कतर से भारत की इस डील के 5 दिन बाद ही रिहाई, मोदी सरकार ने किस ब्रह्मास्त्र से बचाई पूर्व नौसैनिकों की जान?
कतर ने 8 पूर्व भारतीय नौसैनिकों को रिहा कर दिया है। इनमें से 7 सोमवार सुबह भारत लौट आए हैं। ये कतर में जासूसी के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। इससे पहले इन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी।
भारत ने मौत की सजा के विरुद्ध दोहा में अपील दायर की थी जिसके बाद इन नागिरकों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया था। आपको बता दें कि इन आठ भारतीय नागरिकों की गिरफ्तारी का मुद्दा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को बढ़ा रहा था।

रिहाई के बाद भारत लौटे सभी सात पूर्व नौसैनिकों ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिल से आभार जताया है। दिल्ली एयरपोर्ट पर लौटने के बाद एक पूर्व नौसैनिक ने कहा कि PM मोदी के हस्तक्षेप के बिना हमारे लिए भारत लौटना संभव नहीं होता। भारत सरकार के लगातार प्रयासों के बाद ही हम वापस आ सके हैं।
मोदी सरकार की बड़ी कूटनीतिक जीत
आपको बता दें कि पूर्व नौसैनिकों की स्वदेश वापसी को भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। सैनिकों की सकुशल स्वदेश वापसी को भारत और कतर के बीच हुए एक अहम समझौते से जोड़कर देखा जा रहा है। हमने 3 महीने पहले भी इस डील की चर्चा की थी और कहा था कि दोनों देशों के बीच होने वाली ये डील से पूर्व नौसैनिकों की रिहाई हो सकती है।
LNG के बारे में कहा जाता है कि इसका बाजार डिमांड और सप्लाई से अधिक अंतरराष्ट्रीय संबंधों प्रभावित होता है। बड़े खिलाड़ी इसका इस्तेमाल मौके को अपने पक्ष में भुनाने के लिए करते हैं। हमने देखा है कि कैसे यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद अमेरिका, यूरोप में प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा खिलाड़ी बन चुका है। ठीक इसी तरह भारत और कतर के बीच प्राकृतिक गैस डील को पूर्व नौसैनिकों की रिहाई से जोड़कर देखा जा रहा है।
भारत और कतर के बीच 6 फरवरी 2024 को एक अहम प्राकृतिक गैस समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत भारत 2048 तक कतर से लिक्विफ़ाइड नैचुरल गैस (LNG) खरीदेगा। यह समझौता अगले 20 सालों के लिए हुआ है और इसकी कुल लागत 78 अरब डॉलर की है। इस समझौते के तहत कतर हर साल भारत को 7.5 मिलियन टन गैस निर्यात करेगा।
इससे पहले दोनों देशों के बीच LNG पर 31 जुलाई 1999 को समझौता हुआ था जो 2028 तक के लिए था। नया समझौता 2028 से लागू होगा, लेकिन इससे भारत को बड़ी बचत होगी। इस समझौते को बेहद अहम इस हिसाब से भी बताया जा रहा है क्योंकि इसे वर्तमान समझौते से भी काफी कम दाम पर किया गया है।
हालांकि इस नए सौदे के तहत गैस कुल कितनी कीमत पर खरीदी जाएगी इसको लेकर कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है लेकिन ऐसा कहा जा रहा है कि इसकी वर्तमान सौदे से कम कीमत होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस नए सौदे से अगले 20 सालों तक करीब 6 अरब डॉलर बचाए जा सकते हैं।
आपको बता दें कि भारत में LNG गैस का इस्तेमाल बिजली, उर्वरक बनाने और इसे सीएनजी में बदलने के लिए किया जाता है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है और वो साल 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य लेकर चल रहा है, जिसमें प्राकृतिक गैस की अहम भूमिका है।
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भारत प्राकृतिक गैस के लिए कतर के अलावा अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया पर भी निर्भर है। हालांकि भारत आधे से अधिक गैस कतर से आयात करता है। आने वाले सालों में भारत अधिक से अधिक प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल करना चाहता है।
हमने उपर ही जिक्र किया है कि प्राकृतिक गैस के बाजार में डिमांड और सप्लाई से इतर अंतरराष्ट्रीय मुद्दे भी इसकी कीमत तय करते हैं। यही वजह है कि हाल के कुछ सालों में प्राकृतिक गैस की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
LNG सेक्टर में अमेरिका की घुसपैठ ने कतर को थोड़ा असुरक्षित कर दिया है। चूंकि कतर की आय गैस-तेल के निर्यात पर ही निर्भर है। ऐसे में कतर सुरक्षित भविष्य के लिए साथी देशों संग लंबे करार करने पर ध्यान दे रहा है।
हाल ही में कतर ने भारत के अलावा फ्रांस, डच और इटली की गैस कंपनियों के साथ 27 सालों के लिए एलएनजी डील साइन की है। इसके अलावा, कुछ महीने पहले कतर ने चीन और जर्मनी के साथ भी लंबे समय के लिए एलएनजी आपूर्ति के लिए डील साइन की है। ऐसे में भारत के साथ कतर का ये करार दोनों देशों के लिए गुड-गुड सिचुएशन माना जा रहा है।












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