परमाणु अप्रसार संधि से पीछे हटा पाक, नहीं करेगा हस्ताक्षर

नयी दिल्ली। पाकिस्तान ने साफ कर दिया है कि वो परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं करेगा, क्योंकि वह इस संधि को पक्षपाती मानता है। इस इंकार के साथ ही पाकिस्तान की मंशा साफ हो गई है। परमाणु अप्रसार संधि को विरोध कर पाक ने कहा है कि वो उसे अपनी सुरक्षा करने का अधिकार है।

nawaz sharif

समाचार पत्र 'डॉन' ने बुधवार को जानकारी दी कि पाकिस्तान के विदेश सचिव एजाज अहमद से यह पूछे जाने पर कि यदि अमेरिका परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए कहता है, तो क्या पाकिस्तान ऐसा करेगा?

एजाज ने कहा, "यह पक्षपातपूर्ण संधि है। पाकिस्तान को अपनी सुरक्षा का अधिकार है, इसलिए यह एनटीपी पर हस्ताक्षर नहीं करेगा। हम आखिर हस्ताक्षर क्यों करें?"एजाज पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं, जो अमेरिका के साथ रणनीतिक वार्ता के लिए वाशिंगटन के दौरे पर है।

वर्ष 1970 में परमाणु अप्रसार संधि के प्रभाव में आने के बाद से अब तक 190 राष्ट्र संधि पर हस्ताक्षर कर चुके हैं, लेकिन भारत और पाकिस्तान ने संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। पाकिस्तान की ओर से संधि पर हस्ताक्षर करने से स्पष्ट इंकार अमेरिका की एनपीटी की अनिवार्यता को बढ़ावा देने की इच्छा के विरुद्ध है। लेकिन अमेरिका ने सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर या दूसरे मुद्दों पर पाकिस्तान की आलोचना से को नजरअंदाज किया है।

इधर, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की नेता रोज एलिन गॉटेमोलर ने पाकिस्तान के साथ वार्ता के मुद्दे पर कोई बयान जारी नहीं किया। वहीं उनके पूर्व बयानों में इस्लामाबाद से जुड़े मुद्दों पर अमेरिका के सावधान रुख का संकेत मिलता है। चौधरी से यह पूछे जाने पर कि पाकिस्तान ने अपनी परमाणु संपत्ति की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए हैं, उन्होंने कहा, "हमने एक बहुस्तरीय प्रणाली, मजबूत कमांड और नियंत्रण प्रणाली स्थापित की है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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