नेपाल में भारी बारिश से तबाही, बाढ़ और भूस्खलन से 112 लोगों की मौत, 68 लापता
Nepal Flood: नेपाल में शुक्रवार से लगातार खराब मौसम के कारण विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन का सामना कर रहे नेपाल में हालात गंभीर हो गए हैं। मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। जिसके चलते बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में अब तक कम से कम 112 लोगों की जान चली गई है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार इन प्राकृतिक आपदाओं में 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं। जबकि 68 अन्य लापता बताए जा रहे हैं।
बचाव कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं। जिसमें 3 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टर और मोटरबोट का उपयोग किया जा रहा है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के प्रवक्ता बसंत अधिकारी ने जानकारी दी कि राहत और बचाव कार्यों के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं।

काठमांडू के आसपास की नदियों में बागमती और विष्णुमती उफान पर हैं। जिससे कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। भूस्खलन के कारण राजमार्गों पर आवागमन अवरुद्ध हो गया है और सैकड़ों यात्री फंसे हुए हैं। यातायात पुलिस अधिकारी बिश्वराज खड़का ने बताया कि आठ स्थानों पर भूस्खलन के कारण रास्ते बंद हो गए हैं। जिससे बचाव कार्यों में भी बाधा आ रही है। इसके अलावा काठमांडू से घरेलू उड़ानों को निलंबित कर दिया गया है। जिससे 150 से अधिक उड़ानें प्रभावित हुई हैं।
दक्षिण एशिया में 70-80 प्रतिशत बारिश ग्रीष्मकालीन मानसून के कारण होती है। जो नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन का कारण बनती है। हालांकि मानसून की बारिश सामान्य है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी आपदाओं की गंभीरता और आवृत्ति में चिंताजनक वृद्धि हो रही है।
इस साल मानसून के मौसम में अब तक नेपाल में 220 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। जुलाई में चितवन जिले में एक भूस्खलन के कारण नदी में गिरी दो बसों में से केवल 20 यात्रियों के शव बरामद किए जा सके थे। जबकि 39 अन्य लोग लापता हो गए थे।
स्थानीय निवासी आपदा के प्रभाव को देखकर स्तब्ध हैं। 34 वर्षीय मोटरबाइक वर्कशॉप मालिक महमद शबुद्दीन ने इस तबाही को अभूतपूर्व बताया है। जबकि 49 वर्षीय ट्रक चालक हरि मल्लाह ने पानी में फंसे अपने ट्रक के साथ कंधे तक पानी में चलने का डरावना अनुभव साझा किया है।
नेपाल की यह स्थिति जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों और आपदाओं से निपटने की तैयारी पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। फिलहाल बचाव अभियान जारी हैं और प्रभावित समुदायों की पुनर्वास में अंतर्राष्ट्रीय सहायता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
इस संकट के बीच नेपाल को अंतर्राष्ट्रीय समर्थन और ध्यान की सख्त आवश्यकता है। ताकि विनाशकारी आपदाओं से निपटने और भविष्य के लिए बेहतर तैयारियों को सुनिश्चित किया जा सके।












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