में जो अभी मौजूद हैं, राष्ट्र के लिए जो व्याख्या करता है उसके मुताबिक पहले उप राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह राष्ट्रपति बनते हैं।" उन्होंने आगे लिखा है कि राष्ट्रों को कानून के शासन का सम्मान करना चाहिए, हिंसा का नहीं।

सालेह ने खुद को घोषित किया है कार्यवाहक राष्ट्रपति

सालेह ने खुद को घोषित किया है कार्यवाहक राष्ट्रपति

बता दें कि तालिबान के राजधानी पर कब्जा करने के बाद राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर भाग गए थे। शुरुआत में उनके उजबेकिस्तान और फिर ओमान में होने की खबर आई थी लेकिन बुधवार को संयुक्त अरब अमीरात ने बताया कि उसने गनी और उनके परिवार को मानवीय आधार पर स्वीकार किया है।

उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने कहा है कि वह अभी भी देश में हैं और तालिबान के खिलाफ गुटों को एकत्रित कर रहे हैं। उन्होंने अफगानिस्तान के संविधान के आधार पर खुद के कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित कर दिया।

एक ट्वीट में सालेह ने लिखा "इस्लामिक गणराज्य अफगानिस्तान के संविधान के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, राष्ट्रपति की अनुपस्थिति, पलायन या मृत्यु की स्थिति में, प्रथम उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति होगा। मैं देश के अंदर हूं और मैं कानूनी और वैध रूप से इस पद / कुर्सी (राष्ट्रपति) का प्रभारी हूं। मैं इस स्थिति को मजबूत करने के लिए देश के सभी नेताओं से सलाह मशविरा कर रहा हूं।"

तालिबान के सामने न झुकने की कसम

तालिबान के सामने न झुकने की कसम

तालिबान के खिलाफ कभी न झुकने की कसम खाने वाले अमरुल्लाह सालेह के बारे में कहा जा रहा है कि अफगानिस्तान की पंजशीर घाटी में है। पंजशीर वही इलाका है जो तालिबान के धुर-विरोधी मुजाहिदीन कमांडर अहमद शाह मसूद का गढ़ हुआ करता था। पंजशीर पर तालिबान का कब्जा न तो पिछले शासन में हो पाया था और न ही अभी तक हो पाया है।

सालेह ही अमहद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद के साथ बैठक करती हुई तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर आई हैं। कहा जा रहा है कि पंजशीर में तालिबान विरोधी सभी गुट इकठ्ठा हो रहे हैं और एक बार देश फिर से तालिबान के खिलाफ बड़ी लड़ाई में जा सकता है।

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