पाकिस्तान की शिकायत लेकर UNSC पहुंचा अफगानिस्तान, तालिबान बोला, बिगड़े हालात, भारत को भी भेजी चिट्ठी
पाकिस्तान के पूर्व प्रधान मंत्री इमरान नियाज़ी और उनके तत्कालीन आईएसआई हीरो रहे लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद के 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान इस्लामी शासन की स्थापना में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
काबुल, अप्रैल 26: पाकिस्तान और तालिबान के बीच अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक को लेकर झगड़ा बढ़ता जा रहा है और अफगानिस्तान में इस्लामिक शासन की स्थापना में अहम भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान को अब तालिबान ने आंखे दिखानी शुरू कर दी है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने तो तालिबान के लिए भीख मांगने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी, लेकिन तालिबान ने पाकिस्तान को धमकी देते हुए कहा है, कि अगर अब एक बार फिर अफगानिस्तान की जमीन पर हमला करने की सोची, तो अंजाम ठीक नहीं होगा।

यूनाइटेड नेशंस पहुंचा अफगानिस्तान
पाकिस्तान के पूर्व प्रधान मंत्री इमरान नियाज़ी और उनके तत्कालीन आईएसआई हीरो रहे लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद के 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान इस्लामी शासन की स्थापना में सक्रिय भूमिका निभाने के बावजूद, तालिबान ने पाकिस्तान को गंभीर अंजाम भुगतने की चेतावनी दी है। तालिबान ने अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमले को अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करार दिया है और पाकिस्तान के खिलाफ अफगानिस्तान प्रशासन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पहुंच गया है, जहां पाकिस्तान के खिलाफ एक्शन लेने की मांग की गई है और कहा है, कि पाकिस्तानी वायुसेना ने 16 अप्रैल को अफगानिस्तान के कुनार और खोस्त प्रांत में हवाई हमले किए हैं।

पाकिस्तान के खिलाफ साथ आए सभी गुट
सबसे दिलचस्प बात ये है, कि अफगानिस्तान में मौजूद सभी गुटों पाकिस्तान के खिलाफ एक साथ आ गये हैं। पाकिस्तान के खिलाफ अफगानिस्तान की पिछली अशरफ गनी शासन में यूएनएससी में स्थाई सदस्य रहे नसीर अहमद फैक ने यूएनएससी में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन घटना में दिलचस्प मोड़ उस वक्त आ गया, जब तालिबान, हक्कानी नेटवर्क और तहरीक-ए-तालिबान ने भी इस शिकायत का समर्थन कर दिया और पाकिस्तानी हवाई हमलों के खिलाफ विरोध में हाथ मिला लिया। आपको बता दें कि, पाकिस्तानी हवाई हमले में अफगानिस्तान में कई महिलाओं और बच्चों समेत 40 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। वहीं, कई घर तबाह हो गये हैं। तालिबान शासन स्थापित होने के बाद पाकिस्तान अफगानिस्तान को अपनी रैयत समझने लगा था, लेकिन तालिबान के सख्त जवाब से पाकिस्तान सकपका गया है।

डूरंड लाइन को मानने से इनकार
अफगानिस्तान स्थिति सभी तीनों पश्तून गुटों ने पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा को विभाजित करने वाले डूरंड लाइन को मानने से इनकार कर दिया है और अशरफ गनी के शासनकाल में पाकिस्तान ने जो सीमा पर बाड़ लगाए थे, उसे तालिबान ने उखाड़ फेंका है। इसके साथ ही अफगानिस्तान की सभी जातीय समूह ने डूरंड लाइन का विरोध करना शुरू कर दिया है, जिसके बाद अब पाकिस्तान असमंजस में है, कि वो इस स्थिति से कैसे निपटे, क्योंकि पाकिस्तान ने तालिबान की इतनी तारीफ की है, कि वो अब तालिबान की शिकायत करने के भी काबिल नहीं रहा।

