जहाज खराब, निर्जन द्वीप पर फंसे, 15 दिनों तक पीते रहे नारियल पानी, ऐसे बची 14 भारतीय मछुआरों की जान
द्वीप पर मछुआरों ने खारे पानी में ही चावल पकाकर भूख मिटाई। लेकिन जल्द ही वह चावल भी खत्म हो गया। इस दौरान यहां वे 15 दिन रहे और नारियल का फल खाकर और बारिस का पानी इकठ्ठा कर अपनी प्यास बुझाते रहे।

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जब भी जीने की 'आकांक्षा' और जीवित रहने के 'संघर्ष' की बात होती है लोगों को अचानक टॉम हैंक्स की फिल्म कास्ट अवे का ध्यान आता है। यह फिल्म बीच समंदर में एक टापू पर फंसे एक व्यक्ति की कहानी है। कास्ट अवे का किरदार एक निर्जन द्वीप पर फंस जाता है जहां न तो खाने के लिए अन्न है और न ही रहने के लिए कोई घर है और न ही उसके पास पहनने को कपड़े हैं। यानी कि जीवन जीने के लिए तीन मूलभूत चीजें उसके पास नहीं है। फिर वह अदम्य साहस और असाधारण इच्छाशक्ति के बूते वहां रहकर अपनी जान बचाए रखता है। जब केरल के नौ मछुआरे और तमिलनाडु के पांच मछुआरे 27 नवंबर, 2022 को मछली पकड़ने के लिए निकले, तो उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका जीवन जल्द ही कास्ट अवे में टॉम हैंक्स के चरित्र जैसा होगा।
35 दिनों का भोजन लादकर निकले
किसी भी अन्य दिन की तरह, ये सभी 14 मछुआरे तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले के थंगापट्टिनम से अपनी नाव में 35 दिनों का भोजन लाद कर निकले थे। ये सभी मछुआरे गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के अभ्यस्त थे और आम तौर पर लगातार 25 दिनों तक समुद्र में रहते थे। लेकिन 4 दिसंबर को, जब उन्हें अपनी यात्रा में बमुश्किल एक हफ्ता हुआ था, इनके नाव में एक समस्या आ गई।
श्रीलंकाई मछुआरों ने की मदद
दरअसल, सभी मछुआरे तट से लगभग पांच समुद्री मील दूर थे कि उनकी नाव का गियरबॉक्स टूट गया। ऐसे में उन्हें लगभग तीन दिनों तक समुद्र में लंगर डालना पड़ा। इसी दौरान उन्हें एक श्रीलंकाई मछली पकड़ने वाली नाव ने देखा। इसके बाद श्रीलंकाई मछुआरों की मदद से उन्होंने अपना गियर बॉक्स ठीक किया और एक बार फिर वे आगे निकल पड़े।
डोंगी की मदद से निर्जन द्वीप पहुंचे
गियर बॉक्स ठीक कराए कुछ ही वक्त हुआ था कि समुद्र में खराब मौसम होने के कारण, नाव का लंगर कट गया जिससे वह अनियंत्रित होकर बहने लगी। इसके बाद मछुआरे एक डोंगी की मदद से नाव को इले एंग्लिस तक पहुंचने में कामयाब रहे। इले एंग्लिस एक एटोल है जो सालोमन द्वीप समूह का हिस्सा है। यह मालदीव के दक्षिण में हिंद महासागर में चागोस द्वीपसमूह में स्थित है। एले इंगिल्स में उतर कर वे मदद की आस देखने लगे। इस दौरान भारतीय मछुआरों को कई दिन द्वीप पर गुजारना पड़ा।
नारियल पानी पीकर रहे जिंदा
द्वीप पर मछुआरों ने खारे पानी में ही चावल पकाकर भूख मिटाई। लेकिन जल्द ही वह चावल भी खत्म हो गया। इसी सुनसान एटोल, एले एंग्लिस टापू पर कई नारियल के पेड़ थे। यहां वे 15 दिन रहे और नारियल का फल खाकर और बारिस का पानी इकठ्ठा कर अपनी प्यास मिटाते। इस दौरान उन्होंने फिर से घर वापस जाने की आस ही छोड़ दी थी। मगर, 23 दिसंबर मछुआरों के लिए एक आशा की किरण बनकर आया जब वहां से गुजर रहे ब्रिटेन के OSV ग्रैम्पियन एंड्योरेंस जहाज ने देख लिया।
सभी मछुआरे काम पर लौटे
इसके बाद इस ब्रिटिश जहाज के क्रू ने इन मछुआरों को अपने साथ लिया और 10 दिन बाद 2 जनवरी को कोलाचेल तट पर भारतीय तट रक्षक को सौंप दिया। फिलहाल एक मछुआरा जो अत्यधिक धूप के संपर्क में आने के कारण बीमार पड़ गया था, अभी स्वास्थ्य लाभ ले रहा है। बाकी सारे मछुआरे पहले की ही तरह मछली पकड़ने के काम पर समुंद्र में लौट गए हैं।












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