CAA के बाद अब केजरीवाल की गिरफ्तारी पर भी बोला अमेरिका, जर्मनी की तरह भारत को दी ‘नसीहत’
जर्मनी के बाद अब अमेरिका ने भी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के विवाद पर बयान दिया है। शराब घोटाले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी पर अमेरिका का कहना है कि वह भारत के प्रमुख विपक्षी नेता केजरीवाल की गिरफ्तारी पर नजर रखे हुए हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि केजरीवाल की गिरफ्तारी पर हमारी करीबी नजर है और देश में निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया की उम्मीद करते हैं। प्रवक्ता ने आगे कहा कि हम मुख्यमंत्री केजरीवाल के निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध कानूनी प्रक्रिया की उम्मीद करते हैं।

आपको बता दें कि सीएए के बाद ये दूसरा अवसर है जब अमेरिका ने भारत के घरेलू मसले पर टिप्पणी की है। इससे पहले जर्मनी की सरकार ने भी केजरीवाल की गिरफ्तारी मामले में टिप्पणी की थी जिसका भारत ने करारा जवाब दिया था।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने केजरीवाल मामले में रॉयटर्स के पूछे गए सवाल के जवाब में कहा, 'हम मुख्यमंत्री केजरीवाल के लिए निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध कानूनी प्रक्रिया के लिए प्रोत्साहित करते हैं।'
सीएए को लेकर भी अमेरिकी प्रशासन की तरफ से बयान आया था। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा था कि हम 11 मार्च को आए CAA के नोटिफिकेशन को लेकर चिंतित हैं। इस कानून को कैसे लागू किया जाएगा, इस पर हमारी नजर रहेगी। धार्मिक स्वतंत्रता का आदर करना और कानून के तहत सभी समुदायों के साथ बराबरी से पेश आना लोकतांत्रिक सिद्धांत है।
अमेरिका की इस टिप्पणी पर भारत ने कड़ा ऐतराज जताया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि ये भारत का आंतरिक मामला है और इस पर अमेरिका का बयान गलत है। प्रवक्ता ने आगे कहा था कि जिन लोगों को भारत की परंपराओं और विभाजन के बाद के इतिहास की समझ नहीं है, उन्हें लेक्चर देने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। कुछ समय के बाद भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी इस पर टिप्पणी की थी।
जर्मनी ने क्या कहा था?
जर्मनी के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी पर कहा था कि भारत के लोकतांत्रिक देश होने के नाते उन्हें उम्मीद है कि केजरीवाल को निष्पक्ष और तटस्थ सुनवाई का अवसर मिलेगा। इसके बाद भारत ने जर्मनी के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की टिप्पणी को भारत के आंतरिक मामलों में दखल बताते हुए अपना कड़ा विरोध दर्ज किया था।












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