यूएनएससी को लिखी गई चिट्ठी
यूएनएससी के अध्यक्ष को लिखे एक पत्र में अफगानिस्तान चार्ज डी 'अफेयर्स ने शिकायत की है, कि हवाई हमले "मानवीय कानूनों, संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, यूएनजीए और यूएनएससी प्रस्तावों सहित अंतरराष्ट्रीय कानूनों का एक प्रमुख उल्लंघन है, जिसमें अच्छे पड़ोसी संबंधों की काबुल घोषणा पर संकल्प 1453 (2002) शामिल है'। इस शिकायत में आगे कहा गया है कि, 'पाकिस्तानी सैन्य बलों ने सीमा पार से अफगानिस्तान की जमीन पर गोलाबारी की है, सैन्य चौकियों के निर्माण और अफगानिस्तान की धरती के अंदर बाड़ के माध्यम से अफगानिस्तान के क्षेत्र का लगातार उल्लंघन पाकिस्तान के द्वारा किया जा रहा है'।

पाकिस्तानी गोलीबारी का जिक्र
वहीं, इस चिट्ठी में विशेष रूप से उच्च चिंता का विषय सीमा पार से गोलाबारी को बताया गया है, जिसके कारण कई नागरिक हताहत हुए हैं। चिट्ठी में लिखा गया है कि, 'पाकिस्तानी हमले से विस्थापन और सार्वजनिक और निजी संपत्तियों का विनाश हुआ है। ये कृत्य निंदनीय हैं और इन्हें रोका जाना चाहिए। इन उल्लंघनों के जारी रहने से दो देशों के संबंधों पर असर पड़ेगा और यह अफगानिस्तान और क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को और अस्थिर करेगा'।

गनी सरकार में भी शिकायत
आपको बता दें कि, अफगानिस्तान की पूर्ववर्ती अशरफ गनी सरकार भी इस मुद्दे को यूनाइटेड नेशंस के सामने पहले भी 22 फरवरी, 2019, 22 अगस्त, 2019 और 17 जुलाई, 2020 के पत्रों के माध्यम से उठा चुका है। जबकि विशेष रूप से इमरान खान के नेतृत्व में पाकिस्तान के नेतृत्व ने सोचा था, कि अफगानिस्तान में तालिबान शासन इस्लामाबाद को भारत के खिलाफ बहुत आवश्यक रणनीतिक स्थान प्रदान करेगा। जबकि, तथ्य यह है कि तालिबान शासन अपने पूर्व संरक्षक और हैंडलर, आईएसआई के खिलाफ हो गया है। यह तत्कालीन आईएसआई डीजी और इमरान खान का कट्टर आदमी था, जिसने यह सुनिश्चित किया, कि हक्कानी नेटवर्क ने पारंपरिक कंधार आधारित इस्लामवादियों को खाड़ी में रखकर काबुल पर कब्जा कर लिया। वहीं, अफगानिस्तान ने अपनी शिकायत को खास तौर पर यूएनएससी के सभी सदस्य देशों को भी भेजा है, जिसमें भारत भी शामिल है और तालिबान ने अनुरोध किया है, कि वो इस मुद्दे को यूएनएससी में जोरशोर से उठाए।

टीटीपी पर फंसा पाकिस्तान!
तहरीक-ए-तालिबान वही संगठन है, जिसे पाकिस्तान 'बुरा' कहता आया है, जबकि अफगानिस्तान के तालिबान को पाकिस्तान ने हमेशा से 'अच्छा' तालिबान कहा है। लेकिन, असलियत ये है, कि दोनों तालिबान एक ही हैं। जब तक अफगानिस्तान में अमेरिका रहा, पाकिस्तान का ये प्रोपेगेंडा काम करता रहा, लेकिन अमेरिकी सैनिकों के निकलते ही अब पाकिस्तान के पास भागने के लिए जगह नहीं मिल रहे हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि, टीटीपी का मकसद पाकिस्तान में शरिया आधारित हार्डकोर इस्लामिक शासन की स्थापना करनी है, जैसा अफगानिस्तान में किया गया है। टीटीपी पाकिस्तान के संविधान को खारिज कर चुका है, लेकिन पाकिस्तान के लिए टीटीपी के खिलाफ कार्रवाई करना इसलिए काफी मुश्किल हो रहा है, क्योंकि पाकिस्तान की एक बड़ी आबादी टीटीपी को समर्थन करती है और ऐसे आतंकी, जो पकिस्तानी सेना को निशाना बनाते हैं, उन्हें पाकिस्तान के अंदर ही छिपा लिया जाता है और सेना उन आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाती है।
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