भूकंप से क्षतिग्रस्त इमारतों की तेज मरम्मत के लिए 'बेल्ट तकनीकी'

लंदन। अनुसंधानकर्ताओं ने भूकंप के कारण क्षतिग्रस्त हुई इमारतों की मरम्मत और उसे फिर से रहने लायक बनाने के लिए एक बहुत ही किफायती एवं साधारण प्रौद्योगिकी इजाद की है।

साउथ यार्कशायर स्थित शेफील्ड विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं द्वारा किए गए हालिया परीक्षण में देखा गया कि इस प्रौद्योगिकी से मरम्मत की गई इमारत तीव्र गति के भूकंप के झटकों को फिर से सहने लायक हो सकती है।

इस प्रौद्योगिकी से इमारत की मरम्मत करते हुए इमारत की हर मंजिल को धातु की चौड़ी पट्टियों से लपेट कर उन तारों को या तो हाथों से ही या वायुदाब पैदा करने वाली मशीनों से कस दिया जाता है।

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इस प्रौद्योगिकी बारे में प्रोफे सर पिलाकोटस बताते हैं, "यह किसी भारोत्तोलक के कमर में बंधी बेल्ट जैसे ही काम करती हैं। यह इमारत को पूरी तरह कस लेती है और कंक्रीट के हर कॉलम पर पड़ने वाले दबाव को कम कर देती है।"

उनका कहना है कि कंक्रीट दबाव को तो सहन कर सकता है, लेकिन झटकों या तनाव को नहीं, इसीलिए इन्हें इमारतों के निर्माण में इस्तेमाल करने पर इतना जोर दिया जाता है।

उन्होंने यह भी बताया कि इस नई प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से भूकंप के दौरान क्षतिग्रस्त भवन को न केवल तेजी से पुनर्निर्मित किया जा सकता है, बल्कि यह भवन को स्थिर भी रखेगा।

अनुसंधानकर्ताओं की टीम ने दो मंजिला इमारत पर इस प्रौद्योगिकी का परीक्षण किया, जो भूकंप-रोधी तकनीक से निर्मित नहीं किया गया था।

पहले प्रयोग के दौरान टीम ने पाया कि रिएक्ट स्केल पर 4.0 तीव्रता वाले भूकंप के झटकों में ही इमारत गिर सकती है।

इसके बाद इस भवन की धातु की पट्टियों का इस्तेमाल कर मरम्मत की गई और फिर से इसका परीक्षण किया गया। हालांकि शोधकर्ता लाख कोशिशों के बावजूद इस भवन को 7.0 की तीव्रता वाले भूकंप में गिरने से नहीं बचा पाए।

प्रोफेसर पिलाकोटस ने यह भी बताया कि नई प्रौद्योगिकी से न केवल अधिक तीव्रता वाले भूकंप में इमारत को गिरने से बचाएगी, बल्कि उससे होने वाली हानि को भी कम करेगी।

उन्होंने यह भी बताया कि न सिर्फ यह प्रौद्योगिकी किफायती है, बल्कि सिर्फ दो व्यक्तियों की मदद से महज दो घंटें में एक छोटी इमारत की मरम्मत की जा सकती है।

यह प्रौद्योगिकी विकासशील देशों के लिए बेहद कारगर साबित हो सकती है।

शोध के सह-लेखक विलियम बार्नहार्ट का कहना है कि भूकंप के झटके आने के बाद इमारत गिरने में लगने वाले समय को भी यह प्रौद्योगिकी बढ़ा देता है।

अर्थात जहां बिना इस प्रौद्योगिकी वाले इमारत तेजी से गिर जाते हैं और उनमें रहने वाले लोगों को बचने का मौका तक नहीं मिलता, वहीं इस प्रौद्योगिकी से मरम्मत की गई इमारत गिरने में थोड़ा समय लेती है और इससे इमारत में रहने वाले लोगों को बचने का पूरा मौका भी मिल सकता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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