पर्सीवरेंस रोवर की सबसे बड़ी खोज, NASA को मंगल पर मिला 'खजाना'
मंगल ग्रह (लाल ग्रह) पर 18 महीने पहले पर्सीवरेंस रोवर का मिशन शुरू हुआ था। रोवर इस ग्रह पर प्राचीन माइक्रोबियल जीवन के संकेतों की तलाश कर रहा है,जिनमें जीवन से जुड़े कई तथ्य संरक्षित हो सकते हैं।
न्यूयॉर्क, 17 सितंबर : मंगल पर जीवन है या नहीं, यह विषय वैज्ञानिकों के लिए रोचक विषय रहा है। क्योंकि धरती और मंगल एक दूसरे से काफी मिलते-जुलते हैं। इस लिहाज से हमारे सौर मंडल में मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना प्रबल है। इसी खोजी जुनून को बरकरार रखते हुए नासा ने मंगल ग्रह पर जीवन के बारे में जानने के लिए पर्सीवरेंस रोवर को भेजा। रोवर ने अब तक कई जानकारियों नासा को मुहैया करा चुका है। अब खबर है कि, रोवर ने लाल ग्रह पर खजाने की खोज की है। आइए जानते हैं कि आखिर रोवर ने मंगल ग्रह पर क्या नई और बड़ी खोज की है। इससे पता चल सकता है कि, कभी मंगल पर जीवन था या नहीं। ( NASA scientists Perseverance rover has collected organic matter on mars )

मंगल में क्या पहले जीवन था?
हाल ही में पर्सीवरेंस रोवर ने नासा को मंगल के जेजेरो क्रेटर में एक महत्वपूर्ण नमूनों की खोज की है। नमूने में कार्बनिक पदार्थ भी प्राप्त हुए हैं। वैज्ञानिक को कहना है कि, यह खोज किसी खजाने से कम नहीं है। नासा ने कहा है कि, वैज्ञानिक मानते हैं कि, 3.5 अरब साल पहले जेजेरो क्रेटर में झील था, जो जीवन के वातवरण के अनुकूल रहे होंगे। कैलिफोर्निया के पासाडेना में इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में पर्सीवरेंस प्रोजेक्ट के वैज्ञानिक केन फार्ले ने कहा, 'जिन चट्टानों की हम डेल्टा पर जांच कर रहे हैं उनमें कार्बनिक पदार्थ अब तक के मिशन में सबसे ज्यादा मिले हैं।'

पर्सीवरेंस रोवर का मिशन
मंगल ग्रह (लाल ग्रह) पर 18 महीने पहले पर्सीवरेंस रोवर का मिशन शुरू हुआ था। रोवर इस ग्रह पर प्राचीन माइक्रोबियल जीवन के संकेतों की तलाश कर रहा है,जिनमें जीवन से जुड़े कई तथ्य संरक्षित हो सकते हैं। बता दें कि, नासा के मिशन रोवर ने 12 पत्थरों के नमूने एकत्रित किए हैं। वैज्ञानिकों को आशा है कि, कई मिशन के जरिए 2030 के दशक में नमूनों को पृथ्वी पर लाया जाएगा।

जेजेरो क्रेटर में झील हुआ करता था
जेजेरो क्रेटर में जो झील हुआ करता था, वह 45 किमी तक फैला हुआ है। वैज्ञानिकों का मानना है कि, यहां कभी नदी हुआ करती थी जो समय के साथ झील में परिवर्तित हो गई होगी। डेल्टा में विवध तलछटी चट्टानों के साथ ज्वालामुखी पत्थर भी हैं। जो मैग्मा के क्रिस्टल बनने के कारण बने हैं। ये भी तलछट पर ही पाए गए हैं। पत्थर भूगर्भिक इतिहास को और भी ज्यादा रोचक बना दिया है।

बलुआ पत्थर मिला
वैज्ञानिक बताते हैं कि, इस स्थान पर उन्हें एक बलुआ पत्थर मिला, जिसमें ठोस पत्थर और ग्रेन थे और वे जेजेरो क्रेटर से दूर था। वहीं, मिशन टीम रोवर द्वारा खोज किए गए एक चट्टान का नाम वाइल्ड कैट रिज रख दिया है। जानकार बताते हैं कि, इस पत्थर का निर्माण अरबों साल पहले तब हुआ होगा जब खारे पानी की झील भांप बनकर उड़ गई होगी और वहां मिट्टी और रेत ही रेत नजर आने लगा होगा।

Organic molecules का कैसे हुआ निर्माण?
विश्लेषण से पता चला है कि कार्बनिक खनिज कार्बन और हाइड्रोजन के स्थिर अणु हैं जो सल्फेट से जुड़े होते हैं। सल्फेट खनिज अक्सर तलछटी चट्टानों की परतों के भीतर पाए जाते हैं। कार्बनिक अणु मंगल पर जीवन से जुड़ा है। नासा (NASA) के वैज्ञानिक फिलहाल यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि मंगल ग्रह (Mars Planet) पर खोजे गए कार्बनिक अणु (Organic molecules) कैसे और कब बने।

मंगल ग्रह पर कार्बानिक अणु, जीवन के संकेत
मंगल ग्रह पर कार्बानिक अणु जीवन की संभावनाओं को बल देता है। क्योंकि, वे कार्बन, हाइ़ड्रोजन और ऑक्सीजन के साथ-साथ नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और सल्फर, जो जीवन के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, कुछ कार्बनिक अणुओं को रासायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से बनाए जा सकते हैं। इसलिए मंगल ग्रह पर जीवन को लेकर कई सवाल लोगों के मन में उठते रहते हैं।

पर्सीवरेंस रोवर, क्यूरियोसिटी रोवर कार्बनिक पदार्थ की खोज की
वहीं, पर्सीवरेंस रोवर के साथ-साथ क्यूरियोसिटी रोवर ने मंगल पर पहले भी कार्बनिक पदार्थ की खोज की थी। लेकिन इस बार खोज ऐसे क्षेत्र में हुई, जहां कभी जीवन की संभावना रही होगी।
(Photo Credit : Twitter)












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