Titanic Submersible: पानी के प्रेशर से पिचक गई पनडुब्बी, हो गये टुकड़े... अब क्यों कभी नहीं मिल पाएंगे शव?
टाइटैनिक जहाज के मलबे को देखने के लिए गई टाइटन पनडुब्बी हादसे का शिकार हो गई। इसमें सवार पांचों अरबपति यात्रियों की मौत हो गई है। ऐसा कहा जा रहा है कि ये सभी यात्री पनडुब्बी में हुए भीतरी विस्फोट की वजह से मारे गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि टाइटन सबमरीन शायद विनाशकारी आंतरिक विस्फोट का शिकार हो गई। हालांकि अभी तक ये पता नहीं चल पाया है कि इस पनडुब्बी में ये विस्फोट किस वक्त हुआ था।

विस्फोट का उल्टा आंतरिक विस्फोट होता है। विस्फोट में कोई भी चीज अंदर से बाहर की तरफ फटती है, वहीं आंतरिक विस्फोट में बाहर से अंदर की तरफ दबाव के चलते धमाका होता है।
पूर्व नौसेना अधिकारी और फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर एलीन मारिया मार्टी ने कहा, ये आंतरिक विस्फोट अविश्वसनीय रूप से बेहद तेजी से घटित होता है। ऐसा पनडुब्बी में किसी ढांचागत खामी की वजह से बने दबाव की वजह से होता है।
ये 1 मिलीसेकंड के एक अंश के भीतर हो जाता है। किसी को कुछ पता चले कि कुछ दिक्कत है, उससे पहले सबकुछ खाक में मिल चुका होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस सबमरीन में कोई भी दिक्कत होगी तो वह मिली सेकंड में ही पनडुब्बी को तबाह कर दी होगी।
जिस जगह पर पनडुब्बी का मलबा बरामद हुआ है, वो डूबे हुए टाइटैनिक जहाज के अवशेषों के नजदीक है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक पनडुब्बी टाइटन से आखिरी बार संपर्क रविवार को हुआ था, उसकी टाइमिंग से ऐसा लगता है कि धमाके की घटना रविवार को उसी दौरान हुई होगी।
अब ये बात सामने आई है कि अमेरिकी नेवी को भी रविवार को धमाके का शोर सुनाई दिया था। हालांकि उस वक्त सबमरीन के गायब होने जैसी कोई जानकारी सामने नहीं आई थी इसलिए किसी का इस पर ध्यान नहीं गया। यह स्पष्ट नहीं है कि विस्फोट के समय टाइटन कहां या कितना गहरा था, जबकि टाइटैनिक का मलबा समुद्र तल से लगभग 12,500 फीट नीचे है।
ऐसा माना जा रहा है कि जब टाइटन का विस्फोट हुआ होगा तब वह टाइटैनिक के मलबे के काफी निकट होगा। नेशनल एसोसिएशन ऑफ केव डाइवर्स के अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण निदेशक, रिक मुर्कर के अनुसार, टाइटैनिक का मलबा जिस गहराई पर है, वहां लगभग 5,600 पाउंड प्रति वर्ग इंच प्रेशर होता है।
इसे अगर सामान्य भाषा में समझा जाए जो यहां धरती पर हम जिस दबाव का अनुभव करते हैं, टाइटैनिक के मलबे के पास उससे 390 गुना अधिक दबाव होता है। यह दबाव कुछ वैसा ही होता है जैसे अंतरिक्षयात्री स्पेस में जा रहा हो।
समुद्र के अंदर हवा और लहरों की वजह से तेज करंट बनता है। इससे समुद्र की सतह पर पड़े सामान की जगह भी बदल जाती है। इसलिए यहां जाने वाली पनडुब्बी की दीवार को काफी मोटा बनाया जाता है ताकि वह दबाव को झेल सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी शव के बरामद होने की संभावना नहीं है। विस्फोट की तीव्रता को देखते हुए माना जा रहा है कि पांचों यात्रियों के शव अब कभी नहीं मिल पाएंगे।












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