100 Days Of Trump: ट्रंप के 100 दिन पूरे, दुनिया की बज गई बैंड! कहां हुए फेल और कहां पास?
100 Days Of Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जब से सत्ता में आए हैं तभी से पूरी दुनिया के मार्केट की दोनों हाथों से बैंड बजा रहे हैं। इतना कि मार्केट लालम लाल हो गया है और शेयर मार्केट में पैसा लगाने वालों के अभी तक पसीने छूट रहे हैं। सिर्फ ऐसा हो कि दुनिया के मार्केट की ही बैंड बज रही हो और अमेरिका का मार्केट फल-फूल रहा हो तो ऐसा भी नहीं है। अमेरिका के मार्केट में पैसा लगाने वालों, अमेरिकन कंपनियों और टेक फर्म्स के भी ये दिन मुश्किल गुजरे। ट्रंप 2.0 के 100 दिन पूरे हो गए हैं ऐसे में उनके दूसरे कार्यकाल का हिसाब-किताब करना तो बनता है। इसलिए जानते हैं कि ट्रंप के पहले 100 दिनों ने दुनिया के नक्शे पर क्या बदलाव छोड़े।
चुनावी वादे और उनकी हकीकत में कितना फर्क?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कार्यालय में लौटने के बाद से ही अपने चुनावी वादों को पूरी ताकत के साथ पूरा कर रहे हैं, फिर वो चाहें दुनिया के पक्ष में रहें या विपक्ष में। रिपब्लिकन कांग्रेस के समर्थन के साथ, उन्होंने तमाम पॉलसियों को नया आकार देना और दूसरे देशों से संबंधों में बदलाव करना शुरू कर दिया है। राष्ट्रपति पद पर अपने 100वें दिन पहुंचते-पहुंचते ये स्पष्ट हो गया कि ट्रंप आखिर करना क्या चाह रहे हैं।

कहा था 'कम करेंगे दाम', हुआ क्या?
ट्रंप ने अपने चुनावी वादों में ऊर्जा लागत में कमी लाने की बात कही थी, मतदाताओं से कहा था कि वे 12 से 18 महीनों के भीतर अपने बिलों में आधे से भी कम की उम्मीद कर सकते हैं। आपको याद होगा कि उन्होंने उत्तरी कैरोलिना के मिंट हिल में एक रैली में समर्थकों को भरोसा दिलाया था कि उनकी योजना एनर्जी के क्षेत्र में कीमतों को आधे से भी कम करने की कोशिश रहेगी। हालांकि, उन्होंने कभी-कभी यह सुझाव दे कर इस वादे को टाल दिया कि भले ही कटौती इतनी बड़ी न हो, फिर भी यह काफी बड़ी होगी। लिहाजा ये वादा, पोस्टर्स तक ही सीमित रहा
आर्थिक वादों पर खेल गए ट्रंप
राष्ट्रपति ट्रंप के आर्थिक लक्ष्य कभी-कभी आपस में टकराते हैं। अमेरिका में दैनिक जीवन में होने वाले खर्चों की लागत को कम करने के मकसद से, वह विदेशी वस्तुओं पर टैरिफ लगाने की योजना लाए और उसे लागू भी किया, जिससे कीमतें घटने की जगह बढ़ और तेजी से बढ़ीं। लिहाजा फेडरल रिजर्व ने चेतावनी दी है कि इन टैरिफ से इम्पोर्ट पर टैक्स लगने से ग्राहकों की लागत बढ़ सकती है। मतलब ट्रंप ने महंगाई कम करने का वादा किया था, कोशिश भी की लेकिन उनकी कोशिश का असर उल्टा हुआ।
इमीग्रेशन और वीजा पर ट्रंप की सख्ती कितनी सही?
ट्रंप ने अमेरिका में अवैध घुसपैठ को कंट्रोल करने में सफलता हासिल की है। जो उनके चुनावी अभियान का एक प्रमुख वादा था। राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल के आखिरी साल से अवैध रूप से यूएस-मैक्सिको सीमा पार करने वाले वाले लोगों की संख्या में काफी कमी आई है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप का अवैध लोगों को अमेरिका से बाहर निकालने आंकड़ा पिछले साल के बाइडेन के रिकॉर्ड से मेल खाता है या नहीं। हालांकि अपने दूसरे कार्यकाल के शुरुआती दिनों में ट्रंप ने लोगों को विमान में भर-भरकर उनके वतन वापस भेजा और सिलसिला अभी भी जारी है।
अमेरिका में अभी भी गिरफ्तारी का दौर
इमिग्रेशन और कस्टम्स इंफोर्समेंट (ICE) देश भर में कई लोगों को गिरफ़्तार करना जारी है। कुछ लोगों को बिना किसी कानूनी और मानवीय प्रक्रिया के बाहर किया गया है, जैसे कि किल्मर अब्रेगो गार्सिया, जिन्हें कोई आपराधिक रिकॉर्ड न होने या कथित गिरोह से जुड़े होने की सुनवाई के बावजूद अल साल्वाडोर वापस भेज दिया गया। जहां उन्होंने अपनी जान को खतरा बताया था।
सबसे इंपोर्टेंट 'दि टैरिफ'
ये ट्रंप के उन विषयों में से है जिनको लेकर ट्रंप सबसे ज्यादा चर्चा में रहे. उन्होंने लगातार टैरिफ की वकालत की, उनका मानना है कि अन्य देश व्यापारिक सौदों में अमेरिका का शोषण करते हैं। उन्होंने 2 अप्रैल को अपनी "लिबरेशन-डे" घोषणा के हिस्से के रूप में कनाडा, मैक्सिको, भारत और चीन समेत तमाम देशों पर भयंकर टैरिफ लगाए। हालांकि बाद में उन्होंने इस योजना के कुछ पहलुओं पर बातचीत का विकल्प चुना और सभी देशों पर से टैरिफ में 90 दिनों की छूट दे दी, सिवाय चीन के। चीन पर टैरिफ 145% तक उच्च स्तर पर बना हुआ है। इम्पोर्ट टैक्सों के कारण शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव आया है। ट्रंप अपने पहले कार्यकाल की तुलना में अब बाजार की अस्थिरता के प्रति ज्यादा अलर्ट दिखे। क्योंकि जैसे ही ग्लोबल मार्केट में हलचल हुई तो उन्होंने बातचीत के रास्ते खोल दिए।
टैक्स में कटौती का क्या हुआ?
ट्रंप ने टैक्स कटौती का वादा किया था, लेकिन उन्हें पूरी तरह से हासिल करने के लिए कांग्रेस के समर्थन की जरूरत बताई। उनका टारगेट टिप्स, ओवरटाइम वेतन और सामाजिक सुरक्षा भुगतान पर टैक्सों को खत्म करना है, जबकि अपने पहले कार्यकाल से टैक्स कटौती को स्थायी बनाना है। यह दावा करने के बावजूद कि अमेरिका में महंगाई कंट्रोल में है और दरें 2022 में 9.1% से घटकर इस साल मार्च में 2.4% हो जाएंगी, ट्रंप की टैरिफ योजनाएं इम्पोर्ट टैक्सों के माध्यम से कीमतों में बढ़ोतर करके इन मुनाफों को बदल सकती हैं।
विदेश नीति में फेल हुए ट्रंप!
ट्रंप ने पिछली गर्मियों में वादा किया था कि चुनाव जीतने के तुरंत बाद रूस और यूक्रेन के बीच शांति स्थापित हो जाएगी। उन्होंने दावा किया कि वे कुर्सी संभालने के एक दिन के भीतर युद्ध समाप्त कर सकते हैं; हालांकि, संघर्ष जारी रहने के कारण यह वादा पूरा नहीं हुआ है। जो कि ट्रंप का एक बड़ा फेल्यर है। जबकि ट्रंप प्रशासन सक्रिय रूप से अपने एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है और अब तक इसके नतीजे भी दिख रहे हैं - खासकर इमिग्रेशन कंट्रोल के संबंध में, लेकिन इन कार्रवाइयों का भविष्य में क्या असर होगा, इसका कुछ पता नहीं है। क्योंकि चल रही कानूनी चुनौतियां और अदालती मामलों या नियमों में हो रहे बदलावों के जरिए संभावित नीतिगत उलटफेर हो रहे हैं। ऐसे में ट्रंप के पहले दिन फिफ्टी-फिफ्टी ही कहे जा सकते हैं।
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